New UPI Scam: ऑटो में QR कोड स्कैन करते समय रहें सावधान, जालसाज ऐसे खाली कर रहे बैंक खाता; जानें बचाव के उपाय
ऑटो और कैब में QR कोड स्कैन कर यूपीआई भुगतान करने वालों के लिए बड़ा अलर्ट। साइबर ठगों के नए तरीके और बैंक खाते को सुरक्षित रखने के जरूरी उपाय जानें।
- ऑटो रिक्शा में QR कोड से पेमेंट करने वाले तुरंत हो जाएं अलर्ट! सामने आया नया यूपीआई फ्रॉड, जानिए कैसे काम करता है यह स्कैम
- ऑटो में QR कोड स्कैन करने से पहले हो जाएं सावधान: यूपीआई पेमेंट के नाम पर हो रहा बड़ा फ्रॉड, बैंक खाता हो सकता है खाली
- Cyber Alert: ऑटो रिक्शा और कैब में फर्जी QR कोड लगाकर यूपीआई फ्रॉड करने वाला नया साइबर स्कैम बेनकाब, एडवाइजरी जारी
देश भर में डिजिटल लेन-देन और यूपीआई के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर अपराधियों ने आम नागरिकों को ठगने का एक नया और खतरनाक तरीका ढूंढ निकाला है। दैनिक आवागमन के लिए ऑटो रिक्शा, ई-रिक्शा और टैक्सियों में लगे क्यूआर कोड के माध्यम से धोखाधड़ी के कई मामले सामने आ रहे हैं। साइबर ठग मूल व्यापारी के क्यूआर कोड के ऊपर अपना फर्जी या मैलिशियस क्यूआर कोड चिपकाकर या फिशिंग लिंक जनरेट कर यात्रियों के बैंक खातों में सेंध लगा रहे हैं। जैसे ही यात्री भुगतान करने के लिए कोड स्कैन करते हैं, वे अनजाने में दुर्भावनापूर्ण वेबसाइट या अनधिकृत पेमेंट रिक्वेस्ट के जाल में फंस जाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों और साइबर विशेषज्ञों ने इस संबंध में व्यापक अलर्ट जारी करते हुए डिजिटल पेमेंट करते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है।
- ऑटो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में नया यूपीआई फ्रॉड
डिजिटल इंडिया की दिशा में यूपीआई प्रणाली ने नकदी की निर्भरता को लगभग समाप्त कर दिया है, लेकिन इसी सुविधा का दुरुपयोग अब साइबर जालसाजों द्वारा किया जा रहा है। हाल ही में सामने आए मामलों में देखा गया है कि ऑटो रिक्शा, टैक्सी और छोटे स्ट्रीट वेंडरों की दुकानों पर लगे सार्वजनिक क्यूआर कोड को निशाना बनाया जा रहा है।
जालसाज भीड़भाड़ या ड्राइवर की नजरों से बचकर वास्तविक मर्चेंट क्यूआर कोड के ऊपर ठीक उसी आकार और डिजाइन का अपना फर्जी स्टीकर चिपका देते हैं। यात्री जब सफर पूरा होने के बाद किराया चुकाने के लिए इसे स्कैन करते हैं, तो राशि असली चालक तक पहुंचने के बजाय या तो जालसाज के खाते में चली जाती है या फिर स्मार्टफोन में कोई दुर्भावनापूर्ण फाइल डाउनलोड कराकर बैंकिंग विवरण चुराने का प्रयास किया जाता है।
- कैसे बुना जाता है ठगी का जाल
इस नए साइबर फ्रॉड का तरीका बेहद संगठित और तकनीकी रूप से घातक है। पहली श्रेणी में जालसाज ऑटो में लगे वैध पेमेंट बोर्ड पर अपना निजी क्यूआर कोड लगा देते हैं। यात्री द्वारा स्कैन करते ही स्क्रीन पर ऑटो चालक का नाम आने के बजाय किसी अज्ञात व्यक्ति या फर्जी मर्चेंट आईडी दिखाई देती है, जिसे यात्री जल्दबाजी में नजरअंदाज कर देते हैं और भुगतान कर बैठते हैं।
दूसरी और अधिक खतरनाक तकनीक में जालसाज क्यूआर कोड के जरिए फिशिंग यूआरएल या रिवर्स पेमेंट एपीके फाइलों को जोड़ देते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी थर्ड पार्टी स्कैनर से कोड स्कैन करता है, तो वह एक फर्जी बैंकिंग गेटवे पर रीडायरेक्ट हो जाता है। वहां 'रिफंड' या 'कैशबैक' का झांसा देकर यूजर से यूपीआई पिन दर्ज करने को कहा जाता है। चूंकि कई लोग इस बुनियादी तकनीकी नियम को भूल जाते हैं कि पैसे प्राप्त करने के लिए कभी पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती, वे अपना सीक्रेट पिन डाल देते हैं और कुछ ही पलों में उनका बैंक खाता खाली हो जाता है।
- पुलिस और साइबर सेल की चेतावनी
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और विभिन्न राज्यों की साइबर सेल ने इस प्रकार की धोखाधड़ी को लेकर नागरिकों को सतर्क किया है। साइबर सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर चिपके क्यूआर कोड पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। यदि स्टीकर किसी पुराने बोर्ड पर अलग से चिपकाया हुआ दिखे या उस पर कोई खरोंच नजर आए, तो तुरंत चालक से पुष्टि करें।
बैंकिंग विशेषज्ञों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, उपभोक्ताओं को हमेशा आधिकारिक यूपीआई ऐप (जैसे भीम, फोनपे, गूगल पे आदि) के इन-बिल्ट स्कैनर का ही उपयोग करना चाहिए। किसी भी अनजान थर्ड-पार्टी कैमरा या स्कैनर ऐप से पेमेंट क्यूआर कोड स्कैन करने से मालवेयर अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।
- डिजिटल विश्वास और सतर्कता की चुनौती
इस नए फ्रॉड पैटर्न के चलते आम यात्रियों और ऑटो चालकों के बीच असमंजस की स्थिति बन रही है। चालकों को जहां अपनी वैध कमाई के नुकसान का डर सता रहा है, वहीं नियमित रूप से कैशलेस रहने वाले उपभोक्ताओं के मन में सुरक्षा को लेकर संशय उत्पन्न हो रहा है।
इस घटनाक्रम ने यह भी सिद्ध किया है कि वित्तीय तकनीक के तेजी से प्रसार के साथ-साथ जमीनी स्तर पर साइबर साक्षरता का होना कितना अनिवार्य है। बैंक और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स अब ऑटो-रिक्शा चालकों और छोटे व्यापारियों को क्यूआर कोड स्टैंडी की नियमित जांच करने और डिजिटल वॉइस बॉक्स लगाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, ताकि हर सफल ट्रांजैक्शन की तत्काल ध्वनि पुष्टि हो सके।
- सुरक्षित यूपीआई भुगतान के लिए जरूरी सावधानियां
डिजिटल फ्रॉड से सुरक्षित रहने के लिए प्रत्येक उपभोक्ता को बुनियादी डिजिटल सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। किसी भी क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद स्क्रीन पर प्रदर्शित होने वाले नाम (मर्चेंट नेम) का मिलान सामने खड़े चालक से अवश्य करें।
यदि कभी किसी लेन-देन में संदिग्ध गतिविधि दिखे या खाते से अनधिकृत कटौती हो जाए, तो बिना समय गंवाए तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराएं और अपने संबंधित बैंक को सूचना देकर यूपीआई सेवा को ब्लॉक कराएं। इसके अलावा, अपने फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम को हमेशा अपडेट रखें और किसी भी अनजान लिंक या पॉप-अप पर क्लिक करने से बचें।
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