Delhi Cyber Crime: जूडियो फ्रेंचाइजी के नाम पर 39.53 लाख की ठगी, बैंक खाते मुहैया कराने वाला आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने जूडियो फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर 39.53 लाख रुपये की ठगी के मामले में साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है।

Aug 26, 2026 - 16:29
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Delhi Cyber Crime: जूडियो फ्रेंचाइजी के नाम पर 39.53 लाख की ठगी, बैंक खाते मुहैया कराने वाला आरोपी गिरफ्तार
  • Zudio Franchise Scam: जूडियो डीलरशिप के बहाने लाखों की धोखाधड़ी, दिल्ली पुलिस ने पकड़ा 'म्यूल अकाउंट' सप्लायर
  • जूडियो फ्रेंचाइजी का झांसा देकर 39.53 लाख की साइबर ठगी: दिल्ली पुलिस ने ठगों के नेटवर्क से जुड़े आरोपी को दबोचा
  • दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को बड़ी सफलता, जूडियो फ्रेंचाइजी के नाम पर 39.53 लाख रुपये की ठगी का भंडाफोड़

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने लोकप्रिय रिटेल फैशन ब्रांड 'जूडियो' (Zudio) की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर एक नागरिक से 39.53 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के एक अहम सदस्य को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी साइबर ठगों को अवैध लेनदेन के लिए बैंक खाते (म्यूल अकाउंट्स) मुहैया कराने के नेटवर्क में शामिल बताया जा रहा है। पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और बैंक ट्रेल की जांच करते हुए इस कार्रवाई को अंजाम दिया। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर गिरोह के अन्य मास्टरमाइंड्स और धोखाधड़ी की रकम को ट्रांसफर करने वाले पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। 

देशभर में लोकप्रिय हो रहे अपैरल ब्रांड जूडियो की आउटलेट डीलरशिप या फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर साइबर अपराधियों द्वारा फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है। ठगों ने पीड़ित को अधिकृत फ्रेंचाइजी पार्टनर बनाने का झांसा देकर रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी डिपॉजिट, एग्रीमेंट और स्टॉक सप्लाई के नाम पर विभिन्न चरणों में कुल 39.53 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी की। जब पीड़ित को कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली और संपर्क बंद हो गया, तब ठगी का अहसास हुआ और मामले की शिकायत दिल्ली पुलिस के साइबर थाने में दर्ज कराई गई। 

पुलिस जांच के अनुसार, साइबर अपराधियों ने नामी ब्रांड की हूबहू दिखने वाली फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया विज्ञापनों का सहारा लेकर लोगों को आकर्षित किया था। पीड़ित ने फ्रेंचाइजी के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरा, जिसके बाद कथित कंपनी प्रतिनिधियों ने ईमेल और फोन के जरिए संपर्क साधा। खुद को कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी बताकर उन्होंने जाली सहमति पत्र और अप्रूवल लेटर भेजे। इसके बाद पंजीकरण शुल्क, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) और अग्रिम स्टॉक के नाम पर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई।

दिल्ली पुलिस की विशेष तकनीकी टीम ने जब ठगी गई 39.53 लाख रुपये की धनराशि का वित्तीय ट्रेल खंगाला, तो पाया कि यह रकम कई अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई थी। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस टीम ने उन बैंक खातों की पहचान की और खातों को ठगों तक पहुंचाने वाले संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया। प्राथमिक जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी ने कमीशन के बदले साइबर ठगी के सिंडिकेट को कई बैंक खाते उपलब्ध कराए थे।

बड़े और प्रतिष्ठित ब्रांड्स कभी भी सोशल मीडिया लिंक्स या अनजान बैंक खातों में सीधे फ्रेंचाइजी फीस ट्रांसफर करने की मांग नहीं करते। किसी भी व्यावसायिक अनुबंध से पूर्व कंपनी के आधिकारिक पोर्टल पर सत्यापन अनिवार्य है।

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के मुताबिक, साइबर अपराध के मामलों में बैंक खातों की श्रृंखला (म्यूल अकाउंट्स) को खंगालना बेहद महत्वपूर्ण कड़ी होती है। पुलिस का कहना है कि यह गिरफ्तारी इस गिरोह के वित्तीय नेटवर्क को तोड़ने में मदद करेगी। आरोपी के पास से बरामद डिजिटल उपकरणों और बैंक दस्तावेजों का तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है। वहीं, साइबर विशेषज्ञों ने भी नागरिकों को आगाह किया है कि किसी भी प्रसिद्ध कंपनी की डीलरशिप या फ्रेंचाइजी के लिए अनाधिकृत विज्ञापनों या फॉर्म्स पर अपनी संवेदनशील जानकारी साझा न करें।

इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हुआ है कि साइबर ठग अब केवल छोटे लॉटरी या ओटीपी फ्रॉड तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे स्थापित कॉर्पोरेट ब्रांड्स के नाम पर बड़े पैमाने पर संस्थागत और बिजनेस इन्वेस्टमेंट फ्रॉड कर रहे हैं। इस घटना के बाद उन लोगों को सावधान रहने की जरूरत है जो नए व्यवसाय या फ्रेंचाइजी के अवसरों की तलाश में ऑनलाइन आवेदन करते हैं। पुलिस द्वारा खाता सप्लायर की गिरफ्तारी से म्यूल अकाउंट बेचने वाले एजेंटों के खिलाफ भी कार्रवाई तेज होने की संभावना है।

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल अब गिरफ्तार आरोपी की निशानदेही पर मुख्य ठगों और सिंडिकेट के तकनीकी संचालकों की धरपकड़ के लिए दबिश दे रही है। पुलिस बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर उन सभी खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया में है जिनमें धोखाधड़ी की राशि ट्रांसफर की गई थी, ताकि पीड़ित की रकम को बरामद कराया जा सके। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क ने अन्य कितने लोगों को इसी तरह का शिकार बनाया है।

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