कुपोषण पर यूपी सरकार का कड़ा प्रहार: 26 जिलों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल, संभव 6.0 अभियान तेज

यूपी में कुपोषण के खिलाफ संभव 6.0 अभियान के तहत 26 जिलों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच। बाल विकास विभाग और यूनिसेफ की टीमों ने परखी पोषण सेवाएं।

By INA News Desk
Oct 1, 2026 - 22:25
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कुपोषण पर यूपी सरकार का कड़ा प्रहार: 26 जिलों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल, संभव 6.0 अभियान तेज

उत्तर प्रदेश में बच्चों की सेहत सुधारने और कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए संचालित 'संभव 6.0' अभियान को जमीनी स्तर पर और अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग तथा यूनिसेफ की संयुक्त विशेषज्ञ टीमों ने फील्ड में उतरकर पोषण कार्यक्रमों की गुणवत्ता, संसाधनों की उपलब्धता और अंतरविभागीय तालमेल का सघन परीक्षण शुरू किया है। इस राज्यव्यापी पड़ताल के तहत अब तक 26 जनपदों के 395 आंगनबाड़ी केंद्रों का मौके पर जाकर गहन स्थलीय निरीक्षण पूरा किया जा चुका है।

निरीक्षण के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों के वजन और लंबाई की सटीक माप, वृद्धि निगरानी की नियमितता, सूक्ष्म कार्ययोजना (माइक्रोप्लान) के क्रियान्वयन और पोषण ट्रैकर की कार्यप्रणाली की बारीकी से जांच की गई। समीक्षा में सामने आया कि अधिकांश केंद्रों पर शारीरिक वृद्धि मापने वाले जरूरी आधुनिक उपकरण चालू हालत में उपलब्ध हैं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तकनीकी दक्षता भी बेहतर पाई गई है।

आकलन में यह भी पाया गया कि जमीनी स्तर पर बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार, स्वास्थ्य और पंचायती राज विभाग के बीच मजबूत तालमेल बना हुआ है। ब्लॉक और जनपद स्तर पर अधिकारियों की सीधी भागीदारी से अभियान को गति मिल रही है। हाल ही में यूनिसेफ की राज्य स्तरीय तकनीकी टीम के सदस्य डॉक्टर सन्दीप सेठ ने आगरा, एटा और फिरोजाबाद जनपदों का विस्तृत दौरा किया। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर वृद्धि निगरानी प्रक्रिया का मूल्यांकन किया और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं व फील्ड अधिकारियों को जरूरी तकनीकी सुझाव दिए।

बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन की निदेशक हर्षिता माथुर के अनुसार, फील्ड स्तर पर सेवाएं सुचारू रूप से चलने के साथ-साथ अभिलेखों के रख-रखाव और दस्तावेजीकरण को और अधिक व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठकों के विवरण, फील्ड विजिट की रिपोर्ट और एक्शन टेकन रिपोर्ट को पारदर्शी ढंग से दर्ज करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसके साथ ही गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) की प्रारंभिक पहचान, तत्काल प्रबंधन और वृद्धि निगरानी उपकरणों के कुशल संचालन के लिए कार्यकर्ताओं को निरंतर तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि प्रदेश को पूरी तरह कुपोषण मुक्त बनाने का लक्ष्य समय पर हासिल किया जा सके।

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