Sambhal News: सम्भल में डाक टिकटों में समेटा दुनिया का इतिहास, 20 साल से लगा रहे अनोखी प्रदर्शनी; रामायण-महाभारत की झलक भी मौजूद
मोबाइल और इंटरनेट के दौर में जहां चिट्ठियों का चलन लगभग खत्म होता जा रहा है, वहीं सम्भल के मौहम्मद अब्दुल्ला डाक टिकटों
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल: मोबाइल और इंटरनेट के दौर में जहां चिट्ठियों का चलन लगभग खत्म होता जा रहा है, वहीं सम्भल के मौहम्मद अब्दुल्ला डाक टिकटों के जरिए इतिहास, संस्कृति और विरासत को सहेजने में जुटे हैं। उनके पास भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, कनाडा, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब समेत करीब 30 से 40 देशों के डाक टिकटों का अनूठा संग्रह मौजूद है। दावा है कि उनके इस संग्रह में 1847 से लेकर अलग-अलग दौर के टिकट शामिल हैं, जो इतिहास के पन्नों को जीवंत करते हैं।
- बचपन के शौक ने बनाया डाक टिकटों का खजाना
मौहम्मद अब्दुल्ला बताते हैं कि बचपन में घर पर आने वाली चिट्ठियों पर लगे डाक टिकट उन्हें बेहद आकर्षित करते थे। यहीं से टिकट इकट्ठा करने का शौक शुरू हुआ, जो समय के साथ जुनून में बदल गया। आज यही जुनून एक बड़े संग्रह का रूप ले चुका है। एम.आई.एम. उलूम, दीपा सराय में उनके इस संग्रह को संग्रहालय की तरह सहेजकर रखा गया है।
- 20 साल से लगा रहे प्रदर्शनी, रामायण-महाभारत के टिकट भी खास
अब्दुल्ला के मुताबिक, वह पिछले करीब 20 वर्षों से डाक टिकटों की प्रदर्शनी लगाते आ रहे हैं। उनके संग्रह में रामायण और महाभारत जैसे विषयों पर जारी डाक टिकट भी देखने को मिलते हैं। उनका कहना है कि डाक टिकट महज कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि किसी देश की संस्कृति, उपलब्धियों, आविष्कारों और विकास को दर्शाने का माध्यम हैं।
- बच्चों से उम्मीद, आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगी विरासत
मौहम्मद अब्दुल्ला चाहते हैं कि उनके बाद भी यह संग्रह सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियां इससे इतिहास को समझ सकें। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी के पास पुराने डाक टिकट मौजूद हैं, तो उन्हें फेंकने या बर्बाद होने देने के बजाय सुरक्षित रखने में सहयोग करें। उनकी कोशिश है कि यह अनमोल संग्रह भविष्य में एक व्यवस्थित संग्रहालय के रूप में विकसित हो, ताकि डाक टिकटों के जरिए इतिहास और विरासत की यह कहानी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती रहे।
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