Meerut : योगी सरकार का व्यापारियों को उपहार, मेरठ में 800 करोड़ से बनेगा ज्वैलरी पार्क
प्राधिकरण की ओर से वेदव्यास पुरी में लगभग 36 हजार वर्गमीटर जमीन पर ज्वलैरी पार्क का निर्माण होगा। पार्क में शोरूम, थोक व्यापार केंद्र, कारीगर कार्यशालाएं, उत्पादन इकाइयां, प्रदर्शनी स्थल, बैंकिंग सुविधाएं और साझा सेवा केंद्र विकसित किए जाएंगे। योगी सरकार की योज
- अंतरराष्ट्रीय ऊंचाइयों पर पहुंचेगा सराफा कारोबार, मेरठ विकास प्राधिकरण ने प्रस्तुत किया माडल
- मुकुट की तरह होगी बिल्डिंग, झुमके जैसा प्रवेश द्वार, आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा पार्क
मेरठ। योगी सरकार ने यहां के सराफा कारोबार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए ज्वेलरी पार्क बनाने का निर्णय लिया है। 800 करोड़ रुपये से यह पार्क बनाया जाएगा। इसके निर्माण का दायित्व मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) को सौंपा गया है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बुधवार को पीएल शर्मा मैदान के निकट स्थित एक सभागार में इसका माडल कारोबारियों के समक्ष पेश किया। वेदव्यासपुरी में बनने वाले इस पार्क की विशेषता इसका वास्तुशिल्प होगी। पार्क मुकुट की आकृति का होगा जिसका प्रवेश द्वार झुमके की तरह रखा गया है। इस ज्वेलरी पार्क में आभूषण कारोबार से जुड़ी सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी।
36 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में विकसित होगा पार्क
प्राधिकरण की ओर से वेदव्यास पुरी में लगभग 36 हजार वर्गमीटर जमीन पर ज्वलैरी पार्क का निर्माण होगा। पार्क में शोरूम, थोक व्यापार केंद्र, कारीगर कार्यशालाएं, उत्पादन इकाइयां, प्रदर्शनी स्थल, बैंकिंग सुविधाएं और साझा सेवा केंद्र विकसित किए जाएंगे। योगी सरकार की योजना है कि ज्वैलरी कारोबार से जुड़ी सभी गतिविधियां एक ही परिसर में संचालित हों। परियोजना में एक मुख्य प्रवेश द्वार, अलग-अलग व्यापारिक खंडों के लिए पृथक प्रवेश की व्यवस्था रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ ही खरीदारों और विक्रेताओं को ठहरने की सुविधा भी दी जाएगी।
निर्यात को मिलेगी नई गति
व्यापारिक संगठनों का मानना है कि ज्वैलरी पार्क बनने से मेरठ का आभूषण उद्योग राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान हासिल करेगा। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। अधिकारियों ने इस दौरान परियोजना की संरचना, आवंटन प्रक्रिया, उपलब्ध सुविधाएं, प्रस्तावित दरें और व्यापारिक संभावनाओं से भी विस्तार से अवगत कराया। कारोबारियों ने भी अपनी ओर से प्रश्न पूछकर जिज्ञासाओं को शांत किया। कारोबारियों की नजर अब भूखंड आवंटन और प्रस्तावित दरों पर टिकी हुई है।
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