Delhi Cyber Crime: रिटायर्ड कर्नल को डिजिटल अरेस्ट कर 15.50 लाख की ठगी, कंबोडिया-दुबई सिंडिकेट के 4 आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली में रिटायर्ड कर्नल को डिजिटल अरेस्ट कर ₹15.50 लाख ठगने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह के चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जानें पूरा मामला।

Aug 21, 2026 - 16:23
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Delhi Cyber Crime: रिटायर्ड कर्नल को डिजिटल अरेस्ट कर 15.50 लाख की ठगी, कंबोडिया-दुबई सिंडिकेट के 4 आरोपी गिरफ्तार
  • Digital Arrest Fraud in Delhi: पूर्व सैन्य अधिकारी से 15.50 लाख रुपये ठगने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश, 4 दबोचे
  • दिल्ली में डिजिटल अरेस्ट का बड़ा मामला: रिटायर्ड कर्नल से ठगे ₹15.50 लाख, कंबोडिया और दुबई से जुड़े तार, 4 गिरफ्तार
  • दिल्ली: रिटायर्ड कर्नल को डिजिटल अरेस्ट कर 15.50 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के 4 सदस्य गिरफ्तार

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त कर्नल को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 15.50 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी करने का गंभीर मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल साइबर टीम ने त्वरित तकनीकी विश्लेषण और वित्तीय लेनदेन की निगरानी के बाद इस अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट से जुड़े चार संदिग्ध आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के तार कंबोडिया और दुबई में बैठे सिंडिकेट संचालकों से जुड़े पाए गए हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियां अब बैंक खातों के नेटवर्क और विदेशी सर्वरों के माध्यम से किए गए संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं, ताकि ठगी गई राशि के प्रवाह का पता लगाकर शेष नेटवर्क पर शिकंजा कसा जा सके।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में साइबर अपराधियों द्वारा सरकारी जांच एजेंसियों और पुलिस का फर्जी अधिकारी बनकर नागरिकों को डराने और उनसे धन ऐंठने का एक और बड़ा मामला उजागर हुआ है। इस घटना में एक रिटायर्ड सैन्य कर्नल को निशाना बनाया गया, जिन्हें वीडियो और ऑडियो कॉल के जरिए फर्जी कानूनी कार्रवाई, मनी लॉन्ड्रिंग अथवा गैरकानूनी पार्सल के झूठे आरोपों में फंसाने की धमकी दी गई। जालसाजों ने पीड़ित को मानसिक दबाव में रखकर कई घंटों तक डिजिटल निगरानी यानी तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा। इस दौरान पीड़ित को किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क न करने और कानूनी प्रक्रिया से बचने के नाम पर 15.50 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए विवश किया गया।

जांच अधिकारियों से प्राप्त प्राथमिक जानकारी के अनुसार, पीड़ित को अज्ञात नंबरों से कॉल आए थे, जिनमें खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसी का प्रतिनिधि बताया गया। कॉल करने वालों ने दावा किया कि उनके नाम से अवैध वित्तीय लेनदेन और संदिग्ध पार्सल जुड़े पाए गए हैं, जिसकी तुरंत उच्च स्तरीय जांच की जा रही है। पीड़ित पर दबाव बनाने के लिए फर्जी कानूनी दस्तावेज और आधिकारिक दिखने वाले पहचान पत्र डिजिटल माध्यम से भेजे गए। घबराहट और सामाजिक बदनामी के डर में पीड़ित ने बताए गए खातों में कुल 15.50 लाख रुपये की राशि स्थानांतरित कर दी। लेनदेन पूरा होने और संपर्क टूटने के बाद जब पीड़ित को धोखाधड़ी का अहसास हुआ, तब उन्होंने तुरंत पुलिस के साइबर हेल्पलाइन पोर्टल पर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।

दिल्ली पुलिस के साइबर सेल अधिकारियों के अनुसार, शिकायत मिलने के तुरंत बाद तकनीकी निगरानी और बैंक खातों के वित्तीय विश्लेषण की शुरुआत की गई। पुलिस दल ने उन खातों की पहचान की जिनमें ठगी की रकम भेजी गई थी। इन 'म्यूल बैंक अकाउंट्स' और तकनीकी इनपुट्स के आधार पर छापेमारी करते हुए गिरोह से जुड़े चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि भारत में सक्रिय यह मॉड्यूल कंबोडिया और दुबई में बैठे मुख्य मास्टरमाइंड्स के सीधे संपर्क में था और ठगी की रकम को तेजी से विभिन्न खातों व विदेशी चैनलों में भेजने का काम करता था।

इस खुलासे ने देश भर में तेजी से बढ़ रहे 'डिजिटल अरेस्ट' के तौर-तरीकों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित साइबर अपराध सिंडिकेट्स की सक्रियता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त अधिकारियों को लक्षित करने का यह चलन चिंता का विषय बना हुआ है। इस घटना के बाद साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन ने दोहराया है कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है और कोई भी वैध जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर संपत्ति जब्त करने या पैसे ट्रांसफर करने का दबाव नहीं बनाती।

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए चारों संदिग्धों के पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और संदिग्ध बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज बरामद किए हैं। अदालत से रिमांड प्राप्त कर आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है ताकि गिरोह द्वारा अन्य मामलों में की गई धोखाधड़ी और म्यूल खातों के नेटवर्क का पूरा ब्योरा निकाला जा सके। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हैंडलर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हेतु इंटरपोल और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।

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