Sambhal News: दहेज प्रथा के खिलाफ जंग, हकीम सुबहान ने बिना दहेज शादी कर पेश की मिसाल, कानून सख्त करने की मांग
Sambhal Dowry Campaign: सम्भल के समाजसेवी हकीम सुबहान ने दहेज प्रथा के खिलाफ अनोखी मुहिम छेड़ी है। उन्होंने बिना दहेज निकाह कर समाज में बड़ी मिसाल पेश की।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में दहेज प्रथा के खिलाफ लंबे समय से मुहिम चला रहे समाजसेवी और हकीम सुबहान ने दहेज को समाज की सबसे बड़ी बुराइयों में से एक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि कई अपराधों और पारिवारिक त्रासदियों की जड़ है। उन्होंने दावा किया कि उनकी मुहिम को उम्मीद से कहीं ज्यादा समर्थन मिला है और सभी धर्मों व समाज के लोगों ने इसे खुलकर स्वीकार किया है।
हकीम सुबहान ने बताया कि बचपन से ही उन्होंने दहेज के कारण परिवारों को बिखरते देखा। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दहेज के दबाव में एक बुजुर्ग पिता को जहर खाकर आत्महत्या करते उन्होंने अपनी आंखों से देखा, जिसने उन्हें इस लड़ाई के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार दहेज की वजह से गरीब परिवार अपनी बेटियों की शादी नहीं कर पाते, जिससे कई बेटियां मानसिक और शारीरिक परेशानियों का शिकार हो जाती हैं, जबकि कुछ मजबूरी में घर छोड़ने तक को विवश हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि दहेज के कारण कई परिवार बेटियों की शादी के लिए बच्चों की पढ़ाई और कारोबार तक छोड़ देते हैं।
सरकार से मांग करते हुए उन्होंने कहा कि दहेज निषेध कानून का सख्ती से पालन कराया जाए और दहेज मांगने या लेने वालों को ऐसी सजा मिले, जिससे समाज में नजीर कायम हो। हकीम सुबहान ने साफ कहा कि "दहेज देना मजबूरी हो सकता है, लेकिन दहेज लेना कभी मजबूरी नहीं हो सकता।" उन्होंने दहेज लेने वालों के साथ-साथ समाज के प्रभावशाली और धार्मिक लोगों को भी जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उन्हें इस बुराई के खिलाफ खुलकर आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद बिना दहेज शादी कर समाज के सामने उदाहरण पेश किया और संकल्प लिया कि कभी किसी बेटी पर दहेज का बोझ नहीं डालेंगे। उनका कहना है कि दहेज के खिलाफ यह मुहिम अब उनकी जिंदगी का मिशन बन चुकी है।
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