Delhi SIR 2026: 2002 की वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो कैसे भरें एसआईआर फॉर्म? जानें आसान प्रक्रिया और लास्ट डेट
Delhi SIR Form Guide 2026: दिल्ली में मतदाता सूची अपडेट करने के लिए एसआईआर फॉर्म भरने की प्रक्रिया जारी है। अगर 2002 की सूची में नाम नहीं है, तो अपनाएं यह तरीका।
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- दिल्ली वालों के लिए जरूरी खबर: 2002 की वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो न हों परेशान, ऐसे भरें अपना SIR फॉर्म, यह है आखिरी तारीख
- दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी का निर्देश: विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 के तहत एसआईआर फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया जारी, जानें 2002 मतदाता सूची का विकल्प
भारत के निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मतदाताओं के डेटा को पूरी तरह शुद्ध और अपडेट करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 (SIR) का अभियान पूरे जोर-शोर से चलाया जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) दिल्ली द्वारा साझा की गई विधिक गाइडलाइंस के मुताबिक, राजधानी के सभी मौजूदा मतदाताओं के लिए अपना प्रीड्राफ्ट इन्यूमिरेशन (गणना) फॉर्म भरकर जमा करना अनिवार्य है। इस विधिक प्रक्रिया को पूरा करने की अंतिम सीमा 29 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जिसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर फॉर्म वितरित और संकलित कर रहे हैं। इस बीच दिल्ली के कई निवासियों के सामने यह बड़ी समस्या आ रही है कि उनका नाम साल 2002 की पुरानी मतदाता सूची में दर्ज नहीं है। ऐसे आवेदकों की सुविधा के लिए निर्वाचन कार्यालय ने एक विशेष विकल्प प्रदान किया है, जिसके माध्यम से वे बिना किसी बाधा के अपना फॉर्म विधिक रूप से पूरा कर सकते हैं।
दिल्ली में वर्तमान मतदाता सूची का मिलान साल 2002 में किए गए पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण के डेटा से किया जा रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से दोहरे नामों, फर्जी प्रविष्टियों और स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाकर एक पारदर्शी वोटर लिस्ट तैयार करना है। इस संबंध में बांटे जा रहे इन्यूमिरेशन फॉर्म में मुख्य रूप से दो हिस्से दिए गए हैं। फॉर्म का बायां हिस्सा उन नागरिकों के लिए है जिनका नाम या उनके परिवार का विवरण 2002 की मतदाता सूची में उपलब्ध है। परंतु, एक बड़ी आबादी ऐसी है जो या तो 2002 के बाद दिल्ली में आकर बसी है या उस समय उनकी आयु मतदान के योग्य नहीं थी, जिसके कारण उनका नाम उस सूची में नहीं है। ऐसे नागरिकों में फॉर्म भरने को लेकर असमंजस बना हुआ था, जिसे दूर करने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट तकनीकी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
निर्वाचन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक नियमों के अनुसार, यदि किसी नागरिक का नाम सीधे तौर पर 2002 की मतदाता सूची में नहीं मिलता है, तो उन्हें घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके लिए फॉर्म के दाहिने हिस्से में एक विशेष प्रावधान किया गया है, जिसे 'रिलेशनशिप लिंकेज' कहा जाता है।
इस प्रक्रिया के तहत आवेदन को विधिक रूप से पूर्ण करने के चरण इस प्रकार हैं: ऐसे मतदाता जिनके नाम 2002 की सूची में नहीं हैं, वे अपने माता-पिता, दादा-दादी या पति/पत्नी में से किसी भी ऐसे सदस्य का विवरण फॉर्म में दे सकते हैं जिनका नाम 2002 की दिल्ली मतदाता सूची में दर्ज था। फॉर्म के दाहिने हिस्से में उस संबंधी का नाम, उनका वोटर आईडी (EPIC) नंबर, विधानसभा क्षेत्र का नाम व नंबर, भाग संख्या (Part Number) और क्रम संख्या (Serial Number) दर्ज करनी होगी। इसके साथ ही आवेदक को उस संबंधी के साथ अपने जुड़ाव या रिश्ते का प्रमाण देना होगा।
उन नागरिकों के लिए जो 2002 के बाद किसी अन्य राज्य से आकर दिल्ली के स्थायी निवासी बने हैं, नियम यह कहता है कि वे अपने पैतृक राज्य की उस समय की मतदाता सूची का विवरण फॉर्म में दर्ज कर सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने आम जनता की मदद के लिए साल 2002 की पूरी मतदाता सूची की पीडीएफ (PDF) फाइलें आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड कर दी हैं, जहां नाम या वोटर आईडी नंबर डालकर ये विवरण आसानी से खोजे जा सकते हैं। फॉर्म पूरी तरह भरने के बाद उस पर हालिया पासपोर्ट आकार की फोटो लगानी होगी और अपने हस्ताक्षर या अंगूठे का निशान लगाकर उसे निर्धारित तिथि से पहले बीएलओ को सौंपना होगा। मतदाता चाहें तो राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल पर जाकर इस फॉर्म को ऑनलाइन माध्यम से भी सीधे जमा कर सकते हैं।
इस प्रशासनिक और तकनीकी व्यवस्था पर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों का रुख पूरी तरह से स्पष्ट है। अधिकारियों ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस बार की पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल तकनीक पर आधारित है। 2002 के डेटा लिंकिंग को लेकर जनता में जो भ्रम था, उसे दूर करने के लिए बीएलओ को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि दिल्ली का कोई भी वैध नागरिक इस सूची से बाहर न छूटे।
दूसरी ओर, विभिन्न रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स (RWAs) और नागरिक अधिकार मंचों ने इस लिंकेज प्रक्रिया का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही मांग की है कि डिजिटल रूप से कमजोर या बुजुर्ग नागरिकों के लिए बीएलओ को स्वयं आगे बढ़कर पुरानी सूचियों से नंबर खोजने में मदद करनी चाहिए, ताकि लोग समय सीमा के भीतर अपने फॉर्म जमा कर सकें। इस बड़े पुनरीक्षण अभियान और फॉर्म भरने की विधिक अनिवार्यता का प्रभाव दिल्ली की संपूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। दिल्ली के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 13,000 से अधिक बूथ लेवल ऑफिसर इस समय मैदानी स्तर पर मुस्तैद हैं।
इस प्रक्रिया से होने वाले व्यापक बदलावों का विवरण इस प्रकार है: इसके माध्यम से दिल्ली के करीब 1.45 करोड़ से अधिक पंजीकृत मतदाताओं के डेटा का शुद्धिकरण हो रहा है। 2002 की सूची से लिंकेज स्थापित होने के कारण भविष्य में होने वाले चुनावों में फर्जी मतदान और बोगस वोटिंग की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा, जिन युवाओं की आयु 1 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष या उससे अधिक हो रही है, उन्हें इस अभियान के माध्यम से नए मतदाता के रूप में जुड़ने का एक बेहतरीन अवसर मिल रहा है। इस पूरी कवायद से दिल्ली का एक ऐसा प्रामाणिक डिजिटल इलेक्टोरल रोल तैयार होगा जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनेगा।
निर्वाचन विभाग की समय सारिणी के अनुसार, 29 जुलाई 2026 तक इन्यूमिरेशन फॉर्म संकलित करने और उनके डिजिटलीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। इसके तुरंत बाद, 5 अगस्त 2026 को एकीकृत मतदाता सूची के प्रारूप (Draft Electoral Roll) का प्रकाशन किया जाएगा। यदि इसके बाद भी किसी नागरिक का नाम छूट जाता है या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति होती है, तो 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 के बीच दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकेंगी। सभी दावों का कानूनी निपटारा करने के पश्चात 7 अक्टूबर 2026 को दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची (Final Electoral Roll) का आधिकारिक प्रकाशन कर दिया जाएगा। प्रशासन ने सभी दिल्ली वासियों से अनुरोध किया है कि वे अंतिम दिनों की भीड़ से बचने के लिए समय रहते अपने फॉर्म ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से अवश्य जमा कर दें।
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