कब्रिस्तान की ज़मीन पर बनी ईदगाह पर चला प्रशासन का एक्शन, ग्रामीणों ने जताया विरोध; तहसीलदार बोले- मूल स्वरूप होगा बहाल
जनपद सम्भल के थाना असमोली के ग्राम मढ़न में कब्रिस्तान की भूमि पर बनी ईदगाह को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रशासन द्वारा की
उवैस दानिश, सम्भल
जनपद सम्भल के थाना असमोली के ग्राम मढ़न में कब्रिस्तान की भूमि पर बनी ईदगाह को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध जताते हुए कहा कि यह स्थान वर्षों से ईदगाह और कब्रिस्तान दोनों के रूप में इस्तेमाल होता रहा है और यहां ईद व बकरीद पर नमाज़ के साथ जनाज़े की नमाज़ भी अदा की जाती है।
स्थानीय निवासी कल्लू ने कहा कि किसी से कोई विवाद नहीं है, लेकिन प्रशासन आखिर इस स्थान को क्यों घेर रहा है, यह समझ से परे है। उनका कहना है कि यह कब्रिस्तान की ज़मीन है, जहां जनाज़े की नमाज़ पढ़ी जाती है और दफन की प्रक्रिया भी होती है। वहीं जुम्मा खान ने कहा कि यह स्थान उनके पूर्वजों के समय से ईदगाह और कब्रिस्तान दोनों के रूप में इस्तेमाल होता आया है। उन्होंने बताया कि पहले सड़क किनारे नमाज़ पढ़ी जाती थी, जिससे रास्ता बाधित होता था। इसी वजह से नमाज़ के लिए इस स्थान का उपयोग शुरू किया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से दोबारा अपनी मांग रखने की बात भी कही। उधर, तहसीलदार धीरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि चकबंदी के दौरान गाटा संख्या 208 को कब्रिस्तान के लिए सुरक्षित किया गया था। उनके अनुसार गाटा संख्या 210 आज भी कब्रिस्तान के रूप में प्रयुक्त हो रहा है, लेकिन गाटा संख्या 208 का प्रयोजन बदलकर कुछ स्थानीय लोगों ने उसे ईदगाह बना दिया। तहसीलदार का कहना है कि गांव में इसको लेकर असंतोष है और प्रशासन का उद्देश्य कब्रिस्तान की भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करना तथा सरकारी अभिलेखों के अनुसार उपयोग सुनिश्चित करना है।
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