यूपी में बाल चिकित्सा आपात सेवा का नया मॉडल: 6 करोड़ बच्चों को मिलेगा सुरक्षा कवच, हर साल बचेंगी 1,800 जानें

उत्तर प्रदेश में बाल ट्रॉमा केयर को आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ा जाएगा। 173 एकीकृत इकाइयां बनेंगी, जिससे प्रतिवर्ष करीब 1,800 बच्चों की जान बचेगी।

By INA News Desk
Oct 1, 2026 - 22:23
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यूपी में बाल चिकित्सा आपात सेवा का नया मॉडल: 6 करोड़ बच्चों को मिलेगा सुरक्षा कवच, हर साल बचेंगी 1,800 जानें

गंभीर दुर्घटनाओं और चोटों के शिकार बच्चों को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए उत्तर प्रदेश में आपातकालीन स्वास्थ्य प्रणाली का कायाकल्प किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बाल ट्रॉमा केयर को मौजूदा आपातकालीन चिकित्सा तंत्र के साथ एकीकृत करने का एक व्यापक खाका तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के लगभग छह करोड़ बच्चों को उच्चस्तरीय, सुलभ और कम लागत वाली आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना है। अस्पतालों, उन्नत एंबुलेंस सेवाओं, विशेषज्ञ चिकित्सकों और त्वरित रेफरल प्रणाली को एक संयुक्त डिजिटल नेटवर्क से जोड़कर हर साल लगभग 1,800 बच्चों का अनमोल जीवन बचाने का लक्ष्य तय किया गया है।

दुर्घटनाओं के दौरान बच्चों में मृत्यु दर घटाने के लिए 'यूनिफाइड इमरजेंसी केयर आर्किटेक्चर' तैयार किया गया है। इसके तहत गंभीर रूप से घायल बच्चों को दुर्घटना स्थल से लेकर प्राथमिक उपचार, ट्रॉमा सेंटर, विशेषज्ञ सर्जरी और स्वास्थ्य लाभ तक हर चरण पर समन्वित देखभाल मिलेगी। इससे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर करने में लगने वाले अनावश्यक समय और देरी को पूरी तरह समाप्त किया जा सकेगा। वर्तमान में आपातकालीन चिकित्सा विभागों में ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी मात्र 3 से 5 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 12 से 15 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है।

राज्यभर में विभिन्न स्तरों पर अत्याधुनिक सुविधाओं का एक सशक्त नेटवर्क खड़ा किया जाएगा। इसके तहत लेवल-एक का एक, लेवल-दो की 36 और लेवल-तीन की 126 एकीकृत ट्रॉमा एवं इमरजेंसी इकाइयां विकसित की जाएंगी। इस प्रकार प्रदेश में कुल 173 आपस में जुड़ी हुई स्वास्थ्य इकाइयां सक्रिय होंगी, जिनके माध्यम से 2,853 नए विशेष बाल ट्रॉमा बेड उपलब्ध होंगे। इस पूरी व्यवस्था से सुदूर ग्रामीण अंचलों में घायल होने वाले बच्चों को भी निकटतम केंद्र पर तुरंत क्रिटिकल केयर सपोर्ट मिल सकेगा।

बाल आपातकालीन चिकित्सा में दुर्घटना के बाद का शुरुआती पहला घंटा यानी 'गोल्डन ऑवर' सबसे अधिक निर्णायक होता है। सरकार का प्राथमिक ध्यान इसी अवधि में त्वरित रिस्पॉन्स देने पर केंद्रित है। इसके लिए प्रशिक्षित मेडिकल टीमों की तैनाती, उन्नत लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस कनेक्टिविटी और समर्पित ट्रॉमा सेंटरों के समन्वय को सुदृढ़ किया जा रहा है। इस पूरी आपातकालीन व्यवस्था को धरातल पर क्रियान्वित करने के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जाएगी, जिससे प्रदेश का बाल आपातकालीन स्वास्थ्य तंत्र देश में एक मिसाल बन सके।

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