बांसकार समाज के सम्मान और आर्थिक उत्थान के लिए सरकार प्रतिबद्ध: उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य
लखनऊ के विश्वेश्वरैया सभागार में बांसकार समाज महासम्मेलन को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पारंपरिक शिल्प के आर्थिक उत्थान पर जोर दिया।
राजधानी लखनऊ स्थित विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित बांसकार समाज (धरकार, बांसफोड़, बसोर) के विशाल प्रांतीय महासम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि समाज के सभी वंचित, उपेक्षित और श्रमजीवी वर्गों के सर्वांगीण विकास के लिए केंद्र व राज्य सरकार पूरी निष्ठा से जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार की नीतियों का मूल आधार 'सबका साथ, सबका विकास' है, जिसमें किसी भी जाति या वर्ग के साथ भेदभाव किए बिना हर नागरिक की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। सभागार में जुटी भारी संख्या इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि परंपरागत शिल्पी समाज अब अपने अधिकारों, स्वाभिमान और आर्थिक आत्मनिर्भरता के प्रति पूरी तरह सजग हो चुका है।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि वे स्वयं ग्रामीण पृष्ठभूमि और अभावों के बीच पले-बढ़े हैं, इसलिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की कठिनाइयों और दैनिक संघर्ष को भलीभांति समझते हैं। बरसात में कच्चे मकान की टपकती छत और प्लास्टिक-छप्पर के सहारे जीवन व्यतीत करने का उनका व्यक्तिगत अनुभव ही आज कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने के संकल्प को शक्ति देता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के तौर पर कार्य करते हुए उन्होंने सदैव वर्ग भेद से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता और बंधुत्व की भावना को अपने जीवन में उतारा है।
बांसकार समाज कल्याण एवं शिल्प उत्थान के प्रमुख बिंदु
| प्रमुख पहलू | सरकारी रणनीति एवं नीतिगत संकल्प |
| पारंपरिक हुनर का संवर्धन | बांस शिल्प कला को आधुनिक तकनीक, नए डिजाइन और बड़े बाजारों से जोड़ना |
| सामाजिक समरसता व सम्मान | कुंभ 2019 में सफाई कर्मियों के चरण वंदन जैसा भेदभावरहित समाज का निर्माण |
| स्वच्छता में जनसहभागिता | सफाई को केवल कर्मचारियों का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व बनाना |
| आर्थिक स्वावलंबन | सरकारी वित्तीय योजनाओं, कौशल प्रशिक्षण और सीधे ऋण से कारीगरों को सशक्त करना |
उप मुख्यमंत्री ने प्रयागराज कुंभ के ऐतिहासिक क्षण का स्मरण कराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुंभ में पांच सफाई कर्मचारियों के चरण धोकर पूरे देश को यह स्पष्ट संदेश दिया था कि समाज में कोई भी व्यक्ति अछूत नहीं है और प्रत्येक श्रम का अपना सर्वोच्च सम्मान होता है। यह प्रसंग केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक समता की एक अमिट मिसाल है।

उन्होंने स्वच्छता को एक व्यापक जनआंदोलन बताते हुए कहा कि यह केवल सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक नागरिक का नैतिक व सामाजिक दायित्व है। प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के पच्चीस वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पूरे देश में सेवा, सुशासन और स्वच्छता से जुड़े कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

पारंपरिक बांस शिल्पकला के आर्थिक महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस समुदाय के परिवारों के हुनर को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप तराशने के लिए सरकार प्रशिक्षण, टूलकिट और बाजार संपर्क के अवसर उपलब्ध करा रही है। उन्होंने समुदाय के वरिष्ठजनों और युवाओं से अपील की कि वे अपने पैतृक हुनर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर इसे बड़े उद्योग का स्वरूप दें, जिससे उनकी आय में कई गुना वृद्धि हो सके।

महासम्मेलन में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, विधान परिषद सदस्य डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल, असम राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ बांसफोड़, मध्य प्रदेश बांस शिल्प कला बोर्ड के अध्यक्ष व पूर्व विधायक घनश्याम पिरोनिया सहित समाज के कई प्रतिष्ठित प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में शिल्पकार उपस्थित रहे।
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