Hardoi: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर हुई संगोष्ठी, इतिहास से सीख लेकर राष्ट्रीय एकता मजबूत करने का आह्वान
हरदोई विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में विभाजन की पीड़ा को याद कर नई पीढ़ी को इतिहास से
हरदोई विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में विभाजन की पीड़ा को याद कर नई पीढ़ी को इतिहास से सीख लेने का आह्वान जिला पंचायत सभागार में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने की। मुख्य अतिथि विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) इंजीनियर अवनीश सिंह ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, प्रबुद्ध नागरिकों एवं युवाओं को संबोधित करते हुए भारत विभाजन की ऐतिहासिक त्रासदी को एक काला अध्याय बताया।
मुख्य अतिथि ने कहा कि 14 अगस्त 1947, भारतीय इतिहास की सबसे दर्दनाक और रक्तरंजित तिथियों में से एक है। यह केवल भौगोलिक सीमाओं का विभाजन नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, परिवारों, संस्कृतियों और भावनाओं का भी विभाजन था। एक ओर देश स्वतंत्रता का उत्सव मनाने की तैयारी कर रहा था, वहीं दूसरी ओर लाखों परिवार हिंसा, विस्थापन और असुरक्षा का सामना कर रहे थे। अनेक लोगों को अपने पुश्तैनी घर छोड़ने पड़े, हजारों महिलाओं ने अमानवीय अत्याचार सहे और असंख्य निर्दोष नागरिक सांप्रदायिक हिंसा की भेंट चढ़ गए। विभाजन के दौरान विशेष रूप से पंजाब और बंगाल जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जनहानि एवं पलायन हुआ, जिसकी पीड़ा आज भी लाखों परिवारों की स्मृतियों में जीवित है।
उन्होंने कहा कि इतिहास का उद्देश्य किसी समुदाय के प्रति वैमनस्य उत्पन्न करना नहीं, बल्कि अतीत की त्रासदियों से सीख लेकर भविष्य को सुरक्षित बनाना है। विभाजन की घटनाएँ हमें यह संदेश देती हैं कि जब समाज में कट्टरता, सांप्रदायिक विद्वेष, तुष्टिकरण और राजनीतिक स्वार्थ राष्ट्रीय हितों पर हावी हो जाते हैं, तब उसकी सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ती है।
इंजीनियर अवनीश सिंह ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के लिए यह आवश्यक है कि वह विभाजन से जुड़े प्रमाणिक इतिहास, प्रत्यक्षदर्शियों के संस्मरण और ऐतिहासिक दस्तावेजों का अध्ययन करे। केवल स्वतंत्रता प्राप्ति के गौरव को जानना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस स्वतंत्रता के लिए चुकाई गई मानवीय कीमत को समझना भी उतना ही आवश्यक है। जब नई पीढ़ी इतिहास के इन अध्यायों को पढ़ेगी और उन पर गंभीर मंथन करेगी, तभी वह राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों के महत्व को सही अर्थों में समझ सकेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन लाखों ज्ञात-अज्ञात लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने का दिवस है, जिन्होंने विभाजन की भयावह परिस्थितियों में अपना सर्वस्व खो दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की अखंडता, सामाजिक समरसता और संविधान सम्मत लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।
संगोष्ठी में जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन ने विभाजन की विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए संकल्प लिया कि भारत की एकता, अखंडता, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय चेतना को सदैव सर्वोपरि रखा जाएगा तथा आने वाली पीढ़ियों को इतिहास के इन महत्वपूर्ण अध्यायों से परिचित कराया जाएगा, ताकि ऐसी त्रासदी की पुनरावृत्ति कभी न हो।
संगोष्ठी में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमवती ने संबोधन दिया। संगोष्ठी समापन पर जिला पंचायत सभागार में प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। इसके बाद जिला पंचायत से गांधी भवन तक मौन जुलूस निकाला गया
इस अवसर पर व्यापार मंडल अध्यक्ष पवन जैन, क्षेत्रीय अनुसूचित मोर्चा महामंत्री पीके वर्मा, जिला महामंत्री अनुराग मिश्रा, सत्येंद्र राजपूत, ओम वर्मा, जिला उपाध्यक्ष प्रीतेश दीक्षित, संदीप सिंह, अलका गुप्ता, आकाश सिंह, सौरभ सिंह, जिला मंत्री नीतू चंद्रा, सत्यम शुक्ला, रितेश गुप्ता, निर्देश राजपूत, आदित्य कुशवाहा, जिला सहकोषाध्यक्ष कांग्रेस पाठक, मीडिया प्रभारी अतुल सिंह, परेश गुप्ता, आयुष सिंह, कार्यालय मंत्री आजाद भदौरिया, आशुतोष बाजपेई, आईटी संयोजक प्रदुम मिश्रा, हर्ष, ऋतुराज त्रिपाठी, प्रांतीय सदस्य अजीत उपाध्याय, अविनाश मिश्रा, अनुराधा मिश्रा, शोभना सिंह, रीना गुप्ता, अरविंद सिंह भालोद, नीरज तिवारी, सत्यम तिवारी, नवेंद्र सिंह, सत्येंद्र सिंह और कृपाल राठौर सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
What's Your Reaction?



