UP International Trade Show: स्वयं सहायता समूहों और बड़ी कंपनियों के बीच 30 एमओयू, प्राथमिक स्कूलों के 1.5 करोड़ बच्चों की ड्रेस सिलेंगी महिलाएं
ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में स्वयं सहायता समूहों और कंपनियों के बीच 30 एमओयू हुए। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने घोषणा की कि अगले सत्र से 1.5 करोड़ बच्चों की स्कूल ड्रेस महिला समूहों द्वारा तैयार कराई जाएगी।
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके कुटीर उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर के खुदरा बाजार तक पहुंचाने के अभियान को सोमवार को एक नया विस्तार मिला। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (UPITS) के दौरान उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा आयोजित विशेष बायर-सेलर बैठक में महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और देश की प्रतिष्ठित व्यावसायिक कंपनियों के बीच लगभग 30 सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुए इन समझौतों का उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में तैयार होने वाले हस्तशिल्प, हथकरघा, खाद्य प्रसंस्करण और जैविक उत्पादों को सीधे थोक खरीदारों और संस्थागत आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ना है। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय की जानकारी देते हुए घोषणा की कि आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत लगभग डेढ़ करोड़ बच्चों की स्कूल यूनिफॉर्म (ड्रेस) तैयार करने का काम प्राथमिकता के आधार पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सौंपा जाएगा।
1.5 करोड़ बच्चों की ड्रेस तैयार करने से खुलेगा बड़ा बाजार
सत्र को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता को केवल सीमित आय तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें बड़े स्तर के कारोबार से जोड़ना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब डेढ़ करोड़ विद्यार्थियों को हर वर्ष दो-दो सेट यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाती है। जब इतने व्यापक पैमाने पर कपड़ों की सिलाई और आपूर्ति का दायित्व ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं को मिलेगा, तो गांवों में सिलाई क्लस्टरों का एक विशाल नेटवर्क सक्रिय होगा। इससे लाखों महिलाओं को घर के निकट ही नियमित पारिश्रमिक और कार्य मिलेगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा, "हमारा संकल्प महिलाओं को केवल 'लखपति दीदी' बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें कुशल वित्तीय प्रबंधन और बड़े पैमाने पर उत्पादन से जोड़कर 'करोड़पति दीदी' की श्रेणी तक पहुंचाना है।"
बायर-सेलर मीट: बिचौलियों के बिना सीधे कॉरपोरेट से संपर्क
ट्रेड शो के मंच पर आयोजित इस बायर-सेलर सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के सुदूर जनपदों से आईं समूह की दीदियों ने अपने-अपने उत्पादों का जीवंत प्रदर्शन किया। टेक्सटाइल, हर्बल उत्पाद, मसाले, हस्तनिर्मित अगरबत्तियां, आचार और हस्तशिल्प की गुणवत्ता को देखकर निजी क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों और ई-कॉमर्स व खुदरा शृंखलाओं ने नियमित खरीद के लिए रुचि दिखाई।
कार्यक्रम के दौरान हस्ताक्षरित 30 एमओयू के जरिए यह सुनिश्चित किया गया है कि उत्पादों की पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और आपूर्ति समय-सीमा के अनुसार कंपनियां सीधे समूहों से खरीदारी करेंगी। उपमुख्यमंत्री ने मंच से ही विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन सभी एमओयू की मासिक समीक्षा की जाए ताकि कोई भी समझौता केवल कागजों तक सीमित न रहे और उसका सीधा आर्थिक लाभ समूह की महिलाओं के बैंक खातों तक पहुंचे।
छोटे ऋण से आत्मनिर्भरता: मंच पर छलकीं सफलता की कहानियां
कार्यक्रम में ग्रामीण परिवेश से निकलकर सफल उद्यमी बनीं महिलाओं ने अपनी प्रेरक यात्रा भी साझा की। सिद्धार्थनगर के आजाद स्वयं सहायता समूह से जुड़ी सरोज देवी ने सदन को बताया कि उन्होंने आजीविका मिशन के सहयोग से पांच लाख रुपये का प्रारंभिक ऋण लेकर सिलाई और स्थानीय उत्पादों का काम शुरू किया था। समय पर ऋण चुकाने के बाद अब उनका वार्षिक कारोबार 6 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
इसी क्रम में अमरोहा जनपद के प्रियांशी स्वयं सहायता समूह की कौशल्या ने बताया कि उन्होंने तीन लाख रुपये के शुरुआती पूंजी सहयोग से मसाला प्रसंस्करण और पिसाई का काम शुरू किया था, जो अब 6 लाख रुपये सालाना से अधिक के कारोबार में बदल चुका है। वहीं, नवी प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की प्रतिनिधि शफीका ने बताया कि संगठित विपणन और प्रेरणा कैंटीन के सहयोग से उनका कारोबार 10 लाख रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है।
ग्रामीण विकास विभाग का रोडमैप
ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव सौरभ बाबू और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक अरुण कुमार ने बताया कि प्रदेश भर में लाखों महिलाएं प्रेरणा कैंटीन, सरस हाट और बिजली सखी जैसे कार्यक्रमों के जरिए नियमित आय अर्जित कर रही हैं। ट्रेड शो जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर ग्रामीण उत्पादों की पैकेजिंग और कॉर्पोरेट लिंकेज उपलब्ध कराना इस दिशा में एक संस्थागत बदलाव है।
कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप, एमएसएमई राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, संयुक्त मिशन निदेशक प्रवीणानंद तथा चंद्रशेखर सहित शासन और उद्योग जगत के अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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