Justice Yashwant Varma Case: सरकारी आवास से जले नोट मिलने के मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट संसद में पेश 

Justice Yashwant Varma Case: पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से जले नोट मिलने के मामले में गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट आज लोकसभा में पेश होगी।

Aug 12, 2026 - 13:37
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Justice Yashwant Varma Case: सरकारी आवास से जले नोट मिलने के मामले में जांच कमेटी की रिपोर्ट संसद में पेश 
Justice Yashwant Varma Inquiry Report 
  • Justice Yashwant Varma Inquiry Report: पूर्व जज यशवंत वर्मा कैश कांड की जांच रिपोर्ट आज लोकसभा में होगी पेश 
  • जस्टिस यशवंत वर्मा कैश कांड: सरकारी आवास से जले नोट मिलने के मामले में तीन सदस्यीय जांच पैनल की रिपोर्ट आज लोकसभा में 
  • Justice Yashwant Varma Row: संसद में आज पेश होगी जस्टिस यशवंत वर्मा मामले की जांच रिपोर्ट, जानें पूरा मामला

पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लगने के दौरान अधजले नोट मिलने के चर्चित मामले में गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट 12 अगस्त 2026 को संसद के पटल पर रखी जाएगी। लोकसभा महासचिव द्वारा पेश की जाने वाली दो खंडों की इस रिपोर्ट में जांच के दौरान दर्ज किए गए मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को शामिल किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत गठित इस समिति ने प्रकरण से जुड़े तमाम पहलुओं की गहन जांच के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट के संसद में रखे जाने के साथ ही न्यायपालिका में जवाबदेही और पूर्व में शुरू की गई पद से हटाने की प्रक्रिया को लेकर नई संवैधानिक स्थिति सामने आने की संभावना है। 

दिल्ली उच्च न्यायालय के तत्कालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित सरकारी आवास में मार्च 2025 में अचानक आग लग गई थी। घटना के समय आग पर काबू पाने पहुंचे दमकल कर्मियों और पुलिस अधिकारियों को आउटहाउस या स्टोर रूम परिसर से भारतीय मुद्रा के कई अधजले व अजले बंडल मिले थे। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद 146 सांसदों ने उन्हें पद से हटाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस दिया था, जिसके बाद न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के तहत जांच समिति गठित की गई। अब उस तीन सदस्यीय जांच समिति की विस्तृत रिपोर्ट और उससे जुड़े साक्ष्य संसद में पेश किए जा रहे हैं। 

यह पूरा विवाद 14 मार्च 2025 की रात का है, जब न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित बंगले में आग लगने की सूचना दमकल विभाग को दी गई थी। आग बुझाने के अभियान के दौरान मौके पर मौजूद सुरक्षाबल और अग्निशमन कर्मचारियों ने वहां जल चुकी और अधजली हालत में बड़ी संख्या में करेंसी नोट देखे थे। घटना के वक्त न्यायाधीश स्वयं शहर से बाहर थे। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश द्वारा मामले की प्राथमिक आंतरिक जांच कराने के आदेश दिए गए।

इसके उपरांत न्यायमूर्ति वर्मा का स्थानांतरण उनके पैतृक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में कर दिया गया और उनसे न्यायिक कार्य वापस ले लिया गया। अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अगुआई में तीन सदस्यीय संसदीय जांच समिति का गठन किया। समिति ने दर्जनों गवाहों, अग्निशमन कर्मियों और पुलिस अधिकारियों के बयानों का परीक्षण किया तथा उपलब्ध वीडियो व फोटोग्राफिक साक्ष्यों की पड़ताल की। इस बीच, संसदीय जांच प्रक्रिया जारी रहने के दौरान ही अप्रैल 2026 में न्यायमूर्ति वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 

पूरे प्रकरण में न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया था। अपने जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया था कि स्टोर रूम परिसर का इस्तेमाल आम सामान रखने के लिए होता था और उनका या उनके परिवार का वहां रखे गए किसी भी नकद राशि से कोई संबंध नहीं था। उन्होंने इसे खुद को फंसाने की साजिश भी बताया था।

दूसरी ओर, इन-हाउस समिति और जांच पैनल ने प्रथम दृष्टया माना था कि उक्त परिसर पर न्यायाधीश एवं उनके परिवार का नियंत्रण था और प्रथम उत्तरदाताओं द्वारा लिए गए चित्र एवं वीडियो समकालीन साक्ष्य के रूप में दर्ज किए गए थे। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस्तीफा देने के बाद पद से हटाने (Impeachment) की कार्यवाही का स्वरूप क्या होगा, यह एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न बन गया है। 

उच्च न्यायपालिका के किसी सेवारत न्यायाधीश के सरकारी आवास से बड़ी मात्रा में अघोषित नकदी मिलने और उस पर संसदीय जांच समिति के गठन का यह मामला बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। इस घटना ने उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की जवाबदेही, संपत्ति की घोषणा और न्यायिक शुचिता से जुड़े विषयों पर राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस छेड़ दी है। संसद में जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने से मामले के तथ्यात्मक पहलू देश के सामने स्पष्ट हो सकेंगे।

लोकसभा और राज्यसभा के पटल पर रिपोर्ट रखे जाने के बाद संसद यह तय करेगी कि आगे की प्रक्रिया क्या होगी। चूंकि न्यायमूर्ति वर्मा पहले ही इस्तीफा सौंप चुके हैं, ऐसे में कानूनी और संवैधानिक विशेषज्ञ इस बात का आकलन कर रहे हैं कि संसद में महाभियोग की औपचारिकता पूरी की जाएगी या रिपोर्ट को स्वीकार कर प्रक्रिया को समाप्त घोषित किया जाएगा। संसद के निर्णय और गृह व कानून मंत्रालय द्वारा इस दिशा में उठाए जाने वाले अगले कदम पर देश भर की नजर बनी हुई है।

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