अयोध्या: राम मंदिर परिसर में मिली असहाय बुजुर्ग महिला, सखी वन स्टॉप सेंटर की काउंसलिंग के बाद सम्मान से लौटी घर
अयोध्या राम मंदिर परिसर में असहाय मिली बुजुर्ग महिला को 181 हेल्पलाइन और वन स्टॉप सेंटर ने सुरक्षित आश्रय दिया। काउंसलिंग के बाद परिजनों से कराया मिलन।
उत्तर प्रदेश में संकटग्रस्त महिलाओं की सुरक्षा और त्वरित सहायता के लिए संचालित संरक्षण तंत्र का मानवीय चेहरा धर्मनगरी अयोध्या में सामने आया है। पारिवारिक उपेक्षा और घरेलू हिंसा के बाद घर से बेदखल होकर राम मंदिर परिसर में अत्यंत लाचार स्थिति में बैठी मिलीं 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला को सखी वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन की मदद से नया जीवन मिला है। प्रभावी काउंसलिंग और निरंतर संवाद के जरिए परिवार के मतभेदों को दूर करते हुए उन्हें पूरे सम्मान और सुरक्षा के साथ उनके घर भेज दिया गया है।
घरेलू कलह और मानसिक प्रताड़ना के चलते पति द्वारा घर से निकाले जाने के बाद पीड़िता असहाय होकर राम मंदिर परिसर पहुंच गई थीं। वहां उन्हें देखकर जागरूक लोगों ने महिला हेल्पलाइन 181 पर सूचना दी। अलर्ट मिलते ही सखी वन स्टॉप सेंटर की बचाव टीम तत्काल मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। केंद्र पर उन्हें जरूरी भावनात्मक संबल प्रदान किया गया, स्वास्थ्य संबंधी देखभाल सुनिश्चित की गई और उनके कानूनी अधिकारों व विकल्पों से अवगत कराते हुए सुरक्षित आश्रय दिया गया।
पीड़िता को दोबारा उनके अपनों से जोड़ने के लिए वन स्टॉप सेंटर ने स्थानीय पुलिस, ग्राम प्रधान और परिजनों से संपर्क साधा। इसके बाद पति, बेटे और बहू को केंद्र पर बुलाकर उनकी व्यापक स्तर पर पारिवारिक काउंसलिंग की गई। कई दौर के विचार-विमर्श और समझाइश के बाद परिजनों को अपनी भूल का अहसास हुआ और उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला। परिवार के सदस्यों ने महिला की गरिमा का पूरा ध्यान रखने और उन्हें प्रेमपूर्वक साथ रखने पर लिखित सहमति जताई।
जिला प्रोबेशन अधिकारी जय पाल वर्मा के अनुसार इस संवेदनशील मामले में त्वरित कार्रवाई और आपसी समन्वय ने अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के सफल प्रयासों से पीड़िता की इच्छा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें सकुशल घर भेज दिया गया है, जहां वह अब भयमुक्त और शांतिपूर्ण माहौल में रह रही हैं। प्रशासन का कहना है कि संकट में फंसी महिलाओं को केवल तात्कालिक संरक्षण देना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित, गरिमामय और स्थायी सामाजिक परिवेश उपलब्ध कराना प्राथमिकता है।
What's Your Reaction?