GBC 5.0 Sonbhadra: सोनभद्र में 14,612 करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर एमओयू, 20 हजार करोड़ के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंचा जिला
ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC 5.0) के तहत सोनभद्र जिले ने 14,612 करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर हस्ताक्षर कर लिए हैं। जिले में अडानी समूह और टीएचडीसी द्वारा बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट स्थापित किए जाएंगे।
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक कायाकल्प और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप 'ऊर्जांचल' के नाम से विख्यात सोनभद्र जिला अब भारी-भरकम पूंजी निवेश का नया केंद्र बनकर उभर रहा है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की निरंतरता में आगामी 'ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी' (GBC 5.0) के लिए राज्य शासन द्वारा जिले को निर्धारित 20,000 करोड़ रुपये के महत्वाकांक्षी निवेश लक्ष्य के बेहद करीब सोनभद्र पहुंच गया है। जिला प्रशासन के सक्रिय प्रयासों के चलते अब तक कुल 33 महत्वपूर्ण औद्योगिक एवं ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 14,612 करोड़ रुपये के सहमति पत्रों (MoUs) पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।
लक्ष्य की प्राप्ति में अब केवल 5,388 करोड़ रुपये का अंतर शेष रह गया है। प्रशासनिक अमला शेष राशि के निवेश प्रस्तावों को अंतिम रूप देने और चालू परियोजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित करने के लिए संबंधित औद्योगिक घरानों और तकनीकी विभागों के साथ लगातार समन्वय स्थापित कर रहा है।
पनौरा और बसुधारी में ऊर्जा क्षेत्र के दो मेगा प्रोजेक्ट्स
सोनभद्र में आकर्षित कुल निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा हरित ऊर्जा, जल विद्युत और ऊर्जा भंडारण (पावर स्टोरेज) के क्षेत्र में आ रहा है। यह निवेश न केवल राज्य के ग्रिड को मजबूती देगा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पीक-ऑवर ऊर्जा संतुलन में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा।
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अडानी समूह का पनौरा पीएसपी प्लांट: प्रमुख निजी औद्योगिक समूह 'अडानी ग्रुप' द्वारा जिले के पनौरा क्षेत्र में 7,400 करोड़ रुपये की विशाल लागत से पंप्ड स्टोरेज पावर (PSP) प्लांट स्थापित किया जाएगा। यह संयंत्र सौर और गैर-परंपरागत ऊर्जा की अतिरिक्त उपलब्धता के समय पानी को ऊंचे जलाशय में पंप करेगा और आवश्यकता पड़ने पर टरबाइन के जरिए त्वरित बिजली उत्पादन सुनिश्चित करेगा।
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टीएचडीसी का बसुधारी में उपक्रम: सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठित उपक्रम 'टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन' (THDC) ने बसुधारी में लगभग 6,400 करोड़ रुपये के भारी निवेश से आधुनिक ऊर्जा परियोजना स्थापित करने के लिए एमओयू निष्पादित किया है।
इन दोनों परियोजनाओं का संयुक्त निवेश ही 13,800 करोड़ रुपये बैठता है, जो जिले की पारंपरिक ताप विद्युत (थर्मल पावर) पहचान को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा उत्पादन के नए युग में ले जाने का आधार बनेगा।
33 परियोजनाओं से बदलेगा स्थानीय आर्थिक परिदृश्य
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के अनुसार, शासन स्तर से प्राप्त 20,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 73 प्रतिशत से अधिक का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है। शेष 5,388 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के लिए भूमि चिह्नांकन, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है।
जिला प्रशासन का मुख्य ध्यान इन निवेशों को केवल फाइलों तक सीमित रखने के बजाय निर्धारित समय-सीमा में जमीन पर उतारने का है। इसके लिए 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस' व्यवस्था के तहत औद्योगिक इकाइयों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
स्थानीय रोजगार, सेवा क्षेत्र और बुनियादी ढांचे को गति
सोनभद्र जैसे आदिवासी और खनिज बहुल जनपद में 14 हजार करोड़ से अधिक के निवेश का सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था के विविध आयामों पर पड़ेगा:
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प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार: निर्माण चरण से लेकर प्लांट के संचालन तक हजारों स्थानीय कुशल, अर्ध-कुशल श्रमिकों, डिप्लोमा इंजीनियरों और तकनीकी युवाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका मिलेगी।
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संबद्ध उद्योगों को विस्तार: सीमेंट, सरिया, क्रशर, खनन सामग्री और भारी इंजीनियरिंग उपकरणों की मांग में इजाफा होगा।
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स्थानीय परिवहन और सेवा क्षेत्र: भारी वाहनों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, वर्कशॉप, होटल-रेस्तरां और आवासीय सुविधाओं के विस्तार से छोटे व्यापारियों और सेवा प्रदाताओं को निरंतर काम मिलेगा।
इन वृहद निवेश प्रस्तावों के धरातल पर उतरने से 'सोनांचल' के रूप में पहचाने जाने वाले इस सीमावर्ती जिले में औद्योगीकरण की नई बयार बहेगी, जिससे पलायन की समस्या को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
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