हरदोई में घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के खिलाफ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई, सर्किट हाउस में सुनी जाएंगी पीड़िता की शिकायतें

हरदोई सर्किट हाउस में राज्य महिला आयोग की सदस्य एकता सिंह करेंगी जनसुनवाई। घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी समस्याओं पर होगी सीधी सुनवाई।

Aug 23, 2026 - 21:01
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हरदोई में घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के खिलाफ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई, सर्किट हाउस में सुनी जाएंगी पीड़िता की शिकायतें
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य एकता सिंह
  • घरेलू हिंसा से दहेज उत्पीड़न तक, 25 अगस्त को हरदोई में महिलाओं की फरियाद सुनेंगी एकता सिंह
  • एफआईआर में लापरवाही, छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न और महिला अधिकारों से जुड़े मामलों पर होगी जनसुनवाई

रिपोर्टर : मुकेश सिंह सोमवंशी

हरदोई। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों से जुड़े मामलों को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य एकता सिंह 25 अगस्त दिन मंगलवार को हरदोई पहुंचेंगी। वह हरदोई स्थित सर्किट हाउस में सुबह 11 बजे से महिलाओं की समस्याओं और शिकायतों की जनसुनवाई करेंगी। इस दौरान महिला एवं बालिका सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया जा सकता है।

जनसुनवाई में घरेलू हिंसा, दहेज की मांग, दहेज उत्पीड़न, पति या ससुराल पक्ष की प्रताड़ना, मारपीट, छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, धमकी, पीछा करने, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और अन्य अपराधों से संबंधित शिकायतें प्रमुखता से सुनी जाएंगी।

पुलिस की कार्रवाई में लापरवाही की शिकायत भी रख सकेंगी महिलाएं

किसी महिला की शिकायत पर एफआईआर दर्ज न होने, जांच में लापरवाही, आरोपियों की गिरफ्तारी या कार्रवाई न होने, पीड़िता की शिकायत पर उचित सुनवाई न मिलने अथवा पुलिस स्तर पर समस्या का समाधान न होने के मामलों को भी आयोग की सदस्य के समक्ष रखा जा सकता है।

शिकायतों के आधार पर संबंधित विभाग या पुलिस अधिकारियों से मामले की स्थिति और की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी जा सकती है। हालांकि किसी मामले में अंतिम कार्रवाई संबंधित सक्षम विभाग या न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के अनुसार होगी।

घरेलू हिंसा कानून और दहेज प्रतिषेध कानून का भी सहारा

महिलाएं घरेलू हिंसा की स्थिति में घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत उपलब्ध कानूनी संरक्षण की मांग कर सकती हैं। वहीं दहेज की मांग या दहेज से संबंधित उत्पीड़न के मामलों में दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 समेत लागू आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई की मांग की जा सकती है।

मारपीट, धमकी, छेड़छाड़, यौन अपराध तथा महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले मामलों में वर्तमान में लागू भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई का विषय भी उठाया जा सकता है।

कार्यस्थल पर उत्पीड़न और बाल विवाह की शिकायत भी होगी अहम

कार्यस्थल पर किसी महिला के साथ लैंगिक उत्पीड़न की शिकायत होने पर कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत उपलब्ध शिकायत प्रक्रिया का मामला भी सामने रखा जा सकता है।

इसी तरह बाल विवाह, महिला एवं बालिका सुरक्षा, महिला कल्याण योजनाओं का लाभ न मिलना, संपत्ति एवं अधिकारों से जुड़े विवाद तथा महिलाओं के अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतें भी जनसुनवाई में प्रस्तुत की जा सकती हैं।

चिकित्सा लापरवाही के मामलों पर भी नजर

महिलाओं से जुड़े चिकित्सा एवं प्रसूति संबंधी लापरवाही के मामलों को भी शिकायत के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। इसके लिए पीड़िता या परिजन उपचार से संबंधित दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट, अस्पताल की पर्चियां, बिल, जांच रिपोर्ट और उपलब्ध अन्य साक्ष्य साथ ला सकते हैं।

आयोग की गतिविधियों के तहत महिला एवं बालिका सुरक्षा से जुड़ी संस्थाओं की व्यवस्थाओं का निरीक्षण भी किया जाता है। इनमें वन स्टॉप सेंटर, महिला चिकित्सालय, महिला बंदीगृह, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय और संरक्षण गृह जैसी संस्थाएं शामिल हो सकती हैं।

शिकायत लेकर पहुंचने वाली महिलाएं ये दस्तावेज साथ लाएं

जनसुनवाई में शिकायत रखने वाली महिलाएं अपना लिखित प्रार्थना पत्र, पहचान पत्र, एफआईआर या पुलिस शिकायत की प्रति, मेडिकल रिपोर्ट, न्यायालय संबंधी दस्तावेज, नोटिस, फोटो-वीडियो, ऑडियो अथवा अन्य उपलब्ध साक्ष्य साथ लेकर पहुंचें। इससे शिकायत से जुड़े तथ्यों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखने में सुविधा होगी।

सर्किट हाउस हरदोई में होगी जनसुनवाई

दिनांक : 25 अगस्त 2026
स्थान : सर्किट हाउस, हरदोई
समय : सुबह 11 बजे से
जनसुनवाई : राज्य महिला आयोग की सदस्य एकता सिंह

महिला आयोग का उद्देश्य महिलाओं की शिकायतों को सुनना, संबंधित विभागों और अधिकारियों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई के लिए मामले उठाना तथा महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। जनसुनवाई महिलाओं को अपनी समस्याएं सीधे आयोग की सदस्य के समक्ष रखने का अवसर प्रदान करेगी।

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