लखनऊ के जीजीआईसी गोमती नगर में पाक्सो कानून पर जागरूकता शिविर: छात्राओं को बताए गए अधिकार
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गोमती नगर में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने जागरूकता शिविर लगाया। न्यायिक अधिकारियों ने छात्राओं को पाक्सो कानून समझाया।
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में लखनऊ स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, गोमती नगर में एक विशेष विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राधिकरण की सदस्य सचिव मनु कालिया ने की। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य छात्राओं को लैंगिक अपराधों से बच्चों के संरक्षण से जुड़े कानून (पाक्सो एक्ट) की बारीकियों से परिचित कराना, उन्हें अपने कानूनी अधिकारों के प्रति सजग बनाना और एक सुरक्षित वातावरण तैयार करना रहा। शिविर में प्राधिकरण के सचिव संतोष कुमार, विशेष कार्याधिकारी विनय सिंह, उप सचिव शालिन मिश्रा, कॉलेज की प्रधानाचार्या पूनम नौटियाल, शिक्षिकाएं और पराविधिक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
शिविर को संबोधित करते हुए सदस्य सचिव मनु कालिया ने छात्राओं को अत्यंत सहज और सरल भाषा में 'गुड टच और बैड टच' के अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की असहज, अवांछित या अप्रिय स्थिति का सामना होने पर छात्राओं को संकोच या भय में रहने के बजाय तुरंत आवाज उठानी चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में छात्राएं बिना किसी झिझक के अपने माता-पिता, शिक्षकों अथवा सीधे सुरक्षा अधिकारियों और विधिक मंचों पर शिकायत दर्ज करा सकती हैं। उन्होंने अपने अनुभवों और विभिन्न न्यायिक दृष्टांतों को साझा करते हुए छात्राओं में आत्मविश्वास जगाया और उन्हें जीवन में निर्भीक होकर आगे बढ़ने की सीख दी।

विशेष कार्याधिकारी विनय सिंह ने पाक्सो कानून के प्रमुख कानूनी प्रावधानों, बच्चों को मिलने वाले विशेष सुरक्षात्मक अधिकारों और महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानून के तहत अपराध करने वालों के खिलाफ अत्यंत सख्त कानूनी परिणामों का प्रावधान है। वहीं सचिव संतोष कुमार ने कहा कि कानूनी अधिकारों की बुनियादी समझ हर बच्चे के लिए सुरक्षा ढाल का कार्य करती है। जागरूकता के अभाव में कई बार बच्चे उत्पीड़न का शिकार होते हुए भी डर या लोकलाज के कारण चुप्पी साध लेते हैं। ऐसे शिविरों का लक्ष्य बच्चों के मन से भय को दूर कर उन्हें सशक्त बनाना है। कार्यक्रम में आपातकालीन सुरक्षा के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 और निशुल्क कानूनी सहायता तंत्र की भी जानकारी दी गई।
संवाद सत्र के दौरान छात्राओं और शिक्षिकाओं ने बाल सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों से जुड़े कई प्रश्न पूछे, जिनका न्यायिक अधिकारियों ने विस्तृत और व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत किया। विधिक सेवा प्राधिकरण ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों से अपील की कि वे छात्राओं के बीच नियमित संवाद कायम रखकर उन्हें सुरक्षित और अपराधमुक्त परिवेश देने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते रहें।
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