Ladki Bahin Yojana Update: लाडकी बहिन योजना से कटे 92 लाख लाभार्थियों के नाम, महाराष्ट्र सरकार ने बताया बड़ा कारण

Ladki Bahin Yojana Updates: महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़े डिजिटल सत्यापन अभियान के बाद लाडकी बहिन योजना की सूची से 92 लाख से अधिक अपात्र नाम हटा दिए हैं।

Jul 13, 2026 - 12:25
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Ladki Bahin Yojana Update: लाडकी बहिन योजना से कटे 92 लाख लाभार्थियों के नाम, महाराष्ट्र सरकार ने बताया बड़ा कारण
Maharashtra Majhi Ladki Bahin Yojana 2026
  • Maharashtra Ladki Bahin Yojana 2026: 92 लाख से अधिक महिलाएं लाडकी बहिन योजना की सूची से बाहर, जानिए क्या है विधिक वजह
  • महाराष्ट्र सरकार की बड़ी कार्रवाई: लाडकी बहिन योजना से हटाए गए 92 लाख से अधिक नाम, अपात्रता की सूची में पुरुष भी शामिल
  • लाडकी बहिन योजना में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: राज्यव्यापी डिजिटल ऑडिट के बाद 92 लाख लाभार्थी सूची से बाहर, अपात्रों पर लगाम

पश्चिम भारत के प्रमुख राज्य महाराष्ट्र से सामाजिक कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। महाराष्ट्र सरकार ने अपनी अत्यंत महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' के तहत पंजीकृत लाभार्थियों के डेटाबेस का बड़े पैमाने पर तकनीकी और डिजिटल सत्यापन (Verification) पूरा कर लिया है। सोमवार, 13 जुलाई 2026 को सामने आई आधिकारिक विधिक रिपोर्टों के अनुसार, इस राज्यव्यापी गहन डिजिटल ऑडिट के बाद कुल पंजीकृत लाभार्थियों में से लगभग 92 लाख से अधिक अपात्र महिलाओं और संदेहास्पद आवेदनों के नाम मुख्य सूची से हटा दिए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा की गई इस त्वरित कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य योजना में वित्तीय पारदर्शिता लाना और विधिक रूप से अपात्र पाए गए लोगों को बाहर कर वास्तविक हकदार परिवारों तक सरकारी सहायता पहुंचाना है। इस बड़े शुद्धिकरण अभियान के बाद अब केवल वैध और नियमों का पूर्ण पालन करने वाले लाभार्थियों को ही प्रति माह मिलने वाली वित्तीय राशि का हस्तांतरण सुचारू रूप से जारी रखा जाएगा।

महाराष्ट्र सरकार द्वारा समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही इस प्रमुख योजना में समय-समय पर डेटा शुद्धिकरण की विधिक प्रक्रियाएं अपनाई जाती रही हैं। योजना के स्थापित नियमों के तहत 21 से 65 वर्ष की आयु वर्ग की पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। हालांकि, योजना के डेटाबेस का आकार बहुत बड़ा होने के कारण इसमें कई तरह की तकनीकी विसंगतियां और अपात्र आवेदन भी शामिल हो गए थे। इसी पृष्ठभूमि में, राज्य सरकार के वित्त और आईटी विभाग ने विभिन्न डेटाबेस के साथ एक व्यापक क्रॉस-वेरिफिकेशन (सामूहिक मिलान) अभियान चलाया। इस डिजिटल फिल्टर के लागू होते ही करीब 38 प्रतिशत प्रविष्टियां नियमों के प्रतिकूल पाई गईं, जिसके कारण प्रशासन को एक ही झटके में इन 92 लाख से अधिक नामों को एक्टिव बेनेफिशियरी लिस्ट से विलोपित करना पड़ा।

इस ऐतिहासिक प्रशासनिक कार्रवाई के पीछे कई महत्वपूर्ण तकनीकी और कानूनी कारण शामिल हैं, जिनकी विस्तृत समीक्षा विभागीय स्तर पर की गई है। सबसे बड़ा कारण इलेक्ट्रॉनिक नो-योर-कस्टमर (e-KYC) प्रक्रिया का समय पर पूरा न होना पाया गया है।

इस वृहद सत्यापन अभियान के दौरान सामने आए मुख्य कारण और विधिक तथ्य इस प्रकार हैं: जांच में यह तथ्य स्पष्ट हुआ है कि हटाए गए कुल नामों में से लगभग 62 लाख लाभार्थी ऐसे थे जिन्होंने बार-बार दी गई आधिकारिक मोहलत के बावजूद अपनी अनिवार्य ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूर्ण नहीं किया था। इसके चलते उनका बैंक खाता आधार प्रमाणीकरण और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) की विधिक प्रणाली से पूरी तरह लिंक नहीं हो पाया। इसके अतिरिक्त, लगभग 16 लाख परिवार ऐसे पाए गए जिनकी वार्षिक आय सरकार द्वारा निर्धारित 2.5 लाख रुपये की ऊपरी सीमा से अधिक दर्ज थी और वे आयकर (Income Tax) के दायरे में आते थे।

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली विसंगति यह सामने आई कि लगभग 29,000 ऐसे आवेदन भी स्वीकृत हो गए थे जो पुरुषों के नाम पर थे, जिन्हें तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। साथ ही, 4.42 लाख ऐसे नाम भी हटाए गए जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा या पेंशन का लाभ ले रहा था, जो कि योजना की बुनियादी शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन है। लगभग 3.6 लाख महिलाएं ऐसी थीं जो पहले से ही संजय गांधी निराधार योजना जैसी अन्य राज्य स्तरीय पेंशन योजनाओं का दोहरा लाभ उठा रही थीं। नियमों के विपरीत एक ही परिवार में दो से अधिक लाभार्थियों को लाभ मिलने के 2.5 लाख मामलों को भी निरस्त किया गया है। भौगोलिक दृष्टि से इस पूरी छंटनी का सबसे बड़ा असर बीड (Beed) जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में देखा गया है, जहां अकेले एक जिले से ही बड़ी संख्या में अपात्र आवेदन डेटाबेस से बाहर किए गए हैं।

इस व्यापक प्रशासनिक कदम पर महाराष्ट्र सरकार के शीर्ष अधिकारियों और राजनीतिक नेतृत्व का रुख पूरी तरह से नीतिगत सुरक्षा और पारदर्शिता पर केंद्रित है। महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ सचिव ने प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया, "यह कोई राजनीतिक फैसला नहीं है, बल्कि सरकारी धन के विधिक और सही उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए किया गया एक तकनीकी ऑडिट है। हमारा उद्देश्य 'घोस्ट बेनेफिशियरी' (फर्जी प्रविष्टियों) को हटाना है। जिन पात्र महिलाओं का नाम ई-केवाईसी न होने के कारण रुका है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है; वे अपने नजदीकी नागरिक सुविधा केंद्र पर जाकर विधिक दस्तावेजों के साथ पुनः अपनी प्रक्रिया पूर्ण कर सकती हैं, जिसके बाद उनका नाम दोबारा जोड़ दिया जाएगा।"

दूसरी ओर, इस बड़ी कार्रवाई के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि केवल तकनीकी कारणों या इंटरनेट की अनुपलब्धता की वजह से ग्रामीण अंचलों की गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को इस आर्थिक सहायता से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

इस बड़े सत्यापन और शुद्धिकरण अभियान का प्रभाव राज्य के सार्वजनिक वित्त और योजना के भविष्य के ढांचे पर अत्यंत व्यापक रूप से परिलक्षित हो रहा है। इसके माध्यम से राज्य के खजाने पर पड़ने वाले अनुचित वित्तीय बोझ में करीब 17,000 करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक बजटीय बचत होने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो पहले अपात्र और फर्जी खातों में जा सकता था।

इस कार्रवाई से होने वाले व्यापक बदलावों का विवरण इस प्रकार है: इसके साथ ही, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा हाल ही में राज्य के महिला कल्याण बजट में अप्रत्याशित वृद्धि और ढांचागत निवेशों में आई संकुचन को लेकर जो वित्तीय चिंताएं व्यक्त की गई थीं, उन्हें तर्कसंगत बनाने में इस छंटनी से मदद मिलेगी। योजना का लाभ अब पूरी तरह से केवल 1.66 करोड़ सक्रिय और प्रामाणिक लाभार्थियों तक ही सीमित रहेगा, जिससे बैंकिंग और भुगतान प्रणालियों पर तकनीकी दबाव कम होगा। यह कदम भविष्य में कल्याणकारी योजनाओं के लिए एक पारदर्शी और त्रुटिहीन डिजिटल गवर्नेंस मॉडल स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

आगामी हफ्तों में, महाराष्ट्र सरकार ब्लॉक और जिला स्तर पर विशेष अपीलीय शिविर (Appellate Camps) आयोजित करने की योजना बना रही है। जिन वैध लाभार्थियों का नाम केवल ई-केवाईसी की तकनीकी विफलता के कारण कटा है, उन्हें इन शिविरों में अपने सक्रिय बैंक खाते और विधिक दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन कराने का अवसर दिया जाएगा। विभाग के तकनीकी दल डेटाबेस को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए नए सुरक्षा फीचर्स जोड़ रहे हैं ताकि भविष्य में पुरुषों या अपात्र लोगों द्वारा फर्जी पंजीकरण के प्रयासों को पूरी तरह रोका जा सके। सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत एजेंट के झांसे में न आएं और केवल आधिकारिक सरकारी पोर्टल के माध्यम से ही अपनी स्थिति की जांच करें।

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