धार्मिक मामलों में AI पर न करें आंख बंद कर भरोसा, मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने दी चेतावनी
धार्मिक और शरीयत से जुड़े फैसलों में AI पर आंख बंद कर भरोसा करना नुकसानदेह हो सकता है। जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने लोगों को सतर्क किया।
देवबंद। जमीयत दावतुल मुस्लिमीन के संरक्षक मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने लोगों को धर्म और शरीयत से जुड़े संवेदनशील मामलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर आंख बंद कर भरोसा न करने की सलाह दी है। उन्होंने साफ कहा कि AI केवल एक तकनीकी साधन है, कोई आलिम या धर्मगुरु नहीं। ऐसे में आस्था और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े मसलों में सही दिशा के लिए हमेशा योग्य और प्रमाणित धर्मगुरुओं व मुफ्तियों से ही राय लेनी चाहिए।
मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि इन दिनों हर छोटे-बड़े सवाल के लिए चैटजीपीटी और दूसरे AI टूल्स पर निर्भर रहने का चलन काफी बढ़ गया है। लोग निकाह, तलाक, संपत्ति के बंटवारे और हलाल-हराम जैसे बेहद अहम मामलों में भी AI से हल तलाश रहे हैं। यह आदत बेहद चिंताजनक है, क्योंकि इंटरनेट पर मौजूद अधूरी और बिना जांच-परख की सामग्री को जोड़कर AI जवाब तैयार करता है। तकनीक के पास सच और झूठ या सही और गलत को समझने का मानवीय विवेक नहीं होता। इसलिए बिना किसी विद्वान की तस्दीक के ऐसे उत्तरों को स्वीकार करना बड़ी भूल साबित हो सकता है।
उन्होंने आगे समझाया कि व्यक्तिगत मामलों में हर व्यक्ति की परिस्थितियां अलग होती हैं और उसी आधार पर नियम व फैसले तय होते हैं। निकाह, तलाक या विरासत के हर पहलू में अलग-अलग बारीकियां शामिल रहती हैं, जिन्हें कोई भी सॉफ्टवेयर या एल्गोरिदम नहीं पकड़ सकता। अधूरी समझ के आधार पर मिला तकनीकी जवाब किसी भी परिवार या व्यक्ति के लिए भारी नुकसान की वजह बन सकता है। ऐसे में कंप्यूटर से मिले किसी भी जवाब को अंतिम धार्मिक निर्णय कतई नहीं मानना चाहिए।
मौलाना ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य पढ़ाई-लिखाई, रिसर्च, भाषा सीखने और रोजमर्रा के कामकाजी कामों में AI का उपयोग जरूर किया जा सकता है। लेकिन इसे धार्मिक ज्ञान और विद्वानों का विकल्प कभी नहीं बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर धर्म से जुड़ी कोई भी पोस्ट या जानकारी शेयर करने से पहले किसी जानकार व्यक्ति से उसकी सत्यता जांचने की अपील की, ताकि इंटरनेट पर किसी भी तरह का भ्रम फैलने से रोका जा सके।
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