Vande Mataram Row: वंदे मातरम विवाद पर मायावती का BJP-कांग्रेस पर निशाना, बोलीं- असली मुद्दों से भटकाया जा रहा ध्यान
वंदे मातरम को लेकर जारी राजनीतिक विवाद पर बीएसपी प्रमुख मायावती ने केंद्र व विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह सियासत हो रही है।
- Mayawati on Vande Mataram: राष्ट्रगीत पर सियासत को मायावती ने बताया अनुचित, कहा- बेरोजगारी और बाढ़ पर दें ध्यान
- वंदे मातरम पर जारी सियासी घमासान के बीच बोलीं मायावती: 'कानून बदलना राजनीतिक स्वार्थ', रोजगार और बाढ़ पर ध्यान देने की दी नसीहत
- वंदे मातरम गायन विवाद पर बीएसपी सुप्रीमो मायावती का बड़ा बयान, केंद्र और विपक्ष दोनों को लिया आड़े हाथ
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर देश के सियासी गलियारों में जारी तीखी बहस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और विपक्षी दलों दोनों पर निशाना साधा है। बीएसपी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि वंदे मातरम को पूरा गाने, केवल शुरुआती दो छंद गाने या इसे लेकर कानून बनाने की प्रक्रिया कोई नई बात नहीं है, बल्कि सत्ता परिवर्तन के साथ दल अपने राजनीतिक लाभ और कमियों को छिपाने के लिए ऐसे कदम उठाते रहे हैं। मायावती ने सरकारों और राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे भावनात्मक और प्रतीकात्मक मुद्दों के बजाय देश के गंभीर संकटों जैसे बेरोजगारी, युवाओं की समस्याओं और विभिन्न राज्यों में आई विनाशकारी बाढ़ से निपटने पर अपना ध्यान केंद्रित करें।
देश भर में राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन के प्रारूप, संसद में पारित संबंधित प्रावधानों और राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख को लेकर एक नया विवाद छिड़ गया है। इस विषय पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस समेत विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया मंच के माध्यम से अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि गीत के छंदों की संख्या अथवा गायन की अनिवार्यता को लेकर जो माहौल बनाया जा रहा है, वह वर्तमान समय में जनहित की प्राथमिकताओं के प्रतिकूल है।
संसद और सार्वजनिक मंचों पर वंदे मातरम को लेकर उठे गतिरोध के बीच मायावती ने एक विस्तृत बयान जारी किया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि सत्ता में आने वाले दल अक्सर अपने राजनीतिक स्वार्थ अथवा शासन की कमियों पर पर्दा डालने के लिए पूर्ववर्ती कानूनों में फेरबदल करते हैं। मायावती ने रेखांकित किया कि देश में जब भी सत्ता परिवर्तन होता है, राजनीतिक दल एक-दूसरे के बनाए कानूनों को बदलने में लग जाते हैं ताकि जनता का ध्यान मूल समस्याओं से भटकाया जा सके। उन्होंने इस प्रवृत्ति को राजनीति का दोहरा चरित्र करार देते हुए कहा कि इस तरह के प्रतीकात्मक मुद्दों को तूल देना लोकतंत्र के लिए उचित परंपरा नहीं है।
मायावती के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। जहां सत्ता पक्ष और प्रमुख विपक्षी दल राष्ट्रगीत की ऐतिहासिकता और परंपराओं को लेकर आमने-सामने हैं, वहीं बीएसपी प्रमुख ने दोनों ही पक्षों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती ने इस विवाद से दूरी बनाते हुए खुद को जनसरोकारों और विकास के मुद्दों से जोड़ने की रणनीति अपनाई है। उन्होंने खासतौर पर रेखांकित किया कि नई पीढ़ी, जिसमें छात्र-छात्राएं और बेरोजगार युवा शामिल हैं, वे रोजगार और बेहतर शिक्षा की राह देख रहे हैं, जबकि राजनीतिक दल अनावश्यक विवादों में उलझे हुए हैं।
बीएसपी प्रमुख के इस हस्तक्षेप से यह बहस अब प्रतीकात्मक राष्ट्रवाद बनाम बुनियादी जनसमस्याओं के मुद्दे पर केंद्रित होती दिख रही है। देश के कई राज्यों में प्राकृतिक आपदा और बाढ़ के कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ है। ऐसे समय में जब राहत कार्यों और प्रशासनिक तत्परता की सर्वाधिक आवश्यकता है, राजनीतिक मंचों पर राष्ट्रगीत को लेकर हो रही खींचतान पर मायावती की टिप्पणी ने शासन व्यवस्था की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए हैं। इससे सामाजिक व छात्र संगठनों के बीच भी रोजगार और आपदा प्रबंधन जैसे ठोस मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही को लेकर आवाजें तेज हो सकती हैं।
आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक इस मुद्दे पर विभिन्न दलों का रुख और अधिक स्पष्ट होने की संभावना है। बीएसपी प्रमुख द्वारा उठाए गए मुद्दों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मुख्यधारा का राजनीतिक विमर्श वास्तविक समस्याओं जैसे बेरोजगारी और आपदा प्रबंधन की ओर मुड़ता है या फिर प्रतीकात्मक और कानूनी बहसों का यह सिलसिला इसी प्रकार जारी रहता है। मायावती ने सभी दलों से आत्मनिरीक्षण करने और राष्ट्र निर्माण के लिए जनहित से जुड़े गंभीर विषयों पर रचनात्मक काम करने का आग्रह किया है।
What's Your Reaction?







