निराश्रित महिला पेंशन योजना से संवर रहा जीवन: यूपी में 42 लाख से अधिक महिलाओं को मिल रहा सहारा, हर माह खाते में राशि

उत्तर प्रदेश में निराश्रित महिला पेंशन योजना से 42 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक संबल मिल रहा है। हर महीने एक हजार रुपये की सहायता सीधे खाते में भेजी जा रही है।

By INA News Desk
Nov 1, 2026 - 22:44
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निराश्रित महिला पेंशन योजना से संवर रहा जीवन: यूपी में 42 लाख से अधिक महिलाओं को मिल रहा सहारा, हर माह खाते में राशि
प्रतीकात्मक चित्र
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पारिवारिक मुखिया यानी पति के न रहने के बाद गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझने वाली महिलाओं को सहारा देने के लिए प्रदेश सरकार की विशेष पेंशन योजना अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है। 'पति की मृत्यु उपरान्त निराश्रित महिला पेंशन योजना' के माध्यम से राज्य भर में 42 लाख से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को प्रतिमाह वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही तक के विवरण के अनुसार, योजना की सभी पात्र लाभार्थियों को हर महीने एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता नियमित रूप से दी जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विपरीत परिस्थितियों में फंसी महिलाओं को आर्थिक संकट से उबारते हुए समाज में आत्मनिर्भर और गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना है।

घर के कमाऊ सदस्य के असामयिक निधन के बाद महिलाओं पर बच्चों के लालन-पालन, शिक्षा और दैनिक खर्चों का भारी बोझ आ जाता है। ऐसे कठिन समय में प्रतिमाह मिलने वाली यह राशि उनके लिए बहुत बड़ा सहारा बनकर सामने आ रही है। इस योजना का व्यापक दायरा दर्शाता है कि प्रशासन ने समाज के सबसे कमजोर और बेसहारा तबके को सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और बिचौलियों से मुक्त बनाने के लिए भुगतान को सीधे पहचान आधारित वित्तीय अंतरण प्रणाली से जोड़ा गया है, जिससे अनुदान की पूरी धनराशि बिना किसी कटौती के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचती है। महिला कल्याण विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि नियमों की परिधि में आने वाली कोई भी पात्र महिला इस सहायता से वंचित न रहने पाए। इसके लिए ग्राम स्तर से लेकर कस्बों तक पात्र महिलाओं की पहचान करने और उनके आवेदन पत्रों के निस्तारण को गति देने का कार्य किया जा रहा है। योजना के मानकों के अनुसार, आवेदिका का प्रदेश का मूल निवासी होना, अठारह वर्ष से अधिक आयु सीमा, पति के देहावसान की स्थिति और परिवार की कुल वार्षिक आय दो लाख रुपये की सीमा के भीतर होना आवश्यक है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में इस योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को मात्र पांच सौ रुपये प्रतिमाह की सहायता राशि दी जाती थी, जिसे बाद में बढ़ाकर सीधे एक हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। शत-प्रतिशत की इस बढ़ोतरी ने महंगाई के दौर में बेसहारा महिलाओं के लिए दैनिक घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति को काफी हद तक आसान बनाया है। विभागीय स्तर पर नए आवेदनों को जोड़ने और पात्र महिलाओं को समय से सहायता पहुंचाने का क्रम निरंतर जारी है।

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