Nana Patekar Demise: नाना पाटेकर के निधन के बाद तनुश्री दत्ता की तीखी प्रतिक्रिया, 2018 के MeToo विवाद की यादें फिर हुईं ताजा
नाना पाटेकर के निधन के बाद अभिनेत्री तनुश्री दत्ता की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। साल 2018 के मीटू (#MeToo) आंदोलन के दौरान दोनों के बीच का विवाद सबसे ज्यादा चर्चा में रहा था।
- तनुश्री दत्ता बनाम नाना पाटेकर: अभिनेता के निधन पर एक्ट्रेस के बेबाक बयान से सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
- Nana Patekar Tanushree Dutta Row: 'हॉर्न ओके प्लीज' से शुरू हुआ विवाद फिर चर्चा में, नाना के जाने पर क्या बोलीं तनुश्री दत्ता?
- #MeToo Controversy: नाना पाटेकर के निधन के बाद तनुश्री दत्ता का रिएक्शन वायरल, पुराने आरोपों पर सामने आए कड़े बोल
मुंबई: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन के बाद जहां एक ओर पूरा सिनेमा जगत और उनके प्रशंसक शोक में डूबे हैं, वहीं दूसरी ओर अभिनेत्री तनुश्री दत्ता की ओर से सामने आई तीखी प्रतिक्रियाओं ने सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। साल 2018 में जब भारत में 'मीटू' (#MeToo) आंदोलन की शुरुआत हुई थी, तब तनुश्री दत्ता द्वारा नाना पाटेकर पर लगाए गए गंभीर आरोपों ने देश भर में तहलका मचा दिया था। अब अभिनेता के देहावसान के बाद तनुश्री के सख्त और तल्ख बयानों ने करीब आठ साल पुराने उस चर्चित विवाद को एक बार फिर से सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया है।
अभिनेता के निधन पर जहां अधिकांश हस्तियों ने श्रद्धांजलि संदेश साझा किए, वहीं तनुश्री दत्ता ने अपने पुराने रुख पर कायम रहते हुए बेहद सख्त लहजे में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के इस दुनिया से चले जाने मात्र से उसके अतीत के कर्म, उत्पीड़न के आरोप और उनसे उपजा मानसिक आघात स्वतः समाप्त नहीं हो जाता।
- तनुश्री दत्ता का तीखा बयान: क्या कहा अभिनेत्री ने?
अभिनेता के निधन के उपरांत मीडिया माध्यमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सामने आए अपने बयानों में तनुश्री दत्ता ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपने पुराने स्टैंड को दोहराया। अभिनेत्री ने कहा कि समाज में अक्सर किसी व्यक्ति के जाने के बाद उसके तमाम विवादों और गलतियों पर पर्दा डालने की प्रवृत्ति देखी जाती है, लेकिन पीड़ित के नजरिए से न्याय और संघर्ष की लड़ाई कभी खत्म नहीं होती।
तनुश्री ने कहा कि उन्होंने जिस मानसिक प्रताड़ना, करियर के नुकसान और सार्वजनिक अपमान का सामना किया था, उसकी टीस आज भी उनके जीवन का हिस्सा है। उन्होंने अपने बयान में यह भी रेखांकित किया कि कानूनी रूप से भले ही मामलों में खात्मा या क्लोजर रिपोर्ट दाखिल हो गई हो, लेकिन सच और अंतरात्मा की अदालत में बातें कभी नहीं बदलतीं। उनके इस बेबाक रुख ने सोशल मीडिया पर दो विपरीत धड़े खड़े कर दिए हैं—जहां एक वर्ग उनके साहस का समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरा वर्ग दिवंगत व्यक्ति के प्रति संवेदनशीलता बरतने की सलाह दे रहा है।
- 2008 का वो सेट और 2018 का ऐतिहासिक #MeToo आंदोलन
इस पूरे विवाद की जड़ें वर्ष 2008 में बनी फिल्म 'हॉर्न ओके प्लीज' (Horn Ok Pleassss) के सेट से जुड़ी हैं।
2008 की घटना: फिल्म के एक स्पेशल डांस नंबर की शूटिंग के दौरान तनुश्री दत्ता ने आरोप लगाया था कि नाना पाटेकर ने कोरियोग्राफी के बहाने उनके साथ अनुचित शारीरिक निकटता बनाने की कोशिश की और उनके मना करने पर सेट पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को बुलाकर उनकी कार पर हमला कराया गया। उस समय इस घटना के बाद तनुश्री ने खुद को हिंदी सिनेमा से लगभग अलग कर लिया था।
2018 में आंदोलन का आगाज: ठीक दस साल बाद, 2018 में जब तनुश्री दत्ता ने एक साक्षात्कार में इस घटना को दोबारा सार्वजनिक रूप से उठाया, तो भारत में #MeToo आंदोलन की शुरुआत हुई। उनके इस कदम के बाद फिल्म उद्योग, मीडिया, कला और कॉर्पोरेट जगत की दर्जनों महिलाओं ने अपने साथ हुए कार्यस्थल पर उत्पीड़न की दास्तानें साझा की थीं।
- कानूनी लड़ाई और ओशिवारा पुलिस की 'बी-समरी' रिपोर्ट
तनुश्री के आरोपों के बाद नाना पाटेकर ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी छवि खराब करने की दुर्भावनापूर्ण कोशिश बताया था। इस मामले ने एक लंबी कानूनी लड़ाई का रूप लिया:
एफआईआर दर्ज होना: तनुश्री की शिकायत पर मुंबई के ओशिवारा पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 509 के तहत नाना पाटेकर, कोरियोग्राफर गणेश आचार्य और फिल्म निर्माताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट: लंबी जांच और गवाहों के बयानों के बाद, वर्ष 2019 में मुंबई पुलिस ने अदालत में 'बी-समरी' (B-Summary) रिपोर्ट पेश की। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उन्हें अभिनेता के खिलाफ आरोपों को साबित करने के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।
तनुश्री का विरोध: अभिनेत्री ने पुलिस की इस जांच को पक्षपातपूर्ण बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट के खिलाफ प्रोटेस्ट पिटीशन दायर की थी और लगातार आरोप लगाया था कि प्रभाव के चलते मामले को दबाने की कोशिश की गई।
- सोशल मीडिया पर छिड़ा विमर्श: नैतिकता बनाम अभिव्यक्ति
तनुश्री दत्ता के ताजा बयानों के बाद इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई सोशल मीडिया यूजर्स और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि किसी पीड़ित को यह बताने का हक समाज को नहीं होना चाहिए कि उसे अपने कथित उत्पीड़क की मौत पर कैसा व्यवहार करना चाहिए या कब शोक जताना चाहिए। उनके अनुसार, ट्रॉमा और दर्द की कोई समय-सीमा नहीं होती।
वहीं, नाना पाटेकर के समर्थकों और कई फिल्म प्रेमियों का तर्क है कि भारतीय संस्कृति में देहांत के उपरांत कटुता को भुला देने की परंपरा रही है, खासकर तब जब पुलिस जांच में आरोपों के कानूनी साक्ष्य नहीं मिले थे। इस प्रकार तनुश्री के ताजा बयानों ने कला, कानून, नैतिकता और कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर सवालों को एक बार फिर से विमर्श की मुख्यधारा में ला खड़ा किया है।
What's Your Reaction?