UPITS 2026: इंटरनेशनल ट्रेड शो में सजा 75 जिलों की 75 महिला उद्यमियों का बाजार, चौखट लांघकर ग्लोबल मंच पर पहुंचीं ग्रामीण दीदियां

ग्रेटर नोएडा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में 75 जिलों की 75 महिला उद्यमियों के उत्पाद छाए हैं। आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण महिलाओं को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदार मिले हैं।

By INA News Desk
Sep 27, 2026 - 22:41
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UPITS 2026: इंटरनेशनल ट्रेड शो में सजा 75 जिलों की 75 महिला उद्यमियों का बाजार, चौखट लांघकर ग्लोबल मंच पर पहुंचीं ग्रामीण दीदियां

उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अंचलों और कस्बों की चौखट लांघकर महिला उद्यमिता अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ रही है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एवं मार्ट में आयोजित 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026' में प्रदेश के सभी 75 जिलों से पहुंचीं 75 चुनिंदा महिला उद्यमियों का ग्रामीण बाजार देशी-विदेशी आगंतुकों के आकर्षण का सबसे प्रमुख केंद्र बना हुआ है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) के अंतर्गत गठित स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी इन 'दीदियों' ने अपने पारंपरिक हुनर, नवाचार और अटूट परिश्रम के बल पर यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मंच और अवसर मिले, तो गांव की सामान्य गृहणी भी एक सफल और आत्मनिर्भर वैश्विक उद्यमी बन सकती है।

इस विशाल व्यापार मेले में लगे स्टॉल्स केवल तैयार उत्पादों के विक्रय केंद्र भर नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक स्टॉल के पीछे किसी पिछड़े गांव, किसी विलुप्त होती पारंपरिक कला और अभावों के बीच संघर्ष कर खुद का व्यवसाय खड़ा करने वाली ग्रामीण महिला की संघर्ष गाथा जुड़ी है। अमरोहा के शुद्ध कुटे मसालों की सोंधी महक, कन्नौज के प्राकृतिक इत्र की रूहानी खुशबू, अयोध्या की जैविक लेमन ग्रास और हर्बल चाय, तथा आजमगढ़ की सुप्रसिद्ध ब्लैक पॉटरी के बर्तनों ने प्रदर्शनी में आने वाले कॉरपोरेट बायर्स और विदेशी व्यापारिक प्रतिनिधियों को रुकने पर विवश कर दिया है।

चौतरफा हुनर: आगरा की जरी से लेकर बनारस के कालीन तक

प्रदर्शनी परिसर में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और भौगोलिक विविधता का विहंगम दृश्य देखने को मिल रहा है। राज्य के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचते ही उत्पादों का स्वरूप और उनका उपयोग बदल जाता है:

  • आगरा की जरी-जरदोजी: आगरा की रहनुमा अपने स्टॉल पर पारंपरिक जरी-जरदोजी के महीन कढ़ाई वाले वस्त्र लेकर आई हैं, जो आधुनिक फैशन डिजाइनरों को आकर्षित कर रहे हैं।

  • अमरोहा के खड़े व पिसे मसाले: कौशल्या गौतम द्वारा तैयार किए गए बिना मिलावट के शुद्ध मसाले अपनी प्रामाणिक गुणवत्ता के कारण आगंतुकों की पहली पसंद बने हैं।

  • अयोध्या की हर्बल चाय: रामनगरी की रेणु सिंह ने लेमन ग्रास, तुलसी और प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से युक्त वेलनेस चाय के उत्पाद प्रस्तुत किए हैं।

  • आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी: निजामाबाद की रीता प्रजापति मिट्टी के बर्तनों पर चांदी जैसी चमक बिखेरने वाली पुश्तैनी ब्लैक पॉटरी को आधुनिक डिनरवेयर और सजावटी रूप में लेकर पहुंची हैं।

  • कन्नौज का इत्र व बनारसी कालीन: इत्रनगरी की तारावती के मिट्टी व गुलाब के पारंपरिक इत्र और वाराणसी की सीता देवी द्वारा हस्तनिर्मित कालीन, फुटमैट और टेबल रनर की कॉर्पोरेट खरीदारों में भारी मांग देखी गई।

पारंपरिक शिल्प से आधुनिक दैनिक उत्पादों तक का विस्तार

आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं ने केवल पारंपरिक हस्तशिल्प तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि बाजार की आधुनिक जरूरतों को भांपते हुए रोजमर्रा के उत्पादों में भी महारत हासिल की है।

सिद्धार्थनगर की सरोज देवी ने केले के अपशिष्ट तनों से धागा निकालकर 'बनाना फाइबर' के पर्यावरण-अनुकूल बैग, मैट और उपयोगी सामान तैयार किए हैं। सोनभद्र के आदिवासी अंचल की मधुबाला हर्बल साबुन, शहद और जूट के थैलों के साथ पहुंची हैं, जबकि लखीमपुर खीरी की शफीका जूते, चप्पल और चमड़े के टिकाऊ बेल्ट प्रदर्शित कर रही हैं। प्रयागराज की तबस्सुम मकसूद यमुना कछार की मूंज घास से बनी आकर्षक डलिया और कलात्मक टोकरियां बेच रही हैं, वहीं प्रतापगढ़ की प्रज्ञा जायसवाल आंवले के मुरब्बे और पारंपरिक आम के अचार के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। महोबा की रानी के स्टॉल पर बुंदेलखंडी पीतल शिल्प की मूर्तियां और ललितपुर की लीला देवी के जैविक गोमय (गोबर आधारित) धूपबत्ती उत्पाद लोगों को खूब भा रहे हैं।

इसके अलावा, घरेलू स्वच्छता उत्पादों के निर्माण में भी ग्रामीण महिलाओं ने कदम बढ़ाया है। बलिया की रंजना देवी और जौनपुर की सुषमा सिंह फिनाइल, हैंडवॉश, डिशवॉश और टॉयलेट क्लीनर जैसे गुणवत्तापूर्ण उत्पाद रियायती दरों पर उपलब्ध करा रही हैं, जो सीधे तौर पर बड़ी एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों को स्थानीय स्तर पर टक्कर दे रहे हैं।

बिक्री से आगे, बाजार और पैकेजिंग समझने का अवसर: मिशन निदेशक

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार ने ट्रेड शो में महिला उद्यमियों की इस ऐतिहासिक सहभागिता पर कहा कि स्वयं सहायता समूहों के लिए केवल उत्पाद तैयार कर लेना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती उत्पाद को बिचौलियों से मुक्त कर सीधे अंतिम उपभोक्ता और बड़े थोक बाजार तक पहुंचाने की होती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इंटरनेशनल ट्रेड शो का यह वैश्विक मंच इस दूरी को पूरी तरह मिटा रहा है। यहां ग्रामीण महिलाओं को यह व्यावहारिक अनुभव मिल रहा है कि आधुनिक शहरी और अंतरराष्ट्रीय ग्राहक किस प्रकार के डिजाइन, रंग संयोजन और गुणवत्ता की मांग कर रहे हैं। उन्हें अपने उत्पादों की ब्रांडिंग, आधुनिक पैकेजिंग, लेबलिंग और बारकोडिंग के महत्व का सीधा ज्ञान हो रहा है। बड़े निर्यातकों और ई-कॉमर्स कंपनियों से सीधा संपर्क होने के कारण भविष्य में इन महिला समूहों को साल भर चलने वाले बल्क ऑर्डर्स प्राप्त होने की मजबूत नींव पड़ रही है।

ग्रामीण नारी शक्ति से साकार हो रहा 'आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश'

प्रदेश के सभी 75 जनपदों से आई इन 75 महिला उद्यमियों की यह कतार महज बाजार की दुकानें नहीं हैं, बल्कि यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'मिशन शक्ति' और 'लोकल फॉर वोकल' अभियान की जमीनी सफलता का जीता-जागता दस्तावेज है। जब गांव की अनपढ़ या कम पढ़ी-लिखी महिलाएं बैंक लिंकेज, समूह ऋण और तकनीकी प्रशिक्षण पाकर अपने पैरों पर खड़ी होती हैं, तो इससे न केवल उनका पारिवारिक जीवन संवरता है, बल्कि उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती और गति प्राप्त होती है।

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