Narnaul News: नारनौल में झावा मूसा (कांटेदार चूहे) की ट्रेडिंग के नाम पर होटल मालिक से 1.15 लाख की ठगी, पुलिस जांच शुरू
हरियाणा के नारनौल में कांटेदार चूहे (झावा मूसा) के नाम पर होटल मालिक से 1.15 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की।
- Narnaul Crime News: कांटेदार चूहे के नाम पर होटल संचालक से 1.15 लाख रुपये की ठगी, जानें क्या है पूरा मामला
- Narnaul Fraud Case: झावा मूसा के सौदे में भारी मुनाफे का झांसा, होटल कारोबारी से लाखों की धोखाधड़ी
- कांटेदार चूहे के नाम पर होटल मालिक को लगाया लाखों का चूना, नारनौल में सामने आया अजीबोगरीब फ्रॉड
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल शहर में एक अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाला ठगी का मामला सामने आया है, जहां अज्ञात जालसाजों ने एक होटल संचालक को झावा मूसा यानी कांटेदार चूहे की कथित दुर्लभता और उसकी खरीद-फरोख्त में भारी मुनाफे का लालच देकर 1.15 लाख रुपये की चपत लगा दी। पीड़ित को झांसा दिया गया था कि कम कीमत पर इसे खरीदकर बाहर की पार्टी को लाखों रुपये में बेचा जा सकता है। सौदे के नाम पर रकम ऐंठने के बाद जालसाज फरार हो गए और अपने मोबाइल फोन बंद कर लिए। पीड़ित व्यवसायी की शिकायत के बाद नारनौल पुलिस ने मामले की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।
नारनौल क्षेत्र में वन्यजीव से जुड़े अंधविश्वास और काल्पनिक अंतरराष्ट्रीय बाजार का भ्रम फैलाकर ठगी करने का नया तरीका सामने आया है। एक स्थानीय होटल संचालक को शातिर ठगों ने कांटेदार चूहे (झावा मूसा) की खरीद-बिक्री में कई गुना मुनाफा कमाने का झांसा दिया। ठगों ने दावा किया कि इस विशेष जीव की बाजार में भारी मांग है और यदि इसे कम दामों में खरीदकर आगे बेचा जाए, तो कुछ ही घंटों में लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है। कारोबारी इस आकर्षक योजना के झांसे में आ गया और उसने आरोपियों को नकद राशि सौंप दी, जिसके बाद आरोपी मौका पाकर रफूचक्कर हो गए।
कांटेदार चूहा और ठगी का जाल: क्या है सच्चाई?
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अंधविश्वास और मिथक: समाज में दुर्लभ वन्यजीवों, कांटेदार चूहों या हेजहॉग को लेकर कई तरह के अंधविश्वास और भारी कीमत के भ्रामक दावे फैलाए जाते हैं।
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कानूनी पहलू: भारतीय वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत किसी भी वन्यजीव का व्यापार, खरीद-फरोख्त या तस्करी पूरी तरह से गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध है।
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ठगी का तरीका: जालसाज पहले एक काल्पनिक खरीदार और विक्रेता का नेटवर्क बनाकर पीड़ितों को कई गुना मुनाफे का लालच देते हैं और नकदी मिलते ही फरार हो जाते हैं।
पीड़ित होटल संचालक के अनुसार, कुछ दिन पहले अज्ञात व्यक्ति उसके होटल में पहुंचे और उन्होंने बातचीत के दौरान झावा मूसा के कथित कारोबार का जिक्र छेड़ा। आरोपियों ने बड़ी चतुराई से माहौल बनाया कि उनके पास ऐसा संपर्क है जहां से यह जीव 2 लाख रुपये में मिल रहा है, जबकि बाहर की एक बड़ी पार्टी इसे 8 लाख रुपये में खरीदने के लिए तैयार खड़ी है। आरोपियों ने पीड़ित को गणित समझाया कि इस एक ही सौदे में 6 लाख रुपये का सीधा मुनाफा होगा।
आरोपियों के झांसे में आकर पीड़ित ने सौदे में साझेदारी करने की सहमति दे दी। हालांकि, उस समय पीड़ित के पास पूरी 2 लाख रुपये की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। इस पर आरोपियों ने विश्वास में लेते हुए कहा कि वे बाकी की रकम अपनी जेब से लगा देंगे और पीड़ित केवल 1.15 लाख रुपये का प्रबंध कर दे। पीड़ित ने अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई में से 1.15 लाख रुपये नकद आरोपियों के हवाले कर दिए।
रकम हाथ में आते ही आरोपियों ने पीड़ित से कहा कि वे उक्त जीव को दूसरी पार्टी तक पहुंचाकर तुरंत मुनाफे का हिस्सा लेकर लौटते हैं। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी आरोपी वापस नहीं लौटे, तो पीड़ित ने उनके मोबाइल नंबरों पर संपर्क करने का प्रयास किया। दोनों नंबर स्विच ऑफ आने लगे, जिसके बाद पीड़ित को अहसास हुआ कि वह एक सोची-समझी जालसाजी का शिकार हो चुका है। इसके बाद पीड़ित ने थाने पहुंचकर पुलिस को पूरे मामले की लिखित तहरीर दी।
पीड़ित होटल संचालक ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों का जल्द से जल्द पता लगाकर उनकी डूबी हुई रकम बरामद कराई जाए और ऐसे धोखेबाजों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो ताकि अन्य लोग इस तरह के झांसे में आने से बच सकें।
वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर शिकायत दर्ज कर ली गई है। पुलिस की साइबर और तकनीकी टीम आरोपियों के मोबाइल नंबरों की लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स खंगाल रही है। इसके साथ ही होटल और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की मदद से संदिग्धों के हुलिए और उनके वाहनों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि आरोपियों को जल्द ही कानून के शिकंजे में लाया जाएगा।
इस अनोखी धोखाधड़ी की खबर फैलते ही नारनौल और आसपास के व्यापारिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। अक्सर देखा गया है कि साइबर ठगी के अलावा अब अपराधी पारंपरिक अंधविश्वासों और दुर्लभ जीवों की फर्जी ट्रेडिंग के नाम पर सीधे-सादे व्यापारियों को निशाना बना रहे हैं।
इस घटना ने वन्यजीवों की कथित अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े गिरोहों की सक्रियता को भी उजागर किया है। वन विभाग और पुलिस विभाग के लिए यह जरूरी हो गया है कि वे संयुक्त रूप से ऐसे भ्रामक प्रचार और अवैध दावों के खिलाफ आम जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाएं, जिससे लोग त्वरित मुनाफे के लालच में फंसकर अपनी पूंजी न गंवाएं।
पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच तेज कर दी है और अंतर-जिला स्तर पर संदिग्ध गिरोहों के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं, जो इस तरह के वन्यजीव ट्रेडिंग के नाम पर ठगी की वारदातों को अंजाम देते रहे हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के संदिग्ध वित्तीय प्रलोभन, अवैध वस्तुओं या जीवों की खरीद-फरोख्त के प्रस्तावों से पूरी तरह दूर रहें। यदि कोई व्यक्ति इस तरह के असामान्य मुनाफे का दावा करता है, तो उसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस थाने को दें।
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