Shamli Ayush Malik Ghar Wapsi: शामली में व्यवसायी के बेटे आयुष मलिक ने की सनातन धर्म में वापसी, कुछ दिन पहले बने थे मोहम्मद अली
Shamli Ayush Malik Ghar Wapsi: शामली के व्यवसायी देवराज मलिक के बेटे आयुष मलिक ने दोबारा हिंदू धर्म अपना लिया है। कुछ हफ्ते पहले उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाया था।
- Ghar Wapsi in Shamli: इस्लाम अपनाने वाले आयुष मलिक की हिंदू धर्म में वापसी, वीडियो जारी कर कहा- परिवार की खातिर लिया फैसला
- शामली में बड़ा उलटफेर: मोहम्मद अली बने आयुष मलिक ने की घर वापसी, सामने आया पूजा करते हुए वीडियो
- Shamli Religious Update: शामली के आयुष मलिक की सनातन धर्म में वापसी, स्वेच्छा से घर वापसी का वीडियो आया सामने
उत्तर प्रदेश के शामली जिले से एक बड़ा सामाजिक और धार्मिक घटनाक्रम सामने आया है। यहाँ के प्रतिष्ठित फार्मास्युटिकल व्यवसायी देवराज मलिक के 30 वर्षीय इकलौते बेटे आयुष मलिक ने एक बार फिर सनातन धर्म में वापसी कर ली है। जून 2026 के आखिरी हफ्ते में आयुष के परिवार द्वारा एक वीडियो जारी किया गया, जिसमें वे अपने घर पर पारंपरिक रीति-रिवाज से पूजा-अर्चना करते और अपनी माता के समक्ष एक लिखित बयान पढ़ते नजर आ रहे हैं। बता दें कि कुछ हफ्ते पहले ही आयुष ने सार्वजनिक रूप से इस्लाम धर्म अपनाकर अपना नाम मोहम्मद अली रख लिया था। अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे अपने माता-पिता के संरक्षण और आशीर्वाद के साथ रहना चाहते हैं।
यह मामला शामली के एक जाने-माने कारोबारी परिवार से जुड़ा है, जो पिछले कुछ हफ्तों से चर्चा के केंद्र में था। आयुष मलिक, जिन्होंने अपनी मर्जी से कुछ समय पहले दूसरा धर्म अपना लिया था, अब अपने पैतृक घर लौट आए हैं। उनके द्वारा जारी किए गए वीडियो संदेश में वे घर पर धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बनते दिखाई दे रहे हैं। इस कदम को स्थानीय स्तर पर 'घर वापसी' के रूप में देखा जा रहा है। आयुष ने साफ किया है कि उन्होंने यह फैसला किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि अपने परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों और माता-पिता की मानसिक पीड़ा को भांपते हुए पूरी तरह अपनी स्वेच्छा से लिया है।
घटनाक्रम की शुरुआत कुछ हफ्ते पहले हुई थी जब 30 वर्षीय आयुष मलिक ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि वे इस्लाम धर्म को स्वीकार कर रहे हैं और अब से उनका नया नाम मोहम्मद अली होगा। इस फैसले के बाद उनके परिवार और स्थानीय व्यापारिक समुदाय में काफी हलचल मच गई थी। इकलौते बेटे के इस निर्णय से माता-पिता गहरे सदमे में थे।
हालांकि, यह स्थिति ज्यादा दिनों तक नहीं रही। मंगलवार को परिवार द्वारा साझा किए गए दृश्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। वीडियो में आयुष अपने घर के पूजा स्थल पर बैठे नजर आ रहे हैं। वे अपनी मां के सामने खड़े होकर एक पत्र पढ़ रहे हैं, जिसमें उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ समय से परिवार जिस मानसिक कष्ट और पीड़ा से गुजर रहा था, उसे देखते हुए उन्होंने यह पुनर्विचार किया है। उन्होंने यह भी दोहराया कि माता-पिता के प्रति उनका प्रेम सर्वोपरि है और वे अपने पुराने स्वरूप में लौटकर खुश हैं।
इस मामले में आयुष मलिक के पिता देवराज मलिक ने राहत की सांस लेते हुए कहा, "एक माता-पिता के तौर पर हमारे लिए यह बेहद भावुक क्षण है। हर परिवार चाहता है कि उनका बच्चा उनके साथ और उनकी परंपराओं के साथ रहे। हम आयुष के इस फैसले का स्वागत करते हैं और खुश हैं कि हमारा बेटा वापस अपने घर और अपनी संस्कृति में लौट आया है।"
वहीं स्थानीय सामाजिक संगठनों और व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों ने भी इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह एक पारिवारिक और व्यक्तिगत निर्णय है और इसे शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया है, जो कि अच्छी बात है।
शामली के इस व्यवसायी परिवार के भीतर आए इस मोड़ का स्थानीय समाज पर भी असर देखा जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इस इलाके में संवेदनशील मुद्दों पर अक्सर तनाव की स्थिति बन जाती है, लेकिन इस मामले में जिस तरह से परिवार ने खुद ही वीडियो जारी कर स्थिति को स्पष्ट किया है, उससे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर पूरी तरह से विराम लग गया है। इस घटना ने यह भी दिखाया है कि पारिवारिक संवाद और अपनों का जुड़ाव किसी भी अन्य निर्णय पर भारी पड़ सकता है।
सनातन धर्म में वापसी की इस औपचारिक प्रक्रिया के बाद आयुष मलिक अब अपने परिवार के साथ ही रहकर पिता के फार्मास्युटिकल व्यवसाय को संभालने की योजना बना रहे हैं। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में किसी भी तरह के कानूनी नाम परिवर्तन या दस्तावेजों में सुधार की आवश्यकता होने पर विधिक सलाह ली जाएगी। फिलहाल, परिवार सभी विवादों को पीछे छोड़कर अपने सामान्य जीवन और कामकाज की ओर लौटने का प्रयास कर रहा है।
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