Lucknow : वर्ष 2030 तक उत्तर प्रदेश में 2 गीगावाट अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता बनाने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश
नई डेटा सेंटर नीति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन, पूंजी और लोन से जुड़ी मदद के साथ-साथ स्टाम्प ड्यूटी, बिजली बिल और ट्रांसमिशन शुल्क में दी जाने वाली छूट को और ज्यादा असरदार बनाया जाए। उन्होंने एआई आधारित उच्च क्षमता वाले कंप्यूटर ढांचे को बढ़ावा देने के
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साल 2030 तक उत्तर प्रदेश में 2 गीगावाट से ज्यादा की अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता तैयार करने का लक्ष्य तय किया है। उन्होंने कहा कि डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल ढांचा आने वाले समय की अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में सबसे आगे रहने के लिए अभी से मजबूत तैयारी करनी होगी। उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निवेशकों की उम्मीदों के मुताबिक ज्यादा बेहतर और समय के अनुकूल नई नीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नई नीति में एआई आधारित डेटा सेंटर, पर्यावरण के अनुकूल ग्रीन डेटा सेंटर, विश्वस्तरीय डिजिटल ढांचा, जल्द मंजूरी मिलने की व्यवस्था, लगातार बिजली आपूर्ति और बेहतर कनेक्टिविटी जैसी बातों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि उत्तर प्रदेश देश में डेटा सेंटर निवेश का सबसे मनपसंद केंद्र बन सके।
आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव ने मुख्यमंत्री को बताया कि साल 2026 तक देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 8 से 9 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पुरानी नीति के तहत 900 मेगावाट क्षमता बनाने और 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश लाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके मुकाबले अब तक 21,342.90 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। इस समय राज्य में छह डेटा सेंटर पार्क और दो डेटा सेंटर इकाइयां काम कर रही हैं, जबकि 644 मेगावाट क्षमता पर काम आगे बढ़ रहा है।
नई डेटा सेंटर नीति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जमीन, पूंजी और लोन से जुड़ी मदद के साथ-साथ स्टाम्प ड्यूटी, बिजली बिल और ट्रांसमिशन शुल्क में दी जाने वाली छूट को और ज्यादा असरदार बनाया जाए। उन्होंने एआई आधारित उच्च क्षमता वाले कंप्यूटर ढांचे को बढ़ावा देने के लिए खास रियायतें देने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि तय मानकों के मुताबिक आधुनिक एआई कंप्यूटर संसाधन लगाने वाले डेटा सेंटर पार्कों को अतिरिक्त सुविधाएं मिलनी चाहिए, जिससे राज्य में एआई आधारित डिजिटल ढांचे के विकास को गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण को ध्यान में रखकर काम करने वाली और ग्रीन डेटा सेंटर का प्रमाणपत्र हासिल करने वाली इकाइयों को अलग से वित्तीय मदद देने की बात कही।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि हीरानंदानी समूह, एनटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स, अडानी समूह, एसटी टेलीमीडिया, एसकेवीआर सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस, वेब वर्क्स और सिफी जैसी बड़ी कंपनियों के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। इसके साथ ही कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने राज्य में कुल 5,410 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर बनाने की इच्छा जताई है, जिससे करीब 4.90 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने का अनुमान है। इनमें एएम ग्रीन, ट्राइफैक्टा कॉनेक्स, एस्सार, ग्रू एनर्जी, गोल्डन स्टेट कैपिटल, मैपलेट्री, सीटीआरएल-एस और एनएक्स्ट्रा जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स के लिए नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ और सीतापुर सहित कई शहरों में मौके तलाशे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डेटा सेंटर के विकास को सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित रखने के बजाय राज्य के दूसरे शहरों में भी इसके क्लस्टर बनाए जाएं, ताकि निवेश और रोजगार का फायदा राज्य के ज्यादा से ज्यादा हिस्सों को मिल सके।
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