Kerala Government: ज्ञानेश कुमार मामले में जांच पर विवाद के बाद केरल सरकार का रुख साफ, गृह विभाग ने दी स्थिति पर सफाई

केरल कैडर के पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और वर्तमान निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े पुराने प्रशासनिक मामले में जांच के आदेश की खबरों के बाद राज्य सरकार ने रुख स्पष्ट किया।

By INA News Desk
Oct 4, 2026 - 16:27
5 Views
Kerala Government: ज्ञानेश कुमार मामले में जांच पर विवाद के बाद केरल सरकार का रुख साफ, गृह विभाग ने दी स्थिति पर सफाई

केरल कैडर के 1988 बैच के पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी और भारत निर्वाचन आयोग के वर्तमान आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राज्य के सतर्कता विभाग द्वारा पुरानी जांच को लेकर आई खबरों के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में विवाद गहरा गया है। इस पूरे घटनाक्रम में राज्य के गृह विभाग और सरकार के शीर्ष स्तर से यह स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ कोई दुर्भावनापूर्ण या असंगत कार्रवाई नहीं की जा रही है, बल्कि यह एक पुरानी फाइल और प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था।

केरल में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन स्वयं गृह विभाग का प्रभार संभालते हैं। ऐसे में जब यह बात सामने आई कि राज्य सरकार ने ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल से जुड़ी एक पुरानी शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच की अनुमति दी है, तो इस पर राष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े होने लगे। मुख्य विपक्षी दलों और प्रशासनिक विशेषज्ञों ने एक मौजूदा निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ राज्य स्तर पर जांच के अधिकार और उसकी समय-सारणी को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद गृह विभाग से जुड़े अधिकारियों और सरकार के प्रतिनिधियों ने सामने आकर स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया।

क्या है जांच से जुड़ा पूरा संदर्भ?

यह पूरा मामला ज्ञानेश कुमार के केरल में पदस्थापन के दौरान का बताया जा रहा है, जब वे राज्य में कई महत्वपूर्ण विभागों में शीर्ष पदों पर कार्यरत थे। शिकायतों में उस समय लिए गए कुछ प्रशासनिक निर्णयों और वित्तीय मंजूरियों को लेकर सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) में याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

सतर्कता नियमों के अनुसार, जब भी किसी उच्चाधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कोई शिकायत आती है, तो संबंधित सक्षम प्राधिकारी (सरकार) से प्रारंभिक जांच (Preliminary Inquiry) के लिए अनुमति मांगी जाती है। इसी प्रक्रियात्मक क्रम में संबंधित फाइल आगे बढ़ी थी। हालांकि, जैसे ही यह खबर सार्वजनिक हुई कि केंद्र सरकार में सहकारिता और संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव पद से सेवानिवृत्त होने के बाद चुनाव आयोग में नियुक्त हुए ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच शुरू हो रही है, मामला कानूनी और संवैधानिक मर्यादाओं के घेरे में आ गया।

गृह विभाग और सरकार का आधिकारिक पक्ष

मामले के तूल पकड़ने पर केरल सरकार की ओर से यह साफ किया गया कि सतर्कता विभाग के पास आई शिकायतों का निस्तारण एक नियमित प्रशासनिक रूटीन के तहत होता है। सरकार का यह इरादा कतई नहीं है कि केंद्र के किसी संवैधानिक आयोग के सदस्य को अनुचित रूप से निशाना बनाया जाए या उनकी छवि को धूमिल किया जाए।

गृह विभाग के सूत्रों के अनुसार, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत किसी भी लोकसेवक के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले पूर्वानुमति आवश्यक होती है। यदि कोई शिकायत वर्षों पुरानी है और अधिकारी अब केंद्र के अधीन या संवैधानिक पद पर है, तो उसके लिए विधिक परामर्श लिया जाता है। सरकार के प्रतिनिधियों ने कहा कि फाइल पर की गई कोई भी टिप्पणी केवल विभागीय प्रक्रिया को दर्शाती है, न कि किसी पूर्वाग्रह से प्रेरित अंतिम निष्कर्ष को। विधिक विशेषज्ञों से राय लेने के बाद यह भी जांचा जा रहा है कि क्या वर्तमान परिस्थितियों में इस प्रकार की जांच का कोई कानूनी औचित्य बनता है या नहीं।

संवैधानिक पदों की सुरक्षा और कानूनी पहलू

ज्ञानेश कुमार को मार्च 2024 में देश के निर्वाचन आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया था। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत भारत निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था है। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को प्रशासनिक दबावों से मुक्त रखने के लिए विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त है।

विधिक जानकारों का मानना है कि किसी राज्य सरकार की सतर्कता एजेंसी द्वारा केंद्र के किसी सेवारत संवैधानिक पदाधिकारी के खिलाफ बिना केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) या सक्षम संवैधानिक प्राधिकार की सहमति के सीधे जांच आगे बढ़ाना जटिल कानूनी प्रश्न खड़े करता है। इसी कारण केरल सरकार को मामले में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।

प्रशासनिक गलियारों में प्रतिक्रिया

इस मामले के सामने आने के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में भी बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं के अधिकारियों पर दबाव बनाने या असहज करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। वहीं, सत्ता पक्ष से जुड़े प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है, लेकिन सरकार किसी भी दुर्भावना से रहित होकर केवल स्थापित नियमों और कानूनी परामर्श के आधार पर ही निर्णय लेती है।

कुल मिलाकर, केरल सरकार ने यह जताने का प्रयास किया है कि प्रशासनिक स्तर पर चली फाइलों को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए और पूरे मामले को कानूनी दायरे में ही देखा जाना चाहिए।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow