UP International Trade Show: खाद्य प्रसंस्करण से किसानों की बढ़ेगी आय और सृजित होंगे रोजगार के नए अवसर, बोले डिप्टी सीएम केशव मौर्य
ग्रेटर नोएडा में यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023 से किसानों की उपज की बर्बादी रुकेगी और ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा है कि प्रदेश में कृषि उपज के मूल्य संवर्धन और किसानों की समृद्धि के लिए खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) का क्षेत्र एक बड़े इंजन की तरह काम कर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश खाद्यान्न, फलों और सब्जियों के उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार है। यदि इन कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और प्रभावी ब्रांडिंग की जाए, तो इससे न केवल किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर दाम मिलेगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार व उद्यमिता के नए द्वार भी खुलेंगे।
ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे 'यू.पी. इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026' (UPITS) के अंतर्गत राज्य की ‘खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023’ पर आयोजित विशेष परिचर्चा सत्र को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने यह बातें कहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की स्पष्ट मंशा इस उद्योग को केवल महानगरों या बड़े औद्योगिक पार्कों तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि इसे ग्राम पंचायत और जिला स्तर तक जमीनी हकीकत बनाना है।
फसल बर्बादी पर रोक और किसानों को लाभकारी मूल्य
उपमुख्यमंत्री ने कृषि मंडियों की मौजूदा स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि हर मौसम में भारी मात्रा में टमाटर, आलू, आम, अमरूद और हरी सब्जियां मंडियों तक पहुंचती हैं। हालांकि, भंडारण और त्वरित प्रसंस्करण की समुचित व्यवस्था न होने के चलते उपज का एक बड़ा हिस्सा खराब हो जाता है, जिसका सीधा आर्थिक नुकसान किसान को उठाना पड़ता है।
उन्होंने कहा, "समय पर प्रसंस्करण और बेहतर आपूर्ति श्रृंखला (कोल्ड-चेन) के माध्यम से हम फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान (Post-Harvest Loss) को न्यूनतम स्तर पर ला सकते हैं। जब उत्पाद खराब होने से बचेगा और उसे प्रसंस्कृत उत्पाद के रूप में बाजार में उतारा जाएगा, तो किसान को मंडियों में औने-पौने दाम पर उपज बेचने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा।"
पैकेजिंग, ब्रांडिंग और वैश्विक मानकों पर खरा उतरने की जरूरत
संबोधन के दौरान उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि खाद्य प्रसंस्करण केवल कच्चे माल को पकाने या डिब्बाबंद करने तक सीमित नहीं है। इसमें आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय विपणन का एक विशाल ढांचा शामिल है।
वैश्विक बाजार में पैठ बनाने की रणनीति साझा करते हुए उन्होंने उद्यमियों से कहा कि यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों के बाजारों में भारतीय खाद्य पदार्थों की भारी मांग है, लेकिन वहां गुणवत्ता और स्वच्छता के मानक बेहद कड़े हैं। उत्तर प्रदेश के खाद्य उत्पादों को इन वैश्विक मानकों पर खरा उतरना होगा। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर उद्योग विभाग और उद्यान विभाग के अधिकारी नए उद्यमियों को वित्तीय सहायता, बैंक ऋण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहे हैं ताकि स्थानीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर की इकाइयां स्थापित हो सकें।
स्वयं सहायता समूहों और युवाओं को सीधी भागीदारी
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत कार्य कर रहे महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) और स्थानीय युवा इस नीति से सबसे अधिक लाभान्वित हो सकते हैं। आचार, मुरब्बा, जूस, आटा, दाल मिल और मसाला पिसाई जैसे छोटे स्तर के उद्योगों को आधुनिक रूप देकर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने ‘खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023’ के तहत स्थापित नई इकाइयों के लाभार्थियों और सफल उद्यमियों को अनुदान राशि के चेक वितरित कर सम्मानित किया। सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कुमार कश्यप, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और देश-विदेश से आए निवेशक उपस्थित रहे।
क्लस्टर आधारित विकास और नए निवेश पर जोर
सत्र में तकनीकी पक्ष रखते हुए अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा ने बताया कि राज्य सरकार प्रत्येक जिले की विशिष्ट फसल (One District One Product - ODOP की तर्ज पर) को ध्यान में रखकर जिलावार प्रोसेसिंग हब विकसित कर रही है। पश्चिमी यूपी के गन्ना व दुग्ध उत्पाद, मध्य यूपी के आम व अमरूद और पूर्वांचल व बुंदेलखंड के दलहन-तिलहन व सब्जियों के लिए अलग-अलग क्लस्टर बनाए जा रहे हैं।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि सरकार प्रसंस्करण इकाइयां लगाने पर पूंजीगत सब्सिडी, बिजली शुल्क में छूट और कोल्ड स्टोरेज निर्माण पर विशेष वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। उन्होंने निजी क्षेत्र के निवेशकों से आह्वान किया कि वे उत्तर प्रदेश के मजबूत कृषि आधार का लाभ उठाकर राज्य में आधुनिक फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स स्थापित करें।
What's Your Reaction?