Maha Kumbh 2025: राम से बड़ा राम का नाम, वेदों का सार है रामचरित मानस का आधार

महादेव शिव को राम नाम कितना प्यारा है यह किसी से छिपा नहीं है। राम नाम की महिमा तो खुद महादेव ने ही एक बार माता पार्वती को बताई थी। इस विषय पर आचार्य संगम ने बता...

By INA News Desk
Feb 7, 2025 - 21:10
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Maha Kumbh 2025: राम से बड़ा राम का नाम, वेदों का सार है रामचरित मानस का आधार

सार-

  • राम (Ram)कथा के महात्म के बारे में श्री शम्भू पंचअग्नि अखाड़े के आचार्य संगम ने दी जानकारी, सभी मानवीय मूल्यों व रिश्तों को निभाने की प्रेरणा देता है राम (Ram)चरित मानस
  • युवाओं को प्रेरणा देने के साथ ही सद्कर्म की ओर अग्रसर करने के अनुकरणीय मार्ग है राम (Ram)चरित मानस
  • आचार्य संगम जी के अनुसार, तुलसीदास पहले राम (Ram)चरित मानस को संस्कृत में लिखने जा रहे थे मगर भगवान शिव ने उन्हें अवधी में लिखने का दिया आदेश
  • विपरीत से विपरीत परिस्थिति में भी आदर्श आचरण की शिक्षा व प्रेरणा देने का स्रोत है राम (Ram)चरित मानस

By INA News Maha Kumbh Nagar.

आपने अक्सर सुना होगा ‘राम (Ram) से बड़ा राम (Ram) का नाम’, मगर ऐसा क्यों है यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है। इसी महत्वपूर्ण प्रश्न का जवाब महाकुम्भ-2025 में संतों के सानिध्य से श्रद्धालुओं को प्राप्त हो रहा है। इस विषय में श्री शम्भू पंचअग्नि अखाड़ा के आचार्य संगम ने जानकारी देते हुए कहा कि राम (Ram) का नाम केवल प्रभु श्रीराम (Ram) के अवतार तक ही सीमित नहीं है बल्कि सकल ब्रह्मांड के स्पंदन का नाद है। राम (Ram) नाम की महिमा क्या है इसे समझना हो तो गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित राम (Ram)चरित मानस का अध्ययन और महात्म समझना आवश्यक है।

उनके अनुसार, राम (Ram)चरित मानस कोई ग्रंथ नहीं है बल्कि यह ईश्वर द्वारा मानव कल्याण के लिए सौंपी गई अनुपम भेंट है। आज के आधुनिक परिवेश में युवाओं को अधिक से अधिक राम (Ram)चरित मानस से जुड़कर आदर्श जीवन जीने की सूक्ति को समझकर उसे अपने जीवन में ढालना चाहिए। यही कारण है कि देववाणी संस्कृत के बजाए तुलसीदास जी ने इसकी रचना अवधी भाषा में की थी। 

  • स्वयं बाबा विश्वनाथ ने तुलसीदास को दिया था आदेश

महादेव शिव को राम (Ram) नाम कितना प्यारा है यह किसी से छिपा नहीं है। राम (Ram) नाम की महिमा तो खुद महादेव ने ही एक बार माता पार्वती को बताई थी। इस विषय पर आचार्य संगम ने बताया कि तुलसीदास जी जब ईश्वरीय आज्ञा से काशी के अस्सी घाट पर राम (Ram)चरित मानस ग्रंथ को लिखने का कार्य प्रारंभ कर रहे थे, तब स्वयं बाबा विश्वनाथ तुलसीदास जी के सपने में आए और उन्होंने इसे वेदवाणी संस्कृत के बजाय साधारण देशज भाषा में लिखने का आदेश दिया जिससे इसका लाभ आम लोगों तक भी पहुंच सके।

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आचार्य संगम के अनुसार, काशी में ही जब राम (Ram)चरित मानस के महात्म को प्रकाशित करने के लिए परीक्षा ली गई तो जो परिणाम आया उसने सभी को दंग कर दिया था। उनके अनुसार, महाराष्ट्र के अखंडानंद जी ने इस विषय में उन्हें जानकारी दी थी कि जब राम (Ram)चरित मानस को प्रमाणित करने के लिए वेद समेत सभी ग्रंथों के नीचे रखा गया था तो ईश्वरीय आज्ञा से राम (Ram)चरित मानस स्वतः ही सभी ग्रंथों के ऊपर आ गया। यह इसकी सार्वभौमिकता और सभी ग्रंथों के मूल तत्वों के संकलित स्वरूप होने के भाव को दर्शाता है।   

  • मानवीय रिश्ते, आदर्श व ईश्वर को समझने का है माध्यम

आज के युवाओं को सद्कर्म, सद्चरित्र और ईश्वरीय मार्ग की प्रेरणा देने के साथ ही रोजमर्रा के जीवनयापन को भी आदर्श तरीके से कैसे किया जाए इसकी प्रेरणा राम (Ram)चरित मानस देता है। आचार्य संगम ने कहा कि चाहें कोई भी मानवीय रिश्ते हों, चाहें कोई भी परिस्थिति हो, चाहें जैसी भी विषम स्थिति हो, आदर्श आचरण कैसा होना चाहिए इस बात की प्रेरणा राम (Ram)चरित मानस से मिलती है।

यही कारण है कि कोई व्यक्ति अपने जीवन के किसी भी दौर से गुजर रहा हो अगर वह राम (Ram)चरित मानस का अनुसरण करेगा तो उसे सद्कर्म और ईश्वरीय प्रेरणा का लाभ अवश्य मिलेगा। यह ईश्वर को समझने के साथ ही उनकी सीख के अनुसार खुद को निर्मल बनाने का मार्ग है और यही कारण है कि आज की युवा पीढ़ी अगर राम (Ram)चरित मानस का अनुसरण कर जीवनयापन करेगी तो व देश, प्रदेश, कुटुम्ब समेत व्यक्तिगत विकास के लिए भी श्रेयस्कर होगा।

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