Prithvi 2026: भारत का पहला पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव लखनऊ में, राज्यपाल ने किया ब्रोशर लॉन्च
लखनऊ में भारत का पहला पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव 'पृथ्वी 2026' आयोजित होने जा रहा है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इसके आधिकारिक ब्रोशर का विमोचन किया।
भारत के पहले पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव पृथ्वी 2026 के ब्रोशर का विमोचन, लखनऊ में जुटेगा विज्ञान और सिनेमा का संगम
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने लखनऊ के जन भवन में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान 'पृथ्वी 2026 – भारत का पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव' की आधिकारिक घोषणा की और इसके मुख्य ब्रोशर को जारी किया। इस खास मौके पर बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर महेश जी. ठक्कर, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर बिनीता फर्त्याल और कार्यक्रम के समन्वयक व वैज्ञानिक डॉक्टर निमिष कपूर भी मौजूद रहे।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से जुड़े बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान द्वारा इस अनोखे मेले का आयोजन संस्थान के अपने परिसर में किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की गई यह पहल देश और पूरे एशिया महाद्वीप में अपनी तरह का पहला पुराविज्ञान फिल्म महोत्सव है। इसका मुख्य उद्देश्य विज्ञान, सिनेमा और आम लोगों को एक साथ लाना है ताकि धरती के इतिहास, मौसम में बदलाव, पर्यावरण की रक्षा और जैव विविधता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को आकर्षक वीडियो व फिल्मों के जरिए आम जनता तक आसानी से पहुँचाया जा सके।
वीडियो माध्यम से विज्ञान को लोगों तक पहुँचाने की इस मुहिम का मुख्य ध्येय धरती के सफर को परदे पर जीवंत करना और एक सुरक्षित भविष्य के लिए लोगों को प्रेरित करना है। यह पूरा कार्यक्रम संस्थान की जनसाझेदारी योजना के तहत हो रहा है, जिससे शोधकर्ताओं, फिल्म निर्माताओं, शिक्षकों और युवाओं को एक बड़ा मंच मिलेगा। इससे समाज में वैज्ञानिक सोच और पर्यावरण के प्रति समझ को बढ़ावा मिलेगा।
इस आयोजन का बड़ा लक्ष्य विज्ञान के गूढ़ नियमों और सामान्य जनता के बीच की दूरी को मिटाना है। जटिल वैज्ञानिक जानकारियों को आसान और असरदार कहानियों के रूप में पेश करके यह प्रयास भारतीय संविधान में बताए गए वैज्ञानिक नजरिए और उत्सुकता की भावना को बल देता है, जो आगे चलकर देश के विकास में मददगार साबित होगा।
इस उत्सव में हिस्सा लेने के लिए देश भर के वैज्ञानिकों, स्वतंत्र फिल्म निर्देशकों और कॉलेज के छात्र-छात्राओं को न्योता दिया गया था। प्रतियोगिता के लिए फिल्में सात अलग-अलग श्रेणियों में रखी गई हैं, जिनमें डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म, एनीमेशन, विज्ञान आधारित कहानियां, पर्यावरण बदलाव और भू-पर्यटन से जुड़े विषय शामिल हैं। ये सभी प्रस्तुतियां मुख्य रूप से धरती, पौधों, मौसम और भूविज्ञान पर केंद्रित हैं।
फिल्में दिखाने के अलावा यहाँ एक राष्ट्रीय परिचर्चा भी होगी, जिसमें देश के जाने-माने वैज्ञानिक, फिल्मकार, पत्रकार और नीति निर्माता शामिल होंगे। तीन दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में विशेषज्ञों के व्याख्यान, समूह चर्चाएं और आम लोगों के साथ बातचीत के सत्र होंगे।
इस बड़े आयोजन में सैकड़ों की संख्या में विज्ञान प्रेमियों और जनसंचार, पत्रकारिता, पर्यावरण व भूविज्ञान के छात्र-छात्राओं के शामिल होने की उम्मीद है। उत्सव में चुनी गई बेहतरीन फिल्मों को आगे चलकर स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ाई की सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि पैदा की जा सके। इस ऐतिहासिक शुरुआत में देश के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का पूरा सहयोग मिल रहा है।
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