उन्नाव में एआरटीओ प्रवर्तन और ट्रक चालकों के बीच भारी हंगामा: चेकिंग के दौरान सड़क पर मची अफरा-तफरी
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम और ट्रक चालकों के बीच हुए विवाद ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा
- सरकारी कार्य में बाधा और हाथापाई का वीडियो वायरल: एआरटीओ प्रतिभा गौतम ने जारी किया घटना का पूरा विवरण
- दही थाना क्षेत्र में ट्रक चालकों का हाई वोल्टेज ड्रामा: चाबी निकालने और जीपीएस लॉक होने पर छिड़ा बड़ा विवाद
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम और ट्रक चालकों के बीच हुए विवाद ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। यह पूरी घटना दही थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाके की है, जहाँ नियमित चेकिंग अभियान के दौरान एआरटीओ प्रवर्तन प्रतिभा गौतम अपनी टीम के साथ वाहनों की जांच कर रही थीं। इसी दौरान संदिग्ध पाए गए पांच ट्रकों को पकड़कर टीम जांच और वजन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नजदीकी धर्मकांटा पर लेकर आई थी। हालांकि, एक सामान्य दिखने वाली यह प्रक्रिया अचानक एक हिंसक झड़प में बदल गई, जिसके बाद मौके पर काफी भीड़ जमा हो गई और स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे दृश्यों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे सरकारी अधिकारियों और चालकों के बीच मर्यादा की सीमाएं लांघी गईं।
घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए एआरटीओ प्रतिभा गौतम ने स्वयं सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। उनके अनुसार, विभाग की टीम संदिग्ध वाहनों पर कार्रवाई कर रही थी और इसी क्रम में पकड़े गए पांचों ट्रकों को धर्मकांटा पर लाया गया था। विवाद की मुख्य जड़ तब बनी जब सबसे आगे खड़े ट्रक का जीपीएस सिस्टम तकनीकी कारणों से लॉक हो गया। जीपीएस लॉक होने की वजह से वह ट्रक अपनी जगह से टस से मस नहीं हो पा रहा था, जिसके कारण उसके पीछे कतार में खड़े अन्य चार ट्रक भी वहीं फंस गए। रास्ता अवरुद्ध होने और जांच में देरी होने के कारण ट्रक चालकों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने प्रवर्तन टीम के साथ बहस शुरू कर दी, जो देखते ही देखते हाथापाई तक पहुँच गई।
विवाद का स्तर तब और अधिक गंभीर हो गया जब ट्रक चालकों ने न केवल मौखिक अभद्रता की, बल्कि सरकारी कार्य में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया। एआरटीओ प्रतिभा गौतम ने बताया कि हंगामे के दौरान एक ट्रक चालक ने दुस्साहस दिखाते हुए एआरटीओ की सरकारी गाड़ी की चाबी तक निकाल ली। चाबी निकालने की इस हरकत ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया, क्योंकि यह सीधे तौर पर एक लोक सेवक को उसके कर्तव्य पालन से रोकने और डराने का प्रयास था। इस घटना के बाद वहां मौजूद अन्य लोग भी उत्तेजित हो गए और अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई, जिससे मौके पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
परिवहन विभाग की ओर से इस पूरे मामले को लेकर कड़ी नाराजगी जताई गई है। अधिकारियों का तर्क है कि ओवरलोडिंग और अवैध परिवहन को रोकने के लिए की जाने वाली कार्रवाई के दौरान अक्सर चालकों द्वारा इस तरह के हथकंडे अपनाए जाते हैं ताकि वे कानूनी प्रक्रिया से बच सकें। जीपीएस लॉक होना और फिर पीछे के वाहनों का फंसना एक तकनीकी समस्या हो सकती थी, जिसे शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जा सकता था, लेकिन जिस तरह से हाथापाई और सरकारी वाहन की चाबी निकालने की घटना हुई, उसे प्रशासनिक दृष्टिकोण से अक्षम्य माना जा रहा है। इस घटना ने एक बार फिर फील्ड में काम करने वाले प्रवर्तन अधिकारियों की सुरक्षा और उनके सामने आने वाली चुनौतियों को सबके सामने लाकर रख दिया है। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी सरकारी अधिकारी को उसकी ड्यूटी के दौरान शारीरिक रूप से रोकना या सरकारी वाहन को नुकसान पहुँचाना संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है, जिसमें कारावास और भारी जुर्माना दोनों शामिल हो सकते हैं।
दही थाना क्षेत्र में हुई इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस को भी मामले की सूचना दी गई। पुलिस प्रशासन अब वायरल वीडियो के आधार पर उन व्यक्तियों की पहचान करने की कोशिश कर रहा है जिन्होंने एआरटीओ और उनकी टीम के साथ बदसलूकी की थी। वीडियो साक्ष्य के रूप में बहुत महत्वपूर्ण साबित हो रहा है, क्योंकि इसमें हंगामा करने वाले चेहरों को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। पुलिस का कहना है कि कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मौके पर मौजूद गवाहों और विभागीय कर्मचारियों के बयान भी इस जांच का हिस्सा बनाए जा रहे हैं।
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से प्रवर्तन टीम का मनोबल गिरता है, लेकिन विभाग अवैध गतिविधियों के खिलाफ अपना अभियान जारी रखेगा। एआरटीओ प्रतिभा गौतम ने अपने आधिकारिक बयान में यह भी संकेत दिया है कि चालकों द्वारा जानबूझकर रास्ता रोकने और हंगामा करने का उद्देश्य जांच की प्रक्रिया को बाधित करना था ताकि ट्रकों में लदे माल या अन्य कमियों को छिपाया जा सके। विभाग अब उन ट्रकों के मालिकों के खिलाफ भी नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है जिनके चालकों ने इस अभद्रता में सक्रिय भूमिका निभाई थी। परिवहन विभाग ऐसे वाहनों के परमिट निरस्त करने पर भी विचार कर सकता है जो बार-बार विवादों या अवैध कार्यों में लिप्त पाए जाते हैं।
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