रेलिंग तोड़कर हवा में लटका ट्रैक्टरों से लदा कैंटर, बाल-बाल बची चालक की जान, फ्लाईओवर के किनारे घंटों झूलता रहा भारी भरकम वाहन।
मथुरा जनपद के हाईवे थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक प्रमुख फ्लाईओवर पर आज सुबह एक विचित्र और डरावनी दुर्घटना घटी। एक विशालकाय कैंटर,
मथुरा जनपद के हाईवे थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक प्रमुख फ्लाईओवर पर आज सुबह एक विचित्र और डरावनी दुर्घटना घटी। एक विशालकाय कैंटर, जिसमें कई नए ट्रैक्टर लदे हुए थे, अनियंत्रित होकर फ्लाईओवर की सुरक्षा दीवार (रेलिंग) को तोड़ते हुए बाहर की ओर निकल गया। स्थिति इतनी भयानक थी कि कैंटर का अगला हिस्सा और केबिन पूरी तरह से फ्लाईओवर के नीचे शून्य में लटक गए, जबकि उसका पिछला हिस्सा और भारी भरकम ट्रेलर वाला भाग किसी तरह पुल के ऊपरी हिस्से पर अटका रहा। नीचे से गुजरने वाले वाहनों और ऊपर मौजूद लोगों के लिए यह दृश्य किसी फिल्मी स्टंट जैसा था, लेकिन असलियत में यह एक बड़ी तबाही का संकेत दे रहा था। यदि कैंटर नीचे गिर जाता, तो फ्लाईओवर के नीचे से गुजरने वाले दर्जनों लोग इसकी चपेट में आ सकते थे और एक भीषण नरसंहार की स्थिति उत्पन्न हो सकती थी।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह कैंटर फैक्ट्री से नए ट्रैक्टरों की एक बड़ी खेप लेकर उनकी डिलीवरी के लिए गंतव्य की ओर जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, संभवतः तेज रफ्तार या अचानक किसी अन्य वाहन के सामने आ जाने के कारण चालक ने नियंत्रण खो दिया। फ्लाईओवर के मोड़ पर अचानक ब्रेक लगाने या स्टीयरिंग के अचानक मुड़ने की वजह से भारी वजन के कारण कैंटर की गति का संतुलन बिगड़ गया। देखते ही देखते वाहन ने सड़क के किनारे लगी लोहे और कंक्रीट की मजबूत रेलिंग को कागज की तरह फाड़ दिया। गनीमत यह रही कि कैंटर का पिछला हिस्सा पुल के ढांचे में इस कदर फंस गया कि वह नीचे नहीं गिरा, जिससे चालक की जान तो बची ही, साथ ही नीचे चल रहे यातायात को भी कोई शारीरिक क्षति नहीं पहुँची।
दुर्घटना के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों ने देखा कि कैंटर का केबिन हवा में झूल रहा था और चालक अंदर फंसा हुआ था। चालक की हालत अत्यंत नाजुक और दहशत भरी थी, क्योंकि उसकी जरा सी भी हलचल पूरे वाहन को नीचे गिरा सकती थी। राहत और बचाव दल ने बहुत ही सूझबूझ के साथ क्रेन की मदद ली और सबसे पहले वाहन को रस्सियों और जंजीरों के सहारे बांधकर स्थिर किया गया। इसके बाद चालक को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान फ्लाईओवर के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और सुरक्षा की दृष्टि से यातायात को पूरी तरह से डायवर्ट कर दिया गया। ट्रैक्टरों से लदे इस कैंटर को वापस सड़क पर खींचना प्रशासन के लिए एक बड़ी तकनीकी चुनौती साबित हुआ।
इस घटना ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने वाले भारी वाहनों की सुरक्षा और उनकी क्षमता को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। ट्रैक्टरों की लोडिंग जिस तरह से की गई थी, वह भी जांच का विषय है क्योंकि अत्यधिक वजन और असंतुलित लोडिंग अक्सर इस तरह के हादसों का कारण बनती है। मथुरा पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वाहन के दस्तावेजों और उसकी लोडिंग क्षमता की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही, यह भी देखा जा रहा है कि क्या चालक थका हुआ था या नींद में था, क्योंकि तड़के होने वाले अधिकांश हादसे इसी कारण से होते हैं। कंपनी के अधिकारियों को भी सूचित कर दिया गया है ताकि वे अपने माल और वाहन की स्थिति का जायजा ले सकें।
हादसे की खबर फैलते ही आसपास के गांवों के लोग भी फ्लाईओवर के पास जमा हो गए, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी। हवा में लटके हुए कैंटर को देखने के लिए लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पुल के किनारे खड़े हो रहे थे। पुलिस प्रशासन ने क्रेन और भारी मशीनों की मदद से लगभग तीन से चार घंटे की कड़ी मेहनत के बाद कैंटर को सुरक्षित तरीके से खींचकर वापस सड़क पर लाया। इस दौरान एनएचएआई (NHAI) की टीम भी मौके पर मौजूद रही ताकि क्षतिग्रस्त रेलिंग की मरम्मत और सड़क की सफाई का काम तुरंत शुरू किया जा सके। सड़क पर फैले कांच और मलबे की वजह से भी अन्य दोपहिया वाहनों के फिसलने का डर बना हुआ था। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि नए ट्रैक्टरों की डिलीवरी के लिए ले जाए जा रहे इन वाहनों का बीमा और परमिट तो सही थे, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्पष्ट नजर आ रही थी। फ्लाईओवर की जिस रेलिंग को कैंटर ने तोड़ा, उसे भी अब नए सिरे से सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए फ्लाईओवर के मोड़ों पर विशेष 'रंबल स्ट्रिप्स' और गति सीमा के बड़े बोर्ड लगाए जाएंगे। इसके अलावा, भारी वाहनों को शहर के फ्लाईओवर के बजाय बाईपास से भेजने के सुझावों पर भी चर्चा की जा रही है ताकि भीड़भाड़ वाले इलाकों में इस तरह के जोखिमों को कम किया जा सके।
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