भ्रामक विज्ञापन मामले में सलमान खान की बढ़ी मुश्किलें, जयपुर उपभोक्ता आयोग ने जारी किया सख्त आदेश।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में उपभोक्ता अदालत ने फिल्म अभिनेता सलमान खान और राजश्री पान मसाला कंपनी के खिलाफ चल रहे मामले में
- जमानती वारंट की तामील के लिए गठित होगी विशेष पुलिस टास्क फोर्स, अभिनेता को 6 अप्रैल को पेश होने का निर्देश
- 'कानून से ऊपर कोई नहीं': राजश्री पान मसाला विवाद में कोर्ट ने पुलिस प्रशासन को लगाई कड़ी फटकार
राजस्थान की राजधानी जयपुर में उपभोक्ता अदालत ने फिल्म अभिनेता सलमान खान और राजश्री पान मसाला कंपनी के खिलाफ चल रहे मामले में अब तक का सबसे कड़ा कदम उठाया है। यह विवाद 'केसर युक्त इलायची' और 'केसर युक्त पान मसाला' के विज्ञापनों से शुरू हुआ था, जिसे परिवादी योगेंद्र सिंह ने भ्रामक और जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हुए चुनौती दी थी। आयोग ने पूर्व में 6 जनवरी 2026 को इन विज्ञापनों के प्रसारण और प्रचार पर अंतरिम रोक लगा दी थी। हालांकि, परिवादी का आरोप है कि इस रोक के बावजूद विज्ञापनों का प्रदर्शन जारी रहा, जिसे अदालत की अवमानना माना गया। इसी अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग के अध्यक्ष ग्यारसी लाल मीणा और सदस्यों की पीठ ने यह नया फरमान जारी किया है।
अदालत की नाराजगी का मुख्य कारण सलमान खान पर पहले जारी किए गए दो जमानती वारंटों की तामील न होना है। आयोग ने नोट किया कि 15 जनवरी, 9 फरवरी और 16 मार्च को पहले भी वारंट जारी किए गए थे, लेकिन मुंबई पुलिस और संबंधित अधिकारियों की ओर से इनकी तामील को लेकर अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखाई गई। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि सेलिब्रिटी होने का मतलब यह कतई नहीं है कि कोई व्यक्ति कानून से ऊपर हो जाए। बार-बार अदालत के आदेशों की अनदेखी करना न केवल न्यायपालिका की गरिमा को कम करता है, बल्कि उपभोक्ताओं के उस भरोसे को भी तोड़ता है जो वे इन नियामक संस्थाओं पर रखते हैं।
इसी गंभीरता को देखते हुए जयपुर द्वितीय जिला उपभोक्ता आयोग ने राजस्थान पुलिस के मुखिया को निर्देशित किया है कि वे एक विशेष टीम का चयन करें। इस टास्क फोर्स की जिम्मेदारी होगी कि वह मुंबई जाए और सुनिश्चित करे कि सलमान खान को वारंट प्राप्त हो। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि 6 अप्रैल की अगली सुनवाई तक वारंट की तामील नहीं होती है या अभिनेता अदालत के समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करने पर विचार किया जा सकता है। यह आदेश उन सभी ब्रांड एंबेसडर और कंपनियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो भ्रामक दावों के जरिए उपभोक्ताओं को प्रभावित करते हैं।
क्या है भ्रामक विज्ञापन का विवाद?
उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत किसी भी उत्पाद का विज्ञापन सत्यता पर आधारित होना चाहिए। इस मामले में आरोप है कि पान मसाला जैसे हानिकारक उत्पाद को 'केसर' और 'इलायची' के नाम पर स्वास्थ्यवर्धक या प्रीमियम बताकर पेश किया जा रहा है। परिवादी का तर्क है कि इससे युवा पीढ़ी गुमराह हो रही है और वे अनजाने में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की ओर धकेले जा रहे हैं। अदालत इस बात की जांच कर रही है कि क्या विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य वास्तव में तंबाकू उत्पादों की 'सरोगेट एडवरटाइजिंग' करना है।
सलमान खान की कानूनी टीम ने इससे पहले राज्य उपभोक्ता आयोग में जिला अदालत के फैसलों को चुनौती दी थी। उनकी दलील थी कि इस तरह के मामलों में कार्रवाई करने का अधिकार केवल केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) को है और परिवादी इस मामले में सीधा 'उपभोक्ता' नहीं है। हालांकि, राज्य आयोग ने 16 मार्च को इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था। राज्य आयोग का मानना था कि शक्तियों का केंद्रीकरण करने से स्थानीय स्तर पर उपभोक्ताओं को न्याय मिलने में देरी होगी। इस झटके के बाद सलमान खान के पास जिला आयोग के समक्ष पेश होने के अलावा विकल्प सीमित रह गए हैं, लेकिन उनकी ओर से लगातार अनुपस्थिति ने मामले को और पेचीदा बना दिया है।
इस मामले में केवल सलमान खान ही नहीं, बल्कि राजश्री पान मसाला कंपनी के निदेशक भी कानूनी रडार पर हैं। आयोग ने उनके खिलाफ भी समान रूप से सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पुलिस प्रशासन को फटकार लगाते हुए कहा कि वारंट की तामील में ढिलाई बरतना न्याय प्रक्रिया का मजाक उड़ाना है। आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षक को इस टास्क फोर्स के साथ समन्वय करने और मुंबई पुलिस से सहयोग प्राप्त करने की प्रक्रिया को तेज करने को कहा है। अब पूरी नजरें 6 अप्रैल की तारीख पर टिकी हैं कि क्या बॉलीवुड का यह बड़ा सितारा कानून के बुलावे पर जयपुर की अदालत में हाजिर होता है या नहीं।
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