UP Bhujal Saptah: उत्तर प्रदेश में सहजन के बीज और ज्वालामुखीय पत्थर से बचेगा लाखों लीटर पानी, भूगर्भ जल विभाग करेगा शोध

Bhujal Saptah: उत्तर प्रदेश में घरेलू आरओ से बर्बाद होने वाले पानी को सहजन के बीज और ज्वालामुखीय पत्थर से बचाने की तकनीक पर नया शोध शुरू होने जा रहा है।

Jul 17, 2026 - 21:58
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UP Bhujal Saptah: उत्तर प्रदेश में सहजन के बीज और ज्वालामुखीय पत्थर से बचेगा लाखों लीटर पानी, भूगर्भ जल विभाग करेगा शोध

उत्तर प्रदेश की सरकार जल संरक्षण और जमीन के भीतर के पानी को बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रही है। इसी कड़ी में राजधानी लखनऊ में आयोजित भूजल सप्ताह के अंतर्गत एक विशेष जल-संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में घरेलू आरओ सिस्टम से फिल्टर होने के बाद बर्बाद जाने वाले लाखों लीटर पानी को दोबारा उपयोग में लाने की एक अनोखी और प्राकृतिक तकनीक पर विस्तार से चर्चा हुई। भूगर्भ जल विभाग के निदेशक डॉक्टर राजेश कुमार प्रजापति की देखरेख में हुए इस कार्यक्रम में यह बात सामने आई कि सहजन के बीज और छिद्रयुक्त ज्वालामुखीय पत्थर की मदद से खराब पानी को शुद्ध करके बचाया जा सकता है। विभाग ने इस नए विचार को आगे बढ़ाने और इस पर जल्द ही शोध कर नया मॉडल तैयार करने पर अपनी सहमति दे दी है।

इस प्राकृतिक तकनीक के काम करने के तरीके को समझाते हुए विशेषज्ञों ने बताया कि मोरिंगा यानी सहजन के बीजों का पाउडर पानी में मौजूद अशुद्धियों और बारीक गंदगी को आपस में समेटकर नीचे बैठा देता है। दूसरी तरफ, स्कोरिया वॉल्केनिक रॉक यानी छिद्रयुक्त ज्वालामुखीय पत्थर अपनी खास बनावट के कारण पानी को छानने में बहुत मददगार साबित होता है। इस प्राकृतिक विधि से आरओ से निकले व्यर्थ पानी को दोबारा काम में लाने लायक बनाया जा सकता है, जिससे हर दिन बड़े पैमाने पर जल संकट को कम करने में मदद मिलेगी। हालांकि, इसे पूरी तरह से आम उपयोग में लाने से पहले अभी और वैज्ञानिक परीक्षण किए जाने बाकी हैं।

बैठक में पानी बचाने के क्षेत्र में बेहतर काम करने वाले लोगों और संस्थाओं को प्रोत्साहित करने का सुझाव भी दिया गया। सामाजिक संगठनों ने राय दी कि जिन गांवों, शहरी इलाकों या आवासीय समितियों में बारिश के पानी को इकट्ठा करने, छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने और गंदे पानी को साफ कर दोबारा इस्तेमाल करने का अच्छा काम हो रहा है, उन्हें सरकार की तरफ से सम्मानित किया जाना चाहिए। इससे लोगों के बीच पानी बचाने की एक अच्छी होड़ शुरू होगी। इसके साथ ही आधुनिक सैटेलाइट और जीआईएस तकनीक से जल स्रोतों का नक्शा तैयार करने की बात कही गई। विभाग के निदेशक डॉक्टर राजेश कुमार प्रजापति ने कहा कि पानी को सुरक्षित रखने के लिए समाज के हर व्यक्ति को जल संरक्षण को अपनी आदत में शामिल करना होगा।

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