सरहद पार से सात फेरों तक: सीमाएं बंद होने के बाद खाड़ी देशों के रास्ते भारत पहुंचीं 150 पाकिस्तानी दुल्हनें

सीमाएं बंद होने के बाद 150 पाकिस्तानी दुल्हनों ने मस्कट, दुबई और दोहा होते हुए भारत पहुंचकर विवाह रचाया। गृह मंत्रालय की विशेष छूट से सफर हुआ मुमकिन।

Aug 23, 2026 - 15:07
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सरहद पार से सात फेरों तक: सीमाएं बंद होने के बाद खाड़ी देशों के रास्ते भारत पहुंचीं 150 पाकिस्तानी दुल्हनें
Pakistani Brides India Wedding
  • वाघा बॉर्डर बंद होने पर खाड़ी देशों के रास्ते भारत आईं 150 पाकिस्तानी दुल्हनें, विशेष छूट से संपन्न हुए विवाह
  • प्यार के आगे हारीं सरहदें: जमीन से रास्ता बंद हुआ तो हवाई मार्ग से भारत पहुंचीं 150 पाकिस्तानी दुल्हनें
  • क्रॉस-बॉर्डर शादियां: वाघा बॉर्डर बंद होने के बाद 150 पाकिस्तानी दुल्हनें खाड़ी देशों से फ्लाइट लेकर भारत पहुंचीं

सीमा पार सुरक्षा चिंताओं और तनावपूर्ण परिस्थितियों के चलते वाघा-अटारी जमीनी सीमा बंद होने के बावजूद मानवीय रिश्तों और वैवाहिक बंधनों ने अपनी राह निकाल ली है। पिछले कुछ महीनों के दौरान लगभग 150 पाकिस्तानी दुल्हनों ने खाड़ी और दक्षिण एशियाई देशों के जरिए कनेक्टिंग उड़ानें लेकर भारत के विभिन्न शहरों में कदम रखा और अपने वैवाहिक संकल्प को पूरा किया। गृह मंत्रालय द्वारा दी गई विशेष मानवीय छूट के बाद यह जटिल यात्रा संभव हो सकी। नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे और भोपाल जैसे शहरों में पहुंचे इन परिवारों ने सीमित समय सीमा और वीजा नियमों के कड़े दायरे में रहकर अत्यंत सादगी के साथ वैवाहिक रस्में संपन्न कराईं।

भारत और पाकिस्तान के बीच जमीनी सीमाएं बंद होने से लंबे समय से तय कई शादियां अधर में लटक गई थीं। सुरक्षा अभियान 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद वाघा-अटारी बॉर्डर चेकपोस्ट के सामान्य आवागमन के लिए बंद होने से वे परिवार सर्वाधिक प्रभावित हुए, जिनके रिश्ते सरहद के आर-पार तय हो चुके थे। सामान्य दिनों में वैध वीजा धारक नागरिक वाघा बॉर्डर पार करके आसानी से भारत आ जाते थे, किंतु सीमाएं सील होने के बाद यह विकल्प पूरी तरह समाप्त हो गया था।

इस गतिरोध के बीच केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए विशेष वीजा दिशा-निर्देशों के तहत यात्रा की अनुमति प्रदान की। इसके बाद अप्रैल से जून के बीच लगभग 150 दुल्हनें और उनके करीब 450 रिश्तेदार तीसरे देशों के रास्ते हवाई मार्ग से भारत पहुंचे। सीधी उड़ानों के अभाव में इन परिवारों को मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर जैसे अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट केंद्रों से कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेकर भारत आना पड़ा।

इस असाधारण यात्रा के पीछे कई परिवारों के लंबे इंतजार और संघर्ष की कहानियां जुड़ी हैं। लंबे समय के वीजा पर भारत में रह रहे इंकेश जशनानी की सगाई सीमा पर तनाव बढ़ने से पहले हुई थी और उनका विवाह पिछले वर्ष ही निर्धारित था। उनकी जीवनसंगिनी आरती सिंध प्रांत के खानपुर तहसील से लंबी और कठिन यात्रा तय करके मई 2025 में वाघा सीमा से महज एक किलोमीटर की दूरी तक पहुंच चुकी थीं, किंतु ठीक उसी समय सुरक्षा कारणों से अटारी द्वार को बंद कर दिया गया और उन्हें वापस लौटना पड़ा।

लगभग एक वर्ष से अधिक के मानसिक तनाव और अनिश्चितता के बाद आरती को मस्कट के रास्ते नागपुर पहुंचने का वीजा मिला, जहां उनका विवाह संपन्न हुआ। हालांकि सख्त वीजा नियमों और सीमित परमिट के कारण विवाह में केवल उनके भाई ही शामिल हो सके, जबकि माता-पिता को पाकिस्तान में ही रुकना पड़ा। इसी तरह सिंध प्रांत के घोटकी निवासी राभेल जसवाणी भी विशेष अनुमति मिलने के बाद अपने माता-पिता के साथ नागपुर पहुंचे और स्थानीय युवती श्रिया के साथ विवाह सूत्र में बंधे। राभेल अब कानूनी प्रक्रियाओं के तहत भारत में ही स्थायी रूप से बसने की योजना बना रहे हैं।

सरहद पार से भारत पहुंची नवविवाहिताओं और उनके परिजनों ने इस यात्रा को राहत और भावुकता का मिला-जुला अनुभव बताया है। नवविवाहिता आरती ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि एक साल से अधिक का इंतजार बेहद पीड़ादायक था और अंततः विवाह संपन्न होना एक सपने के सच होने जैसा है, यद्यपि माता-पिता की अनुपस्थिति मन में एक टीस छोड़ गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच हालात सामान्य होंगे ताकि वे जल्द अपने परिवार से दोबारा मिल सकें।

वहीं भारत में बसने का मन बना चुके राभेल जसवाणी का कहना है कि विपरीत परिस्थितियों में भी दोनों पक्षों के परिवारों ने धैर्य बनाए रखा। उन्होंने कहा कि उनका ध्येय अब नियमानुसार भारतीय नागरिकता से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करना और भविष्य में स्थिति अनुकूल होने पर अपने माता-पिता को भी स्थायी रूप से यहां लाना है। वैवाहिक आयोजनों में शामिल स्थानीय रिश्तेदारों ने भी गृह मंत्रालय द्वारा दी गई समयबद्ध अनुमति के प्रति आभार व्यक्त किया।

हवाई मार्ग से हुई इन शादियों ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक जटिलताओं के बीच पारिवारिक और सांस्कृतिक संपर्कों की निरंतरता को रेखांकित किया है। जमीनी रास्ता बंद होने के कारण परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा, क्योंकि खाड़ी देशों के जरिए हवाई यात्रा करना सामान्य सड़क मार्ग की तुलना में कई गुना अधिक खर्चीला साबित हुआ। इसके अलावा वीजा की अल्पकालिक वैधता के चलते पारंपरिक भव्य आयोजनों के स्थान पर बेहद सादे और संक्षिप्त पारिवारिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

इस घटनाक्रम ने यह भी स्पष्ट किया है कि सख्त कूटनीतिक और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बावजूद मानवीय व वैवाहिक मामलों में प्रशासनिक स्तर पर लचीलापन बनाए रखना संभव है। मध्य भारत और पश्चिमी भारत के सिंधी व अन्य सीमांत समुदायों में इन विवाहों के संपन्न होने से सामाजिक स्तर पर गहरा संतोष देखा गया है।

भारत पहुंचे इन नवविवाहित जोड़ों के लिए अगला कदम दीर्घकालिक वीजा (एलटीवी) और वैधानिक नागरिकता प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। संबंधित जिला प्रशासन और विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) के स्तर पर इन विदेशी नागरिकों के दस्तावेजों का सत्यापन और वीजा विस्तार की कार्यवाही नियमों के तहत की जाएगी। वहीं दोनों देशों के बीच सामान्य आवागमन और जमीनी सीमाओं को दोबारा खोले जाने को लेकर भविष्य की कूटनीतिक वार्ताओं और सुरक्षा समीक्षा पर नजरें टिकी रहेंगी।

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