Noida Cyber Fraud: नोएडा में महिला की FD तोड़कर साइबर ठगों ने निकाले 19 लाख रुपये, जानें पूरा मामला

नोएडा में एक महिला की एफडी तोड़कर साइबर अपराधियों ने 19 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। जानिए कैसे हुआ फर्जीवाड़ा और साइबर पुलिस की जांच में क्या सामने आया।

Aug 30, 2026 - 12:08
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Noida Cyber Fraud: नोएडा में महिला की FD तोड़कर साइबर ठगों ने निकाले 19 लाख रुपये, जानें पूरा मामला
Noida Cyber Fraud
  • Noida Crime News: एक लिंक पर क्लिक करते ही खाली हुआ बैंक खाता, नोएडा की महिला से 19 लाख की साइबर ठगी
  • नोएडा में साइबर ठगों का बड़ा खेल: महिला की FD तुड़वाकर साफ किए 19 लाख रुपये, पुलिस जांच शुरू
  • Noida Cyber Crime: नोएडा की महिला से 19 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी, साइबर सेल ने दर्ज किया केस

दिल्ली से सटे हाईटेक शहर नोएडा में साइबर जालसाजों ने एक बार फिर बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। अज्ञात साइबर ठगों ने एक महिला को अपने झांसे में लेकर न केवल उनके बचत खाते की रकम पर हाथ साफ किया, बल्कि बैंक में जमा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को भी समय से पहले तुड़वाकर लगभग 19 लाख रुपये की भारी रकम अपने खातों में ट्रांसफर कर ली। यह वारदात पीड़िता द्वारा एक संदिग्ध डिजिटल संपर्क के बाद अनजाने में बैंक से जुड़ी गोपनीय प्रक्रियाएं साझा करने या दुर्भावनापूर्ण लिंक पर क्लिक करने के बाद सामने आई। पीड़िता की तहरीर पर नोएडा की साइबर क्राइम पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

नोएडा में रहने वाली एक महिला साइबर अपराधियों के सुनियोजित षड्यंत्र का शिकार हो गईं। साइबर अपराधियों ने बैंक अधिकारी अथवा किसी आवश्यक सेवा के सत्यापन के नाम पर पीड़िता से संपर्क स्थापित किया। बातचीत के दौरान पीड़िता को तकनीकी या प्रशासनिक समस्या का डर दिखाकर एक संदिग्ध प्रक्रिया में उलझाया गया। इस दौरान पीड़िता के फोन पर आए संदेशों और डिजिटल माध्यमों का फायदा उठाते हुए जालसाजों ने उनके बैंक खाते का अनाधिकृत एक्सेस हासिल कर लिया।

अनाधिकृत नियंत्रण मिलते ही ठगों ने पीड़िता के खाते से जुड़ी एफडी को डिजिटल माध्यम से तोड़ा और उसमें जमा पूरी पूंजी को अलग-अलग फर्जी व संदिग्ध बैंक खातों में कई किस्तों में स्थानांतरित कर दिया। जब पीड़िता के मोबाइल पर राशि कटने के संदेश प्राप्त हुए, तब उन्हें अपने साथ हुए 19 लाख रुपये के इस बड़े वित्तीय नुकसान का अहसास हुआ।

साइबर ठगी से सुरक्षा के नियम

  • किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक अथवा अनजान एप्लीकेशन को अपने मोबाइल में डाउनलोड न करें।

  • बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, नेट बैंकिंग पासवर्ड या गोपनीय पिन साझा न करें।

  • वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तत्काल 1930 राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं और अपने बैंक को खाता ब्लॉक करने का अनुरोध भेजें।

प्राथमिक सूचना के अनुसार, पीड़िता को कुछ दिन पहले एक अज्ञात नंबर से कॉल प्राप्त हुआ था, जिसमें बैंक खाते अथवा किसी ऑनलाइन सेवा से संबंधित विवरण के तत्काल अपडेशन की बात कही गई थी। कॉल करने वाले ने खुद को प्रामाणिक प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करते हुए पीड़िता को विश्वास में ले लिया। इसके बाद पीड़िता के व्हाट्सएप या संदेश बॉक्स में एक लिंक भेजा गया और जरूरी प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।

जैसे ही प्रक्रिया आगे बढ़ी, अपराधियों ने स्क्रीन शेयरिंग अथवा फिशिंग तकनीक का उपयोग कर नेट बैंकिंग पोर्टल तक सीधी पहुंच बना ली। इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता के बचत खाते में उपलब्ध धनराशि के अलावा उनकी 19 लाख रुपये मूल्य की सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) को तुरंत लिक्विडेट किया और राशि को देश के विभिन्न राज्यों में संचालित म्यूल खातों में भेज दिया। पीड़िता ने जब अपने बैंक से संपर्क किया, तब तक धनराशि निकाली जा चुकी थी। इसके बाद उन्होंने तत्काल नोएडा साइबर सेल में पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

साइबर क्राइम थाना प्रभारी के अनुसार, पीड़िता की शिकायत के आधार पर आईटी एक्ट और धोखाधड़ी से जुड़ी सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक तकनीकी विश्लेषण में उन बैंक खातों और यूपीआई आईडी की पहचान की जा रही है, जिनमें यह धनराशि स्थानांतरित हुई है। पुलिस टीम ने नोडल बैंक अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर संदिग्ध खातों में मौजूद अवशेष राशि को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पीड़िता और उनके परिवार ने प्रशासन से आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और गाढ़ी कमाई की बरामदगी की गुहार लगाई है। वहीं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में ठग बैंक ग्राहकों को डराकर या समय सीमा का दबाव बनाकर जल्दबाजी में गलतियां करवाते हैं, जिससे इस प्रकार के वित्तीय नुकसान हो रहे हैं।

शहरी और शिक्षित आबादी वाले नोएडा जैसे क्षेत्र में लगातार हो रही इस प्रकार की साइबर घटनाएं आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती हैं। विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों और गृहणियों को लक्षित कर बनाए जाने वाले ऐसे जाल से यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों के तकनीकी नेटवर्क बेहद संगठित हैं।

इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सतर्कता की मांग तेज हो गई है। बैंकों द्वारा ग्राहकों को लगातार जागरूक करने के दावों के बावजूद खाताधारक आसानी से इन ठगों के झांसे में आ रहे हैं, जिससे बैंकिंग सुरक्षा प्रणाली में और अधिक कड़े सत्यापन प्रोटोकॉल की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

नोएडा साइबर सेल की तकनीकी टीम अब संदिग्ध फोन नंबरों की लोकेशन, आईपी एड्रेस और संबंधित बैंक खातों के लेन-देन के डिजिटल फुटप्रिंट्स की पड़ताल कर रही है। जिन खातों में रकम भेजी गई है, उनके खाताधारकों के सत्यापन के लिए विभिन्न बैंकों को नोटिस भेजे जा रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि साइबर ठगी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अंतर-राज्यीय स्तर पर सहयोग लिया जा रहा है। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी अवांछित कॉल या संदेश पर घबराने के बजाय सीधे अपनी बैंक शाखा से संपर्क करें और किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक करने से बचें।

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