UP Teacher Recruitment: यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित शिक्षकों को मिले नियुक्ति पत्र, अभ्यर्थियों ने पारदर्शी प्रक्रिया को सराहा
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित टीजीटी और पीजीटी शिक्षकों को मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिले। अभ्यर्थियों ने निष्पक्ष चयन प्रक्रिया की जमकर सराहना की।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने और योग्य युवाओं को पारदर्शी माहौल में रोजगार उपलब्ध कराने के क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को औपचारिक नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। राजधानी लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त करते ही सफल अभ्यर्थियों के चेहरों पर संतोष और उत्साह की लहर दौड़ गई। प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए नवनियुक्त प्रवक्ताओं (पीजीटी) और प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों (टीजीटी) ने चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता, समयबद्धता और पारदर्शिता के प्रति संतोष व्यक्त करते हुए शासन के प्रयासों की सराहना की।

अभ्यर्थियों ने कहा कि लंबे समय तक विवादों और कानूनी अड़चनों में घिरने वाली भर्ती प्रक्रियाओं के विपरीत, वर्तमान व्यवस्था में बिना किसी भेदभाव, सिफारिश अथवा भ्रष्टाचार के केवल योग्यता के आधार पर नियुक्तियां सुनिश्चित की गई हैं।
दशकों का इंतजार हुआ खत्म: सफल अभ्यर्थियों ने साझा किए अनुभव
नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में शामिल कई अभ्यर्थियों के लिए यह अवसर वर्षों के संघर्ष और अटूट धैर्य के सुखद परिणाम के रूप में सामने आया।
-
ममता मौर्या (टीजीटी संस्कृत): चयन प्रक्रिया के अनुभव को साझा करते हुए ममता मौर्या ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2005 में परास्नातक (एमए) की पढ़ाई पूरी की थी और तभी से वह नियमित रूप से शिक्षक भर्ती परीक्षाओं की तैयारी में जुटी थीं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती प्रशासनिक व्यवस्थाओं के दौरान या तो परीक्षाएं लगातार निरस्त हो जाती थीं या फिर चयन के बाद भी परिणाम और नियुक्तियों में वर्षों की देरी होती थी। लंबे समय के इंतजार के बाद निष्पक्ष मूल्यांकन के आधार पर नियुक्ति पत्र मिलना उनके जीवन का सबसे बड़ा संबल है।
-
आंचल शुक्ला (पीजीटी कला): वाराणसी के अग्रसेन कन्या इंटर कॉलेज (टाउनहॉल) में प्रवक्ता कला के पद पर चयनित आंचल शुक्ला ने कहा कि यह उपलब्धि उनके पारिवारिक सपनों की पूर्ति जैसी है। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि राज्य में महिलाओं को समान और सुरक्षित वातावरण में बिना किसी पूर्वाग्रह के रोजगार के सुलभ अवसर मिल रहे हैं। कार्यस्थलों और सामाजिक परिवेश में सुरक्षा की मजबूत स्थिति ने बेटियों और महिलाओं की सरकारी नौकरियों में भागीदारी को नई गति दी है।
-
गोपाल प्रजापति (पीजीटी रसायन विज्ञान): आजमगढ़ स्थित श्री वैष्णव हरिहर दास इंटर कॉलेज में रसायन विज्ञान के प्रवक्ता पद पर चयनित गोपाल प्रजापति ने कहा कि चयन प्रक्रिया में जिस प्रकार की गति और पारदर्शिता बरती गई है, उसने पूरे परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है। पूर्व के दौर में चयन बोर्डों को लेकर जिस तरह की अव्यवस्था और संशय की स्थिति रहती थी, नई व्यवस्था ने उसे पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
-
शिवम बरनवाल (टीजीटी गणित): मऊ के निवासी शिवम बरनवाल ने गणित विषय के सहायक अध्यापक पद पर चयनित होने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चयन की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनुचित लेन-देन या बिचौलियों का हस्तक्षेप नहीं रहा। केवल लिखित परीक्षा और मेरिट के आधार पर वास्तविक मेधा को उसका हक मिला है।
-
कुमारी ऊषा सिंह (टीजीटी गृह विज्ञान): गोरखपुर के पं. दीनदयाल इंटर कॉलेज में गृह विज्ञान शिक्षिका के रूप में चयनित कुमारी ऊषा सिंह ने कहा कि चयन प्रणाली में आधुनिक तकनीक और स्पष्ट नियमों के समावेश से पूरी प्रक्रिया संशयमुक्त रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जिस निष्पक्षता से उन्हें कार्य करने का दायित्व सौंपा गया है, वह शिक्षण कार्य में भी उसी ईमानदारी और निष्ठा का पालन करेंगी।
-
शिव प्रसाद मिश्रा (टीजीटी संस्कृत): अमेठी के शिव प्रसाद मिश्रा ने आयोग की गतिशीलता की सराहना करते हुए कहा कि परिणाम जारी होने से लेकर सत्यापन और विद्यालय आवंटन की पूरी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हुई, जिससे हजारों युवाओं को मानसिक संशय से मुक्ति मिली और वे सीधे समाज सेवा से जुड़ सके हैं।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की भूमिका
गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा में शिक्षकों की भर्ती के लिए एक एकीकृत 'उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग' का गठन किया गया था।

इस स्वायत्त संस्था का मूल उद्देश्य भर्ती प्रक्रियाओं में एकरूपता लाना, मुकदमों की संभावनाओं को समाप्त करना और परीक्षाओं के आयोजन से लेकर अंतिम नियुक्ति तक एक निश्चित समयसीमा का कड़ाई से पालन कराना है। माध्यमिक विद्यालयों में रिक्त पड़े प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों के पदों पर योग्य शिक्षकों की तैनाती से प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) और राजकीय विद्यालयों में पठन-पाठन का स्तर बेहतर होने की उम्मीद है।
युवाओं के विश्वास को पुनर्स्थापित करती भर्ती प्रणाली
समारोह में उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षाविदों का मानना है कि पारदर्शी भर्ती प्रणाली का सीधा प्रभाव राज्य के बौद्धिक वातावरण पर पड़ता है। जब युवाओं को यह भरोसा होता है कि उनकी मेहनत और अध्ययन का निष्पक्ष मूल्यांकन होगा, तो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों का मनोबल मजबूत होता है। नवनियुक्त शिक्षकों ने इस बात का संकल्प दोहराया कि वे माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण के मूल्यों से जोड़ने में अपनी पूरी क्षमता लगाएंगे।
What's Your Reaction?