UP International Trade Show: यूपीआईटीएस ने बनाया नया कीर्तिमान, 4 दिनों में 5.48 लाख से अधिक पहुंचा फुटफॉल
ग्रेटर नोएडा में आयोजित चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS-4.0) ने नया रिकॉर्ड बनाया है। चार दिनों में 1.56 लाख से अधिक कारोबारी खरीदारों समेत 5.48 लाख से ज्यादा लोग एक्सपो मार्ट पहुंचे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन को साकार करने के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित चौथा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) जनभागीदारी और व्यापारिक संव्यवहार दोनों ही स्तरों पर अभूतपूर्व इतिहास रच रहा है। पांच दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय महाकुंभ के चौथे दिन 28 सितंबर तक कुल 5,48,881 आगंतुकों (फुटफॉल) की आमद दर्ज की गई है। इस आंकड़े ने राज्य में आयोजित होने वाले व्यापार मेलों के पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि यह आयोजन केवल व्यापारिक घरानों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें आम नागरिकों और परिवारों की भी भारी सहभागिता देखी गई। कुल दर्ज फुटफॉल में जहां 1,56,523 घरेलू कारोबारी खरीदार (B2B बॉयर्स) शामिल रहे, वहीं 3,92,358 सामान्य आगंतुकों (B2C फुटफॉल) ने प्रदर्शनी का भ्रमण कर राज्य के पारंपरिक शिल्प, खानपान और औद्योगिक प्रगति का प्रत्यक्ष अनुभव लिया। ट्रेड शो का समापन मंगलवार को निर्धारित है, जिसके चलते अंतिम दिन यह आंकड़ा और नई ऊंचाई को छूने की संभावना है।
कारोबारी साझेदारियों का केंद्र बना ट्रेड शो
आयोजन के दौरान सबसे अधिक उत्साहवर्धक पहलू घरेलू और विदेशी खरीदारों की व्यापक उपस्थिति रही। 1.56 लाख से अधिक कारोबारी खरीदारों ने विभिन्न जनपदों के उद्यमियों, निर्यातकों और कारीगरों से सीधे संवाद स्थापित किया।
कपड़ा, चमड़ा, पीतल के बर्तन, कांच के शिल्प, हस्तनिर्मित कालीन, इत्र, हर्बल उत्पाद और कृषि प्रसंस्करण से जुड़े स्टॉलों पर लगातार बैठकों का दौर जारी रहा। व्यापारिक खरीदारों ने उत्पादों की न्यूनतम आपूर्ति क्षमता, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग और मूल्य निर्धारण को लेकर विस्तृत चर्चाएं कीं। कई सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को देश के दूरदराज राज्यों से थोक आपूर्ति के प्रत्यक्ष कार्यादेश (Purchase Orders) प्राप्त हुए हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर विनिर्माण को बड़ा संबल मिलेगा।
‘लोकल से ग्लोबल’ संकल्प को मिला धरातल
ट्रेड शो ने उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत तैयार विशिष्ट वस्तुओं को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया है। भदोही के कालीन, मुरादाबाद के पीतल उत्पाद, फिरोजाबाद का कांच शिल्प, कन्नौज का इत्र, सहारनपुर की काष्ठकला और लखनऊ की चिकनकारी जैसे पारंपरिक शिल्पों को एक ही छत के नीचे देखकर विदेशी प्रतिनिधिमंडल भी खासे प्रभावित नजर आए।
वैश्विक बाजार के साथ तालमेल बिठाते हुए पारंपरिक उत्पादों के साथ-साथ इस बार आधुनिक इंजीनियरिंग, सेमीकंडक्टर अवसंरचना, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और अत्याधुनिक आईटी समाधानों के स्टॉल्स भी आगंतुकों के आकर्षण का केंद्र बने। इससे उत्तर प्रदेश की छवि केवल एक कृषि प्रधान राज्य के बजाय एक उभरते हुए आधुनिक विनिर्माण केंद्र (Manufacturing Hub) के रूप में मजबूती से उभरी है।
3.92 लाख सामान्य आगंतुकों ने बढ़ाई सांस्कृतिक रौनक
कारोबारी विमर्श के अतिरिक्त 3.92 लाख से अधिक सामान्य नागरिकों की उपस्थिति ने इस आयोजन को एक जन-उत्सव का रूप दे दिया। एनसीआर और आसपास के जिलों से पहुंचे परिवारों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों अवध, ब्रज, बुंदेलखंड और पूर्वांचल की समृद्ध कला, लोकनृत्य और संगीत का आनंद लिया।
विशेष रूप से तैयार किए गए फूड कोर्ट में बनारसी चाट, अवधी व्यंजन, बुंदेली पकवान और मथुरा के पेड़े जैसे स्थानीय स्वादों का लोगों ने लुत्फ उठाया। सामान्य आगंतुकों की इस विशाल भीड़ ने न केवल प्रदर्शकों की खुदरा बिक्री में भारी वृद्धि की, बल्कि स्थानीय कारीगरों को सीधे उपभोक्ता से उनकी प्राथमिकताओं का फीडबैक प्राप्त करने का भी दुर्लभ अवसर प्रदान किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्यात के नए द्वार
ट्रेड शो में पहुंचे विदेशी खरीदारों (International Buyers) की सक्रियता से राज्य के हस्तशिल्प और कृषि निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद बंधी है। यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य पूर्व के व्यावसायिक प्रतिनिधियों ने उत्तर प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण, जैविक खाद्यान्न और पर्यावरण-अनुकूल हस्तशिल्प में गहरी रुचि दिखाई।
वाणिज्य विभाग और निर्यात संवर्धन परिषद के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से छोटे शहरों के कारीगरों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने के लिए किसी बिचौलिए पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। सीधे संवाद से विश्वास का वातावरण बनता है, जो दीर्घकालिक कारोबारी समझौतों का मार्ग प्रशस्त करता है।
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