दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह पर ED का बड़ा एक्शन, दिल्ली और मुंबई के कॉरपोरेट दफ्तरों पर छापेमारी।

देश के कारपोरेट जगत और वित्तीय गलियारों में उस समय अचानक भारी हलचल पैदा हो गई, जब यह जानकारी सामने आई

Jun 2, 2026 - 13:01
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दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह पर ED का बड़ा एक्शन, दिल्ली और मुंबई के कॉरपोरेट दफ्तरों पर छापेमारी।
दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल के वेदांता समूह पर ED का बड़ा एक्शन, दिल्ली और मुंबई के कॉरपोरेट दफ्तरों पर छापेमारी।
  • विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून के उल्लंघन के आरोपों में केंद्रीय एजेंसी की सघन तलाशी, पैरेंट कंपनी को भेजी गई भारी-भरकम रकम की हो रही जांच
  • इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और वित्तीय दस्तावेजों को खंगालने में जुटी टीमें, वेदांता समूह ने जारी किया बयान, पूर्ण सहयोग देने की कही बात

देश के कारपोरेट जगत और वित्तीय गलियारों में उस समय अचानक भारी हलचल पैदा हो गई, जब यह जानकारी सामने आई कि देश के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और दिग्गज माइनिंग तथा प्राकृतिक संसाधन समूह के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है। अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता समूह के विभिन्न मुख्य और रणनीतिक प्रशासनिक ठिकानों पर ED (ईडी) द्वारा व्यापक स्तर पर तलाशी अभियान चलाया गया है। यह प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित समूह के दो प्रमुख कॉरपोरेट दफ्तरों पर एक साथ शुरू की गई। इस औचक कार्रवाई के बाद से ही देश के व्यापारिक संगठनों और शेयर बाजार के निवेशकों के बीच इस पूरे मामले के तकनीकी पहलुओं और इसके दूरगामी आर्थिक प्रभावों को लेकर गंभीर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

केंद्रीय जांच एजेंसी के मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त प्राथमिक विवरण के अनुसार, यह पूरा मामला पूरी तरह से नागरिक और दीवानी प्रावधानों के तहत संचालित होने वाले विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (FEMA) के कथित उल्लंघनों से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसी को कुछ समय पहले वित्तीय खुफिया इकाइयों से कुछ ऐसे संदिग्ध इनपुट प्राप्त हुए थे, जो यह दर्शाते थे कि समूह के भीतर से विदेशी मुद्राओं के लेन-देन और सीमा पार होने वाले पूंजी प्रवाह में कुछ गंभीर विसंगतियां मौजूद हो सकती हैं। इसी प्रारंभिक सूचना को आधार बनाकर केंद्रीय एजेंसी ने सोमवार से ही अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए दोनों महानगरों के परिसरों में अपनी विशेष टीमों को तैनात कर दिया था, जहां दस्तावेजों की सघन जांच का काम बेहद गोपनीय और व्यवस्थित तरीके से चलाया गया।

इस पूरे विवाद और जांच के सबसे केंद्रीय बिंदु की बात करें तो यह सीधे तौर पर वेदांता लिमिटेड और विदेशों में स्थित उसकी मुख्य पैरेंट कंपनी, वेदांता रिसोर्सेज के बीच होने वाले अंतर-कंपनी वित्तीय लेन-देन से जुड़ा हुआ है। जांच के दायरे में मुख्य रूप से वह भारी-भरकम धनराशि शामिल है जो भारतीय इकाई द्वारा अपनी विदेशी मूल कंपनी को कथित तौर पर 'रॉयल्टी भुगतान' और 'ब्रांड उपयोग शुल्क' (Brand Fee Payments) के नाम पर हर साल हस्तांतरित की जाती रही है। केंद्रीय वित्तीय जांच एजेंसी इस बात की बहुत बारीकी से कानूनी और तकनीकी समीक्षा कर रही है कि क्या इन अंतरराष्ट्रीय भुगतानों के लिए देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित किए गए नियमों और फेमा कानून के तहत तय की गई कानूनी सीमाओं का पूरी तरह से पालन किया गया था या नहीं। तलाशी अभियान के दौरान ED की टीमों ने दोनों शहरों के कॉरपोरेट कार्यालयों से बड़ी संख्या में महत्वपूर्ण वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों के विवरण, अंतरराष्ट्रीय समझौतों की प्रतियां और बोर्ड की बैठकों के मिनट्स को अपने कब्जे में लिया है। इसके साथ ही, डिजिटल डेटा के मिलान के लिए कार्यालयों में मौजूद कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क, मुख्य सर्वर के बैकअप और कुछ वरिष्ठ वित्तीय अधिकारियों के आधिकारिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डेटा को भी फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए सुरक्षित किया गया है।

इस बड़े और सनसनीखेज प्रशासनिक घटनाक्रम के सामने आने के तुरंत बाद, वेदांता समूह के आधिकारिक प्रवक्ता की तरफ से भी देश के विनियामक ढांचे और निवेशकों के संशय को दूर करने के लिए एक औपचारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया है। समूह के प्रवक्ता ने अपने आधिकारिक बयान में यह साफ किया है कि एक जिम्मेदार और वैश्विक स्तर पर काम करने वाली कॉरपोरेट इकाई होने के नाते वे देश के हर कानून का पूरी तरह सम्मान करते हैं। कंपनी ने यह प्रतिबद्धता जताई है कि वे केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिकारियों के साथ इस पूरी प्रक्रिया में हर संभव और सकारात्मक सहयोग स्थापित कर रहे हैं और उनके द्वारा मांगी जा रही तमाम वित्तीय और तकनीकी जानकारियां समय पर उपलब्ध कराई जा रही हैं ताकि किसी भी प्रकार के संशय को पूरी तरह दूर किया जा सके।

इस हाई-प्रोफाइल छापेमारी की खबर जैसे ही देश के प्रमुख शेयर बाजारों तक पहुंची, वैसे ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध वेदांता लिमिटेड के शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव और बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। शेयर बाजार में पिछले कुछ समय से बेहतर प्रदर्शन कर रहे इस स्टॉक की कीमत में खबर के सार्वजनिक होते ही करीब चार प्रतिशत से अधिक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों को अल्पकालिक रूप से करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। बाजार के वित्तीय विश्लेषक इस बात को लेकर भी बेहद सतर्क हैं कि यह कार्रवाई ऐसे नाजुक मोड़ पर हुई है जब हाल ही में घरेलू रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) ने कंपनी की दीर्घकालिक क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड कर एक दशक के सबसे उच्चतम स्तर 'AA+' पर पहुंचाया था।

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