औद्यानिक उत्पादन में यूपी देश में अव्वल, मसाला क्षेत्र में तकनीक और वैल्यू एडिशन से बढ़ेगा निर्यात
उत्तर प्रदेश औद्यानिक उत्पादन में देश में नंबर वन। लखनऊ में आयोजित यूपी स्पाइस कान्फ्रेंस में मसाला प्रसंस्करण, निर्यात और वैल्यू एडिशन पर रहा मुख्य जोर।
उत्तर प्रदेश की मसाला अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार के अनुरूप ढालने और किसानों की आय में इजाफा करने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ स्थित उद्यान भवन में छठे उत्तर प्रदेश स्पाइस कान्फ्रेंस एवं एक्सपो का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष सम्मेलन में उद्यान विभाग के शीर्ष अधिकारियों, नीति निर्धारकों, कृषि वैज्ञानिकों, प्रमुख मसाला निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने एक मंच पर आकर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम का संचालन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (कार्ड) द्वारा किया गया, जिसमें 3ईए ने वैश्विक ज्ञान साझेदार की भूमिका निभाई।
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज औद्यानिक फसलों के कुल उत्पादन के मामले में पूरे देश में शीर्ष पायदान पर है, जो राज्य के किसानों के अथक परिश्रम का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मसाले न केवल भोजन के स्वाद को बढ़ाते हैं बल्कि सेहत के दृष्टिकोण से भी इनका अत्यधिक महत्व है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर गुणवत्ता, शुद्धता, मूल्य संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाना समय की मांग है। वैश्विक बाजार में राज्य के मसालों की स्थायी साख तभी स्थापित हो सकती है जब खेत से लेकर पैकेजिंग तक गुणवत्ता के कड़े नियम लागू किए जाएं।
किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि मसालों की खेती कम भूमि में भी किसानों को अधिक आर्थिक लाभ सुनिश्चित करा सकती है। राज्य सरकार मसाला क्षेत्र में नई प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए उद्यमियों और एफपीओ को आकर्षक वित्तीय अनुदान दे रही है। उन्होंने मसाला उद्योग के बड़े कारोबारियों से अपील की कि वे बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे किसानों के साथ अनुबंध कर खेती कराएं, जिससे उद्योगों को गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल निरंतर मिले और किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि लखनऊ में नवनिर्मित आधुनिक एग्री मॉल में जैविक उत्पादों और प्रमाणित शुद्ध मसालों की बिक्री के लिए विशेष स्थान आरक्षित किया जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को सीधे विश्वसनीय उत्पाद सुलभ हो सकें।
विशेषज्ञ सत्र में 3ईए ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर विभोर मिश्रा ने कहा कि मसाला क्षेत्र की प्रगति को केवल पैदावार की मात्रा तक सीमित नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि प्रति हेक्टेयर और प्रति किलोग्राम मिलने वाले आर्थिक मूल्य को पैमाना बनाना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि कच्चे मसालों के सामान्य व्यापार के स्थान पर प्रसंस्कृत सामग्री, मसाला तेल, ओलियोरेजिन और ब्रांडेड उत्पादों के निर्माण पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। तकनीकी सत्रों में अडानी स्पाइसेस, राकेश मसाला, एमडीएच, गोल्डी स्पाइसेस, सीएसआईआर-सीमैप और बीबीएयू जैसे प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने सुरक्षित पैकेजिंग, अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता निगरानी को खेत से लेकर निर्यात बंदरगाहों तक अनिवार्य रूप से लागू करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के समापन सत्र में पेशेवर शेफ्स द्वारा एक पाक कला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। उद्घाटन अवसर पर निदेशक उद्यान भानु प्रकाश राम, संयुक्त निदेशक डॉक्टर सर्वेश कुमार, संयुक्त निदेशक डॉक्टर राजीव कुमार वर्मा, आईएसीसी/आईसीएफए के प्रतिनिधि मुकेश बहादुर सिंह तथा स्पाइसेस बोर्ड के विशेषज्ञ विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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