Trending: अहमदाबाद विमान हादसा- 20 मिनट ने बचाई कोटा के मयंक सेन की जान, पांच दोस्तों की दुखद मौत। 

जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर कभी-कभी कुछ मिनटों का होता है, और यह सत्य कोटा के दीगोद निवासी मयंक सेन के साथ...

By INA News Desk
Jun 14, 2025 - 15:13
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Trending: अहमदाबाद विमान हादसा- 20 मिनट ने बचाई कोटा के मयंक सेन की जान, पांच दोस्तों की दुखद मौत। 
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अहमदाबाद/कोटा : जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर कभी-कभी कुछ मिनटों का होता है, और यह सत्य कोटा के दीगोद निवासी मयंक सेन के साथ अहमदाबाद में हुए भीषण विमान हादसे में साकार हुआ। 12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 के दुर्घटनाग्रस्त होने से मेघानीनगर के बीजे मेडिकल कॉलेज परिसर में भारी तबाही मची, जिसमें 270 लोगों की जान चली गई। इस हादसे में मयंक, जो बीजे मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के तीसरे वर्ष के छात्र हैं, चमत्कारिक रूप से बच गए, क्योंकि वे हादसे से ठीक 20 मिनट पहले हॉस्टल की मेस से बाहर निकल चुके थे। हालांकि, इस त्रासदी ने उनके रूममेट समेत पांच करीबी दोस्तों को छीन लिया। हादसे के बाद, मयंक ने घायलों की मदद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अब अपने जीवित बचे दोस्तों के इलाज में सहायता कर रहे हैं।

12 जून 2025 को दोपहर 1:38 बजे, एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171, एक बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर, अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लंदन के गैटविक हवाई अड्डे के लिए उड़ान भरी। विमान में 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर सवार थे, जिसमें दो अनुभवी पायलट, कैप्टन सुमीत सभरवाल और फर्स्ट ऑफिसर क्लाइव कुंदर, शामिल थे। टेकऑफ के मात्र 30 सेकंड बाद, विमान केवल 625 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सका और मेघानीनगर के बीजे मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल और मेस की इमारत से टकरा गया। टक्कर के बाद विमान में आग लग गई, और सवा लाख लीटर ईंधन के कारण आग की तीव्रता इतनी थी कि चारों ओर काला धुआं और चीख-पुकार मच गई।

हादसे में विमान में सवार 241 लोगों की मौत हो गई, जिसमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, बांसवाड़ा के एक परिवार के पांच सदस्य, और मणिपुर की 22 वर्षीय फ्लाइट अटेंडेंट नगंथोई शर्मा शामिल थे। इसके अलावा, हॉस्टल में मौजूद कम से कम 10 लोग, जिनमें पांच मेडिकल छात्र, एक पीजी रेजिडेंट डॉक्टर, और एक सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टर की पत्नी शामिल थे, मारे गए। 50 से अधिक मेडिकल छात्र घायल हुए, जिनका इलाज सिविल अस्पताल में चल रहा है। एकमात्र जीवित बचे यात्री, 40 वर्षीय ब्रिटिश नागरिक विश्वास कुमार रमेश, सीट 11A पर बैठे थे और आपातकालीन निकास द्वार के पास होने के कारण बच निकले।

  • मयंक सेन की चमत्कारी कहानी

मयंक सेन, कोटा के दीगोद के रहने वाले 21 वर्षीय एमबीबीएस छात्र, उस दिन बीजे मेडिकल कॉलेज की मेस में अपने दोस्तों के साथ दोपहर का भोजन कर रहे थे। उन्होंने न्यूजटक को बताया, "मैं 12:44 बजे मेस में खाना खाने गया था। करीब 20 मिनट में खाना खाकर मैं 1:00 बजे मेस से निकला और अपने हॉस्टल के कमरे में पहुंचा। ठीक 1:38 बजे मैंने एक तेज धमाका सुना। बाहर देखा तो धुआं और आग की लपटें दिखीं। मैं तुरंत वापस मेस की ओर दौड़ा, लेकिन वहां का दृश्य दिल दहलाने वाला था।" मयंक ने बताया कि मेस, जहां वे कुछ ही मिनट पहले थे, पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुकी थी।

हादसे में मयंक के रूममेट और चार अन्य करीबी दोस्तों जयप्रकाश (धोरीमन्ना), रीना (सूरत), हितेश (वडोदरा), काजल (अहमदाबाद), और प्रतीक (जयपुर) की मौत हो गई। मयंक ने कांपती आवाज में कहा, "मेरे दोस्त मेस में खाना खा रहे थे। अगर मैं 20 मिनट और रुक जाता, तो शायद मैं भी नहीं बचता।"

  • मयंक का साहस और मानवता

हादसे के तुरंत बाद, मयंक ने अपनी सदमे की स्थिति को दरकिनार करते हुए बचाव कार्य में हिस्सा लिया। उन्होंने मलबे से घायल लोगों को निकालने में मदद की और कई मेडिकल छात्रों को सिविल अस्पताल पहुंचाया। मयंक ने बताया, "मैंने अपने दोस्तों को मलबे में देखा, लेकिन कुछ भी नहीं कर सका। फिर भी, मैंने सोचा कि जिन्हें बचाया जा सकता है, उनकी मदद करनी चाहिए।" मयंक अब अपने घायल दोस्तों के इलाज में सहायता कर रहे हैं, जिसमें अस्पताल में भर्ती 20 मेडिकल छात्रों के लिए दवाइयां और अन्य जरूरी सामान जुटाना शामिल है। उनकी इस मानवता की स्थानीय समुदाय और सोशल मीडिया पर खूब सराहना हो रही है।

हादसे से डेढ़ घंटे पहले उसी विमान से लंदन से अहमदाबाद पहुंचीं हिनाबेन कालरिया ने दावा किया कि लैंडिंग के दौरान विमान से खड़खड़ाहट की अजीब आवाजें आ रही थीं। उन्होंने कहा, "एयर कंडीशनिंग सिस्टम और सीटों की डिस्प्ले स्क्रीन काम नहीं कर रही थीं। हमने क्रू को बताया, लेकिन हमें आश्वासन दिया गया कि सब ठीक है।" यह बयान विमान के रखरखाव और प्री-फ्लाइट जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाता है।

13 जून को, एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने मलबे से ब्लैक बॉक्स बरामद किया, जिसमें फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में टेकऑफ के दौरान कॉन्फिगरेशन एरर, जैसे गलत फ्लैप सेटिंग या अपर्याप्त इंजन थ्रस्ट, को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, "हमने एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की है, जो हादसे के कारणों की जांच करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सिफारिशें देगी।"

हादसे के बाद, एनडीआरएफ, बीएसएफ, सीआरपीएफ, और रैपिड एक्शन फोर्स की टीमें तुरंत बचाव कार्य में जुट गईं। अहमदाबाद, वडोदरा, और सूरत से 60 फायर वाहन और 20 वाटर बोउजर्स आग बुझाने में लगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "विमान में 1,25,000 लीटर ईंधन होने के कारण आग इतनी भीषण थी कि प्रभाव से बचे लोगों को बचाना असंभव था।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 जून को घटनास्थल का दौरा किया और सिविल अस्पताल में विश्वास कुमार रमेश और घायल मेडिकल छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने ट्वीट कर कहा, "अहमदाबाद विमान हादसे में घायलों से मिला और एकमात्र बचे यात्री को आश्वासन दिया कि हम इस कठिन समय में उनके साथ हैं।" टाटा समूह ने मृतकों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और घायलों के इलाज का खर्च वहन करने की घोषणा की।

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मयंक की कहानी ने न केवल कोटा, बल्कि पूरे देश में लोगों को भावुक कर दिया। उनके परिवार ने इसे "चमत्कार" बताया, लेकिन दोस्तों के नुकसान ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया। मयंक के पिता, रमेश सेन, ने कहा, "मयंक की जान बच गई, लेकिन उसके दोस्तों का जाना हमें तोड़ गया। वह अब भी अपने घायल दोस्तों की मदद कर रहा है, जो उसकी मानवता को दर्शाता है।"

सोशल मीडिया पर मयंक की कहानी वायरल हो रही है। @NDTV_Rajasthan ने ट्वीट किया, "बाल-बाल बची कोटा के मयंक की जान, 20 मिनट पहले ही मेस बिल्डिंग से आया था बाहर।" @GoodNewsToday ने लिखा, "मयंक ने मौत को करीब से देखा, लेकिन उनके साहस ने कई जिंदगियां बचाईं।"

अहमदाबाद विमान हादसा एक ऐसी त्रासदी है, जिसने सैकड़ों परिवारों को तोड़ दिया, लेकिन मयंक सेन की कहानी जीवन की अनिश्चितता और मानवता की ताकत को दर्शाती है। 20 मिनट के अंतर ने उनकी जान बचाई, लेकिन उनके दोस्तों की मौत ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया। उनकी मदद करने की भावना और साहस इस दुखद घटना में एक प्रेरणा है।

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