नवरात्र के शनिवार को ही होते हैं दर्शन- देवी भक्तों को अभीष्ट फल देने वाली मां धूमावती माता के होते हैं दर्शन। 

नवरात्र महापर्व की तृतीया अर्थात शनिवार को कालीपीठ पर अभीष्ठ फल देने वाली मां धूमावती के दर्शन...

By INA News Desk
Oct 5, 2024 - 19:05
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नवरात्र के शनिवार को ही होते हैं दर्शन- देवी भक्तों को अभीष्ट फल देने वाली मां धूमावती माता के होते हैं दर्शन। 
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सीतापुर। नवरात्र महापर्व की तृतीया अर्थात शनिवार को कालीपीठ पर अभीष्ठ फल देने वाली मां धूमावती के दर्शन करने के लिए पूरे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन कर उन्हें काले तिल की पोटली व नारियल का गोला अर्पित किया। इस मौके पर सुहागिनों ने अपने पति की दीर्घायु होने की कामना भी की।

मां धूमावती के दर्शन करने को सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होने लगी थी। इससे पूर्व कालीपीठ के पीठाधीश्वर एवं ललिता देवी मंदिर के प्रधान पुजारी गोपाल शास्त्री ने मां धूमावती की मूर्ति पर पड़े पर्दे को हटाकर वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां का अभिषेक कर श्रंगार किया और आरती की। इसके बाद दर्शनार्थियों को लिए माता का दरबार लगा दिया गया। देवी भक्तों ने मां धूमावती के दर्शन-पूजन कर सुख, समृद्धि, वैभव, शांति, ऐश्वर्य प्राप्ति की मंगलकामना की।

ज्ञातव्य हो कि नवरात्र के शनिवार को ही माता धूमावती के पट खोले जाते हैं और तभी उनके दर्शन संभव हैं। नैमिषारण्य काली पीठ में स्थित एक मात्र माता धूमावती का मंदिर है। कालीपीठ के पीठाधीश्वर गोपाल शास्त्री ने भी मां की महिमा का गुणगान करते हुए बताया कि दस महाविद्या उग्र देवी  धूमावती देवी का स्वरूप विधवा का है। कौवा इनका वाहन है, वह श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं। खुले केश उनके रूप को और भी भयंकर बना देते हैं। इसी कारण से मां धूमावती के प्रतिदिन दर्शन न करने की परंपरा है।

उन्होंने बताया कि मां का स्वरूप कितना ही उग्र क्यों न हो संतान के लिये वह हमेशा ही कल्याणकारी होता है। मां धूमावती के दर्शन-पूजन से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है। नवरात्र के शनिवार को काले कपडे़ में काले तिल मां के चरणों में भेंट कर उनसे मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए आराधना की जाती है। परंपरा है कि सुहागिनें मां धूमावती की मूर्ति का स्पर्श नहीं करती हैं। वह केवल दूर से ही मां के दर्शन कर सकती हैं। मां धूमावती के दर्शन से सुहागिनों का सुहाग अमर हो जाता है।

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कालीपीठ मंदिर के संचालक और महन्त पुजारी भाष्कर शास्त्री ने बताया कि मां धूमावती के दर्शन नवरात्र के शनिवार हो ही होते हैं। नवरात्र के शनिवार के अलावा अन्य दिनों में मां धूमावती का दर्शन व पूजन नहीं किया जाता है। जिले में नैमिषारण स्थित कालीपीठ के अलावा मां धूमावती का ये स्वरूप श्रीपीतांबरा पीठ दतिया (मध्य प्रदेश) में ही है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रसिद्ध दक्षिण मुखी कालीपीठ मंदिर में इस बार नवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजन एवं अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है, नवरात्रि के दौरान मां काली की विशेष आराधना की जा रही है।

  संदीप चौरसिया INA NEWS ब्यूरो sitapur

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