मिर्जापुर द मूवी पर बढ़ा विवाद: 'शूरवीर' गीत के इस्तेमाल पर सेंसर बोर्ड में शिकायत, महाराणा प्रताप के अपमान का आरोप
'मिर्जापुर द मूवी' में शूरवीर गीत के प्रयोग पर विवाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने सेंसर बोर्ड को पत्र भेजकर आपराधिक दृश्य से गीत हटाने की मांग की।
लखनऊ। आगामी फिल्म ‘मिर्जापुर द मूवी’ में लोकप्रिय गीत ‘शूरवीर’ के कथित उपयोग को लेकर विधिक और सांस्कृतिक स्तर पर कड़ा विरोध शुरू हो गया है। राजस्थानी गायक रैपरिया बालम द्वारा गाए गए इस प्रसिद्ध गीत को फिल्म के भीतर आपराधिक चरित्र और गैंगस्टर पृष्ठभूमि वाले दृश्य में दर्शाए जाने पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सौरभ सिंह सोमवंशी ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के अध्यक्ष शशि शेखर वेम्पति को पत्र लिखकर औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने बोर्ड से मांग की है कि इस गीत के फिल्मांकन, संदर्भ और उसके उपयोग के अधिकार संबंधी दस्तावेजों की गहन समीक्षा की जाए।
अधिवक्ता सौरभ सिंह सोमवंशी ने अपनी शिकायत में तर्क प्रस्तुत किया कि ‘शूरवीर’ गीत वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के अनुपम पराक्रम, राष्ट्रभक्ति, त्याग, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को समर्पित एक प्रेरक रचना है। यह गीत लोकसंस्कृति और भारतीय वीरता की पहचान बन चुका है। ऐसे पावन एवं राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत गीत को फिल्म में अपराध और नकारात्मकता के प्रतीक बने मुन्ना भैया के प्रवेश दृश्य की पृष्ठभूमि पर दिखाना न केवल ऐतिहासिक मूल्यों का अवमूल्यन है, बल्कि जनभावनाओं को भी गंभीर ठेस पहुंचाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराणा प्रताप किसी सीमित जाति अथवा वर्ग के नहीं, बल्कि समूचे देश के गौरव और राष्ट्रीय अस्मिता के प्रतीक हैं, अतएव उनके शौर्य से जुड़ी किसी भी रचना के प्रस्तुतीकरण में संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।
शिकायत पत्र में यह भी दर्शाया गया है कि गीत के मूल गायक रैपरिया बालम ने भी अपनी रचना का इस प्रकार व्यावसायिक व आपराधिक प्रसंग में उपयोग किए जाने पर असंतोष जताया है। इसे देखते हुए सेंसर बोर्ड से आग्रह किया गया है कि निर्माण पक्ष द्वारा लिए गए बौद्धिक संपदा अधिकारों और अनुमति प्रपत्रों की जांच की जाए। अधिवक्ता ने चेतावनी दी है कि कलात्मक स्वतंत्रता की आड़ में ऐतिहासिक महापुरुषों और सांस्कृतिक प्रतीकों की गरिमा को आहत करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि नियामक संस्था द्वारा समय रहते विवादित दृश्य अथवा गीत के अंश को हटाने या संशोधित करने का कदम नहीं उठाया गया, तो फिल्म निर्माण से जुड़े जिम्मेदारों के विरुद्ध सक्षम विधिक मंचों पर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
What's Your Reaction?







