डिजिटल क्रांति: लखनऊ विश्वविद्यालय ने 21 हजार से अधिक छात्रों के क्यूआर कोड आईडी कार्ड डिजिलॉकर पर किए अपलोड
लखनऊ विश्वविद्यालय देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बना जिसने 21,268 विद्यार्थियों के क्यूआर कोड आधारित डिजिटल पहचान पत्र डिजिलॉकर पर अपलोड किए हैं।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को आधुनिक तकनीक, पारदर्शिता और कागज-रहित व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में बड़ा कीर्तिमान स्थापित हुआ है। लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लेने वाले 21,268 विद्यार्थियों के आधिकारिक पहचान पत्र भारत सरकार के डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक उपलब्ध करा दिए हैं। इस स्तर पर व्यापक क्यूआर कोड आधारित डिजिटल पहचान पत्र (vCard) व्यवस्था लागू करने वाला लखनऊ विश्वविद्यालय देश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बन गया है।
प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में छात्र-केंद्रित डिजिटल व्यवस्था लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कागजी झंझटों से राहत मिलेगी, समय की बचत होगी और जाली पहचान पत्र बनाने जैसी गड़बड़ियों पर पूरी तरह लगाम लगेगी। यह पहल प्रदेश को डिजिटल मोर्चे पर आगे ले जाने में अहम भूमिका निभाएगी।
सभी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को मिली सुविधा
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कुलपति प्रोफेसर जय प्रकाश सैनी के मार्गदर्शन में यह छात्र-हितैषी व्यवस्था शुरू की गई है। इसके तहत नए सत्र में स्नातक, परास्नातक, पीएचडी शोधार्थियों के साथ-साथ डिप्लोमा और शास्त्री पाठ्यक्रमों में दाखिला लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं को शामिल किया गया है।
पंजीकृत छात्र अब किसी भी समय डिजिलॉकर ऐप या वेब पोर्टल पर लॉगिन करके अपनी प्रोफाइल फोटो के नीचे दिए गए विकल्प के जरिए अपना क्यूआर कोड आधारित डिजिटल पहचान पत्र देख और डाउनलोड कर सकते हैं।
डिजिटल पहचान पत्र (vCard) के प्रमुख लाभ और विशेषताएं
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हमेशा स्मार्टफोन में उपलब्ध: भौतिक प्लास्टिक कार्ड साथ रखने की जरूरत खत्म हो जाएगी, जिससे कार्ड के खोने, कटने-फटने या चोरी होने की समस्या से मुक्ति मिलेगी।
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लंबी कतारों से छुटकारा: प्रवेश सत्र के दौरान नए कार्ड छपने और बांटने में लगने वाले हफ्तों के समय की बचत होगी। डुप्लीकेट कार्ड बनवाने की जटिल प्रक्रिया भी समाप्त हो गई है।
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पूर्ण कानूनी मान्यता: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत डिजिलॉकर पर उपलब्ध यह डिजिटल पहचान पत्र भौतिक कार्ड के समान 100 प्रतिशत कानूनी रूप से वैध है।
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त्वरित सत्यापन व फर्जीवाड़े पर रोक: यह व्यवस्था सीधे विश्वविद्यालय के डेटाबेस और छात्र की अपार (APAAR) आईडी से जुड़ी है। क्यूआर कोड स्कैन करके परीक्षाओं, रेलवे-बस पास और बैंक में तुरंत सत्यापन किया जा सकेगा। पाठ्यक्रम पूरा होने पर यह कार्ड खुद ब खुद निष्क्रिय हो जाएगा।
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कैंपस सुविधाओं में सुगम प्रवेश: केंद्रीय पुस्तकालय, वाचनालय, कंप्यूटर लैब, खेल परिसर और छात्रावासों में विद्यार्थी अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कराकर त्वरित प्रवेश पा सकेंगे।
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पर्यावरण अनुकूल कदम: हजारों प्लास्टिक पीवीसी कार्ड और लेमिनेशन शीट का इस्तेमाल न होने से प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी, जो विश्वविद्यालय की हरित परिसर नीति के अनुकूल है।
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