Kanwar Yatra 2026: 85 साल के बुजुर्ग चंदर ने 250 किमी पैदल चलकर उठाई कांवड़, भक्ति की मिसाल

Kanwar Yatra 2026: 85 साल के बुजुर्ग चंदर ने आस्था की अनोखी मिसाल पेश की है। उन्होंने कंधे पर कांवड़ उठाकर 250 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी की। पढ़ें पूरी खबर।

Aug 12, 2026 - 13:39
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Kanwar Yatra 2026: 85 साल के बुजुर्ग चंदर ने 250 किमी पैदल चलकर उठाई कांवड़, भक्ति की मिसाल
85 Year Old Kanwariya Chander
  • 85 Year Old Chandar Kanwar Yatra: आस्था के आगे घुटने टेकी उम्र, 85 वर्षीय बुजुर्ग ने पूरी की 250 KM की कांवड़ यात्रा
  • भोले की भक्ति में उम्र पड़ी छोटी: 85 साल के बुजुर्ग चंदर ने कंधे पर उठाई कांवड़, 250 KM की पैदल यात्रा तय कर रचा इतिहास
  • Kanwar Yatra Inspiration: 85 वर्षीय कांवड़िया चंदर की अद्भुत भक्ति, 250 किलोमीटर पैदल चलकर पूरा किया संकल्प

श्रावण मास की पवित्र कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था और अटूट विश्वास की एक अद्भुत तस्वीर सामने आई है, जहां 85 वर्ष की उम्र में बुजुर्ग श्रद्धालु चंदर ने कंधे पर कांवड़ उठाकर 250 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा पूरी कर ली है। उम्र के इस पड़ाव पर जहां अधिकांश लोग पैदल चलने में असहज महसूस करते हैं, वहीं चंदर ने भगवान शिव की अनन्य भक्ति और मजबूत आत्मबल के सहारे हरिद्वार से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक की कठिन दूरी तय की। कांवड़ मार्ग पर उन्हें देखने वाला हर शख्स उनकी शिवभक्ति और इच्छाशक्ति को देखकर दंग रह गया। बुजुर्ग कांवड़िया चंदर अब अपने स्थानीय शिव मंदिर में जलाभिषेक कर अपने इस धार्मिक संकल्प को पूर्ण करेंगे।


सावन के महीने में जहां देश भर से लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और अन्य पवित्र स्थलों से गंगाजल लेकर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं, वहीं 85 वर्षीय चंदर की कांवड़ यात्रा ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बुजुर्ग अवस्था की शारीरिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए चंदर ने लगातार पैदल चलते हुए 250 किलोमीटर की दूरी तय की। कांवड़ यात्रा के मार्ग में उनकी इस अटूट आस्था को देखकर रास्ते में मौजूद अन्य श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों ने उन पर पुष्प वर्षा की और भोलेनाथ के जयकारों के साथ उनका उत्साहवर्धन किया।

कांवड़ यात्रा की शुरुआत के साथ ही चंदर ने अपने मन में भोलेनाथ के जलाभिषेक का संकल्प लिया था। चिकित्सकों और परिवार के लोगों की चिंताओं को परे रखते हुए उन्होंने पूरी तैयारी के साथ हरिद्वार से कांवड़ उठाई। लगभग 250 किलोमीटर की इस लंबी और थका देने वाली यात्रा के दौरान चंदर दिन-रात भोलेनाथ की भक्ति में लीन होकर आगे बढ़ते रहे।

रास्ते में धूप, बारिश और थकान जैसी तमाम अड़चनों के बावजूद उनका संकल्प रत्ती भर भी नहीं डिगा। वे बीच-बीच में कांवड़ शिविरों में विश्राम करते और पुनः शिव के भजनों के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ चलते। पूरे 250 किलोमीटर के सफर में उन्होंने बिना किसी आधुनिक वाहन या सहारा लिए केवल अपने पैरों पर चलकर यह कठिन दूरी पूरी की। कांवड़ मार्ग पर जहां भी वे रुके, लोग उनके चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लेने लगे और उनकी शिवभक्ति की सराहना करने लगे।

अपनी इस कठिन और प्रेरक यात्रा को लेकर बुजुर्ग कांवड़िया चंदर ने बेहद सादगी से कहा कि यह सब उनकी अपनी ताकत नहीं, बल्कि देवों के देव महादेव की कृपा का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जब इंसान मन में सच्चा संकल्प लेकर भोलेनाथ के चरणों में समर्पित हो जाता है, तो शरीर की उम्र और बीमारियां कोई मायने नहीं रखतीं।

कांवड़ मार्ग में तैनात पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक कर्मचारियों और सेवा शिविर चलाने वाले वालंटियर्स ने भी चंदर की भक्ति को नमन किया। शिविर संचालकों ने बताया कि उन्होंने आज तक कई प्रकार के कांवड़ियों को देखा है, लेकिन 85 साल की उम्र में इतनी ऊर्जा और निष्ठा के साथ 250 किलोमीटर की कांवड़ उठाना वास्तव में एक दिव्य अनुभव है और यह नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

85 वर्षीय चंदर की यह आस्थापूर्ण यात्रा आज सोशल मीडिया और कांवड़ मार्गों पर चर्चा का मुख्य केंद्र बन चुकी है। इनकी यह कहानी न केवल धार्मिक नजरिए से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह इच्छाशक्ति, योग, संयम और मानसिक दृढ़ता की भी बड़ी मिसाल प्रस्तुत करती है। आजकल की युवा पीढ़ी, जो थोड़ी सी शारीरिक थकावट से घबरा जाती है, उनके लिए चंदर की यह यात्रा एक बहुत बड़ा सीख और संदेश बनकर सामने आई है। उनकी इस यात्रा से पूरे कांवड़ मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह कई गुना बढ़ गया है।

250 किलोमीटर की सफल और सुरक्षित पैदल यात्रा पूरी करने के बाद बुजुर्ग श्रद्धालु चंदर अब अपने गृह क्षेत्र के प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिर पहुंचेंगे। वहां वे पूर्ण विधि-विधान के साथ सावन के पवित्र सोमवार या शिवरात्रि के अवसर पर लाए गए गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। जलाभिषेक के बाद उनके ग्रामवासी और स्थानीय धार्मिक संगठन उनका नागरिक अभिनंदन करने की तैयारी कर रहे हैं, ताकि उनकी यह अनुकरणीय भक्ति समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैला सके।

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