Jantar Mantar Controversy: जंतर-मंतर पर कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार, दिल्ली पुलिस के एसीपी पर गंभीर आरोप

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के एक एसीपी स्तर के अधिकारी पर शारीरिक दुर्व्यवहार और छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं।

By INA News Desk
Oct 4, 2026 - 16:59
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Jantar Mantar Controversy: जंतर-मंतर पर कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों से दुर्व्यवहार, दिल्ली पुलिस के एसीपी पर गंभीर आरोप
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देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की कवरेज कर रही तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) स्तर के सेवारत अधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला पत्रकारों का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान मची अफरातफरी और भीड़ नियंत्रण की आड़ में उक्त पुलिस अधिकारी ने उनके साथ अनुचित शारीरिक स्पर्श (गलत तरीके से छूना) और अमर्यादित व्यवहार किया। इस घटना के सामने आने के बाद राजधानी के प्रशासनिक और मीडिया हलकों में हड़कंप मच गया है तथा फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर विमर्श छिड़ गया है।

यह विवाद जंतर-मंतर पर चल रहे एक संवेदनशील विरोध प्रदर्शन के दौरान सामने आया। मौके पर मौजूद मीडियाकर्मियों के अनुसार, जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और अवरोध हटाने को लेकर टकराव की स्थिति बन रही थी, तब पत्रकार अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन करते हुए घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग और रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान एसीपी स्तर के अधिकारी ने कथित रूप से मर्यादा की सीमाओं को लांघते हुए महिला पत्रकारों के साथ अशोभनीय आचरण किया। घटना के तुरंत बाद संबंधित पत्रकारों ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया और लिखित शिकायत देकर आपराधिक धाराओं में कार्रवाई की मांग की।

महिला पत्रकारों की शिकायत और लगाए गए आरोप

पीड़ित पत्रकारों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, वे स्पष्ट रूप से प्रेस पहचान पत्र (प्रेस आईडी) के साथ कवरेज कर रही थीं और पुलिस कर्मियों को इस बात की पूरी जानकारी थी कि वे मीडिया संस्थान का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि भीड़ को तितर-बितर करने या पीछे धकेलने के दौरान महिला पुलिसकर्मियों की उपस्थिति अनिवार्य होती है, लेकिन पुरुष अधिकारी ने स्वयं आगे आकर अनुचित तरीके से शारीरिक संपर्क किया।

पत्रकारों ने बताया कि जब उन्होंने मौके पर ही अधिकारी के इस व्यवहार का विरोध किया, तो उन्हें पेशेवर तरीके से जवाब देने के बजाय डराने-धमकाने और कवरेज रोकने का प्रयास किया गया। महिला पत्रकारों ने साफ शब्दों में कहा है कि यह केवल कार्यस्थल पर बाधा डालने का मामला नहीं है, बल्कि यह कानून के रखवाले द्वारा पद का दुरुपयोग कर किसी महिला की गरिमा और लज्जा को ठेस पहुंचाने का गंभीर अपराध है।

पत्रकार संगठनों का कड़ा रुख और निष्पक्ष जांच की मांग

इस घटना की जानकारी सार्वजनिक होते ही प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, महिला पत्रकार संघों और दिल्ली के विभिन्न मीडिया मंचों ने कड़े शब्दों में निंदा की है। मीडिया संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर मांग की है कि किसी राजपत्रित पुलिस अधिकारी (एसीपी) पर लगे इन आरोपों की जांच केवल आंतरिक खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

पत्रकार संघों की प्रमुख मांगें हैं:

  1. तत्काल प्रभाव से पद से हटाना: जब तक मामले की जांच पूरी नहीं होती, आरोपी एसीपी को फील्ड ड्यूटी से अलग किया जाए ताकि वह गवाहों या साक्ष्यों को प्रभावित न कर सके।

  2. सीसीटीवी और वीडियो फुटेज की सुरक्षित जब्ती: जंतर-मंतर क्षेत्र में लगे सभी उच्च क्षमता वाले निगरानी कैमरों और मौके पर मौजूद अन्य मीडिया चैनलों के रॉ फुटेज को सुरक्षित रखा जाए।

  3. समयबद्ध जांच रिपोर्ट: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और महिलाओं के संरक्षण से जुड़े कानूनों के तहत स्वतंत्र एजेंसी द्वारा तय समयसीमा में जांच पूरी हो।

पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया और कानूनी प्रक्रिया

मामले के तूल पकड़ने पर नई दिल्ली जिला पुलिस और दिल्ली पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि महिला पत्रकारों की ओर से प्राप्त शिकायत को संज्ञान में लिया गया है। प्रारंभिक प्रक्रिया के तहत मामले के सभी तकनीकी पहलुओं, घटनास्थल के वीडियो साक्ष्यों और मौके पर तैनात अन्य पुलिसकर्मियों के बयानों का मिलान कराया जा रहा है।

पुलिस के वरिष्ठ सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि विभाग किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या अशोभनीय आचरण के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाता है। शिकायत के आधार पर विधिक परामर्श लिया जा रहा है और आंतरिक जांच समिति के साथ-साथ अपराध शाखा को भी मामले के तथ्य सौंपने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। यदि जांच में अधिकारी का आचरण नियमों और कानून के विरुद्ध पाया जाता है, तो विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

ऑन-ड्यूटी सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही पर सवाल

जंतर-मंतर जैसे अत्यधिक संवेदनशील और सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर, जहां लगातार सीसीटीवी निगरानी और पुलिस की बहुस्तरीय तैनाती रहती है, वहां दिनदहाड़े इस प्रकार के आरोपों का उभरना कानून-व्यवस्था के प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषकर तब, जब सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न मानवाधिकार आयोगों ने स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए हैं कि किसी भी सार्वजनिक प्रदर्शन में महिलाओं से जुड़े मामलों में महिला पुलिसकर्मियों को ही अग्रिम पंक्ति में रखा जाना चाहिए।

महिला पत्रकारों ने साफ किया है कि वे इस मामले में न्याय मिलने तक कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी। राजधानी के इस प्रकरण ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता और अधिकार के पदों पर बैठे व्यक्तियों की जवाबदेही तय करना लोकतंत्र में स्वतंत्र प्रेस के अस्तित्व के लिए कितना अनिवार्य है।

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