देवबंद के मानकी स्थित मनकेश्वर महादेव मंदिर में उमड़े श्रद्धालु, कांवड़ियों की सेवा में 24 घंटे खुले शिविर
देवबंद के मानकी स्थित प्राचीन मनकेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार पर भक्तों का सैलाब उमड़ा। कांवड़ियों के लिए जगह-जगह शिविर लगाए गए।
मानकी गांव स्थित प्राचीन मनकेश्वर महादेव मंदिर में हजारों भक्तों ने जल और बेलपत्र से किया जलाभिषेक
देवबंद : मानकी गांव स्थित प्राचीन मनकेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दूसरे सोमवार पर श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। हरिद्वार से गंगाजल ला रहे कांवड़ियों के लिए रास्ते भर 24 घंटे सेवा शिविर चल रहे हैं। मंगलवार को दो लाख श्रद्धालुओं के जलाभिषेक की उम्मीद है।
सावन मास के दूसरे सोमवार के अवसर पर देवबंद और आसपास के पूरे इलाके में भारी धार्मिक उत्साह देखा जा रहा है। देवबंद क्षेत्र के मानकी गांव में स्थित प्राचीन मनकेश्वर महादेव मंदिर समेत नगर के तमाम अन्य शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ पहुंची हुई है। शिव मंदिरों में पहुंचे श्रद्धालुओं और शिव भक्तों ने भगवान शिव पर जल तथा बेलपत्र चढ़ाकर उनका जलाभिषेक और पूजन किया। इसके साथ ही मानकी गांव के मनकेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचे भक्तों ने वहां स्वयं प्रकट हुए पवित्र शिवलिंग के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया।
कांवड़ियों की कतारें और 24 घंटे सेवा शिविर
दूसरी तरफ हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लेकर आ रहे हजारों की संख्या में कांवड़िए देवबंद क्षेत्र से होकर अपने-अपने गंतव्य स्थानों की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। कांवड़ियों द्वारा अपने साथ लाई जा रही तरह-तरह की मनोरम और सुंदर कांवड़ को देखकर स्थानीय लोग बेहद अभिभूत हो रहे हैं। कांवड़ियों के विश्राम और भोजन के लिए मंगलौर से लेकर देवबंद तक के लंबे रास्ते पर अनेक कांवड़ शिविरों का आयोजन किया गया है। इन सभी कांवड़ शिविरों में सेवादारों द्वारा 24 घंटे लगातार सेवा कार्य चलाए जा रहे हैं।
मुस्लिम किसान के खेत में प्रकट हुआ थे शिवलिंग
देवबंद के मानकी गांव स्थित प्राचीन मनकेश्वर महादेव मंदिर की एक बेहद खास विशेषता और पौराणिक मान्यता जुड़ी हुई है। मान्यता के अनुसार हजारों साल पहले इसी स्थान पर मौजूद एक मुस्लिम किसान के खेत से यह शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था। इसके बाद एक व्यापारी को अपने सपने में इस स्थान पर भगवान शिव का मंदिर बनाने का विचार दिखाई दिया था। उसी सपने की बात को फलीभूत करते हुए देवबंद शहर के वैश्य समाज के लोग आगे आए। वैश्य समाज के लोगों ने इस शिवलिंग को उसी स्थान पर स्थापित कराकर मंदिर का निर्माण कराया था। तभी से इस मंदिर में शिवलिंग की पूजा करने और जलाभिषेक करने का सिलसिला लगातार जारी है।
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