यूपी बना खाद्य प्रसंस्करण का प्रमुख केंद्र: 51 नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी, पीएमएफएमई में प्रदेश अव्वल
उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण नीति के तहत 51 नए प्रोजेक्ट्स मंजूर। राज्य स्तरीय समिति की बैठक में सोलर आधारित इकाइयों और पीएमएफएमई प्रगति की समीक्षा हुई।
उत्तर प्रदेश में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने और किसानों की उपज के मूल्य संवर्धन के उद्देश्य से लागू की गई खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति के सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखने लगे हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दिशा-निर्देशन में राज्य खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेशकों और नए उद्यमियों की शीर्ष पसंद बनकर उभरा है। इस क्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय इम्पावर्ड समिति (एसएलईसी) की 22वीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें नीति के क्रियान्वयन, नए निवेश प्रस्तावों और वित्तीय प्रोत्साहनों की समीक्षा करते हुए 51 नए औद्योगिक प्रस्तावों को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान की गई।

समिति की बैठक में प्रस्तुत प्रगति रिपोर्ट के अनुसार नीति के तहत अब तक कुल 1,975 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इनमें से 580 औद्योगिक प्रस्तावों को औपचारिक स्वीकृति प्रदान करते हुए संबंधित परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) निर्गत किए जा चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष में ही 291 नवीन प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। अनुमोदित परियोजनाओं को गति देने के लिए पहली और दूसरी किस्त के रूप में 132.61 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन धनराशि का सफल अंतरण किया जा चुका है।
खाद्य प्रसंस्करण नीति: परियोजना प्रगति एवं नए प्रस्तावों की स्थिति
| प्रमुख मानक एवं श्रेणियां | वर्तमान प्रगति एवं उपलब्ध आंकड़े |
| कुल प्राप्त आवेदन | 1,975 परियोजना प्रस्ताव प्राप्त |
| स्वीकृत प्रस्ताव एवं एलओसी | 580 औद्योगिक इकाइयों को लेटर ऑफ कम्फर्ट जारी |
| जारी प्रोत्साहन धनराशि | पहली व दूसरी किस्त के रूप में ₹132.61 करोड़ का वितरण |
| नई स्वीकृत परियोजनाएं | 51 नए संयंत्र (फ्रोजन फूड, डेयरी, बेकरी, पोटैटो फ्लेक्स व दाल मिल) |
| पर्यावरण-अनुकूल पहल | महिला उद्यमी समूहों द्वारा संचालित सोलर आधारित प्रसंस्करण संयंत्र |
बैठक में अनुमोदित 51 नए प्रोजेक्ट्स में फ्रोजन फल एवं सब्जी प्रसंस्करण, पशु आहार (कैटल फीड), डिहाइड्रेटेड फल-सब्जियां, कन्फेक्शनरी, नमकीन, बेकरी, आइसक्रीम, फ्रोजन रेडी-टू-ईट फूड, पोटैटो फ्लेक्स, सोया उत्पाद, डेयरी संयंत्र, दाल-आटा मिल और खाद्य तेल रिफाइनरी शामिल हैं। इसके अलावा स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देते हुए सौर ऊर्जा चालित प्रसंस्करण संयंत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। महिला स्वयं सहायता समूहों और उद्यमी संघों द्वारा संचालित सौर ऊर्जा आधारित आटा, मसाले, दाल मिल, चावल मिल, ब्रेडक्रम्ब्स, फ्रूट जूस और गुड़ आधारित उत्पादों के निर्माण को भी स्वीकृति दी गई है।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के क्रियान्वयन में भी उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी स्थान बनाए हुए है। योजना के अंतर्गत अब तक राज्य में 28,356 इकाइयों की स्थापना हेतु ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं तथा 24,883 उद्यमों को 1,040 करोड़ रुपये की अनुदान राशि सफलतापूर्वक वितरित की जा चुकी है। विगत वित्तीय वर्ष में 8,296 इकाइयों के ऋण स्वीकृत कराकर प्रदेश पूरे देश में प्रथम स्थान पर रहा, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में भी अब तक 3,198 इकाइयों के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं और 7,643 उद्यमियों को 271 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई है।

कार्यक्रम के दौरान योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और उद्यमियों को समयबद्ध सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को सम्मानित किया गया। बरेली की उद्यमी मित्र इशानी श्रीवास्तव, सीतापुर की उद्यमी मित्र नेहा सिंह तथा राजकीय खाद्य प्रसंस्करण केंद्र बरेली के कनिष्ठ सहायक अंशिल सिन्हा को उनके सराहनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। कृषि उत्पादन आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी स्वीकृत परियोजनाओं का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए ताकि ग्रामीण अंचल तक निवेश और रोजगार के नए अवसर पहुंच सकें।
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