IAS Rinku Singh Controversy: जालौन में ब्लॉक प्रमुख से विवाद के बाद हटाए गए, जानें पूरा मामला
यूपी के जालौन में ब्लॉक प्रमुख से विवाद के बाद IAS अधिकारी रिंकू सिंह को SDM पद से हटा दिया गया है। जानें क्या है पूरा मामला और प्रशासनिक हलचल।
- यूपी में प्रशासनिक फेरबदल: IAS अधिकारी रिंकू सिंह विवाद के बाद SDM पद से हटाए गए
- यूपी के इस चर्चित IAS अधिकारी पर फिर गिरी गाज, ब्लॉक प्रमुख से विवाद के बाद हटाए गए
- बड़ी खबर: जालौन में ब्लॉक प्रमुख से तकरार के बाद IAS रिंकू सिंह का ट्रांसफर, SDM पद से हटाए गए
उत्तर प्रदेश के जालौन जिले से एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है, जहां अपनी कार्यशैली को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले आईएएस (IAS) अधिकारी रिंकू सिंह एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। जालौन में स्थानीय ब्लॉक प्रमुख के साथ तीखी बहस और बढ़ते विवाद के बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रिंकू सिंह को उनके उपजिलाधिकारी (SDM) पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई बुधवार को दोनों पक्षों के बीच हुए हाई-प्रोफाइल विवाद के बाद जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर की गई है। इस बड़े फैसले के बाद प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक में हलचल तेज हो गई है। शासन स्तर पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है और रिंकू सिंह के आगामी पदस्थापन को लेकर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।
उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह को जालौन जिले में तैनाती के दौरान एक स्थानीय जनप्रतिनिधि के साथ टकराव का खामियाजा भुगतना पड़ा है। जिला मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, एक सरकारी कार्य योजना की समीक्षा और बैठकों के सिलसिले के दौरान आईएएस रिंकू सिंह और स्थानीय ब्लॉक प्रमुख के बीच किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई। देखते ही देखते यह बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के बीच गतिरोध की स्थिति पैदा हो गई। मामला शासन स्तर तक पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई करते हुए रिंकू सिंह को तत्काल प्रभाव से एसडीएम पद से कार्यमुक्त कर दिया गया है।
जालौन के विकास खंड कार्यालय में क्षेत्र के विकास कार्यों और लंबित परियोजनाओं को लेकर एक आधिकारिक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में उपजिलाधिकारी के रूप में आईएएस रिंकू सिंह और क्षेत्र के ब्लॉक प्रमुख के साथ-साथ अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक कर्मचारी उपस्थित थे।
प्रत्यक्षदर्शियों और विभागीय सूत्रों के मुताबिक, किसी विशेष विकास कार्य की फाइलों की मंजूरी और कार्यशैली को लेकर आईएएस अधिकारी और ब्लॉक प्रमुख के बीच असहमति शुरू हुई। बात बढ़ने पर दोनों के बीच तीखी बहस हो गई। ब्लॉक प्रमुख का आरोप था कि अधिकारी का व्यवहार जनप्रतिनिधियों के प्रति सहयोगात्मक नहीं था, जबकि प्रशासनिक पक्ष का कहना था कि नियमों के दायरे में रहकर ही काम किया जा रहा था। बैठक में मौजूद अन्य लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन विवाद शांत नहीं हुआ। इसके बाद ब्लॉक प्रमुख और उनके समर्थकों ने इस व्यवहार के खिलाफ नाराजगी जताई और मामले की शिकायत जिलाधिकारी सहित शासन के उच्च अधिकारियों से कर दी।
इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही पक्षों से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। शिकायतकर्ता ब्लॉक प्रमुख के खेमे का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का सम्मान सर्वोपरि है और अधिकारियों को मर्यादा के भीतर रहकर जनता की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने शासन द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई का स्वागत किया है।
दूसरी ओर, आईएएस रिंकू सिंह के पक्ष या आधिकारिक बयान का अभी इंतजार किया जा रहा है। हालांकि, उनके करीबी प्रशासनिक सूत्रों का तर्क है कि अधिकारी केवल सरकारी नियमों और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे थे, जिसके कारण कुछ स्थानीय निहित स्वार्थों को असुविधा हुई। जिला प्रशासन ने इस मामले पर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा है कि यह कदम कानून-व्यवस्था और सुचारू प्रशासनिक कामकाज को बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
इस प्रशासनिक फेरबदल का जालौन और आसपास के जिलों की राजनीति पर गहरा असर देखने को मिल रहा है। आईएएस अधिकारी को हटाए जाने के बाद नौकरशाही और स्थानीय नेताओं के बीच के संबंध एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। इस घटना ने एक बार फिर कार्यपालिका और विधायिका (जनप्रतिनिधियों) के बीच समन्वय की कमी को उजागर किया है। जिले के अन्य अधिकारी अब स्थानीय राजनीतिक दबाव और अपनी कार्यशैली को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं। इसके साथ ही, इस विवाद के कारण क्षेत्र के कई विकास कार्य और प्रशासनिक फाइलें फिलहाल अधर में लटक गई हैं।
आईएएस रिंकू सिंह को एसडीएम पद से हटाए जाने के बाद फिलहाल जिला मुख्यालय से संबद्ध किए जाने की चर्चा है। शासन स्तर पर इस पूरे विवाद की एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को इस मामले की आंतरिक जांच सौंपी जा सकती है, जो दोनों पक्षों के बयानों और मौके पर मौजूद गवाहों के आधार पर अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही रिंकू सिंह को किसी नए विभाग या पद पर नई जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। तब तक जालौन में प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए किसी अन्य अधिकारी को इस पद का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जा रहा है।
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